Chudai Story अनोखी चुदाई - Printable Version

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RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

वो मेरे लण्ड पर, टूट पड़ी थी.. बोली – ऐसा लण्ड उस ने, कभी नहीं देखा…
तो मैंने पूछा – तुम्हारे मर्द का कैसा था…
कुकी बोली – मोटा था, बहुत पर 6 7 इंच लंबा ही था… बहुत चोदता था, मादार चोद मुझे… कुछ ही महीनों में, मेरी चूत चौड़ी कर दी थी उस ने चोद चोद कर… शादी के बाद, हर रोज दो या तीन बार ठोकता था… ड्राइवर था, ट्रक चलाता था… घर आते ही उस का पहला काम था, एक बार मेरी चुदाई करना… बड़ा मज़ा आता था, मुझे चुदने में… उस ने गाँव में, दो और भाभियों को चोदा जिन को मैं जानती थी… वो कहती थीं की तेरे मर्द का लण्ड, गधे जैसे मोटा है और चूत में जैसे फिट हो जाता है… मुझे बड़ा मज़ा आता था, ये सब सुन के औ मेरा जी चाहता था की मेरे सामने, उन्हें चोदे पर मैंने कभी कुछ नहीं कहा उसे… एक दिन, उस का ट्रक पहाड़ी से नीचे गिरा और वो मर गया… एक साल के अंदर ही, मैं विधवा हो गई… मेरा तो सब कुछ चला गया, उस के साथ ही… सच में, बहुत प्यार करती थी अपने मर्द से मैं… उसका प्यार ही था जो आज तक मेरी चूत बंद पड़ी है… लेकिन, क्या करती आख़िर चूत की आग का क्या करूँ… वो तो चला गया… पर जब से, मैंने तेरे लण्ड को देखा है, मेरी नीड उड़ गई है… क्या धारधार मूतता है रे, तू… 
मैंने पूछा – मेरा कहाँ देखा… 
तो बोली – एक बार, जब तू मूत रहा था और दूसरी बार, जब तू नहा रहा था… अपने बाथरूम में तो मैंने साइड की खिड़की से देख लिया था… बहुत बड़ा है रे, भीमा तेरा… मज़ा आ गया…
फिर उस ने मेरे लण्ड पर तेल की मालिश की और अपनी चूत में सरसों का तेल अंदर तक लगाया.
फिर वो बोली – अब चढ़ जा, मेरे ऊपर और अपने लण्ड को मेरी चूत में धीरे से डाल दे… 
मैं हैरान था, वो इतनी टाइट चूत में मेरा पूरा लण्ड ले गई.
जब मैंने अपने लण्ड को बाहर निकाला तो “खून” लगा था उस पर पर कुकी बोली – डर मत, गधे… पूरा अंदर डाल और चोद मुझे…
मैंने खूब दिल भर कर, चोदा उसे.
फिर वो बोली – हरामी, अपना बीज़ बाहर ही निकालना अंदर नहीं…
फिर तो बीबी जी, उन चार दिनों तक मैंने उसे दिल भर कर चोदा और वो भी जब दिल करे, टाइम निकाल आ जाती थी.
लेकिन, मां के आने से यह सब बंद हो गया. बस कभी महीने में एक दो बार, चान्स लगता था.
कुकी ने मुझे पूरा “चुदाई मास्टर” बना दिया था.
कुकी मेरा लण्ड ले ले के मोटी और चौड़ी गाण्ड, वाली हो गई थी.
कुछ दिन बाद, जब हम काफ़ी खुल गये तब मैंने कुकी से कहा – कोई और मिल सकती है, क्या… 
तो वो बोली – तू तो साले किस्मत वाला है… तेरा लण्ड, इतना बड़ा और मोटा है की कोई भी औरत इसे अपनी चूत में लेने को, बेताब हो जाएगी… 
मैंने कहा – तो डलवा ना…
कुकी ने पूछा – कोई है, नज़र मैं क्या… ?? 
मैंने कहा – शीला भाभी, कभी कभी मुझे काम पर बुलाती है और मुझे उस की गाण्ड देख कर करंट लग जाता है.
शीला भाभी… … 
टीचर है, गाँव में.. 
अब मैं, बोली – वाह !! भीमा… वो तो, बहुत सुन्दर और सुडौल है… क्या सच में फँस गई, तेरे साथ… 
वो बोला – कुकी ने ही दिमाग़ दिया, बीबी जी… बोली, जब वो काम के लिए बुलाए तो तू अपना लण्ड खड़ा कर लेना, किसी तरह… फिर देखना की क्या होता है… 
एक दिन, शीला भाभी ने सुबह जहाँ पशु बाँधते हैं कुछ समान उठाने के लिया बुलाया, जो की भारी था. 
वो माँ से बोली – भीमा, थोड़ी देर के लिए चाहिए… 
तो माँ ने कहा – ठीक है और मुझे बोली की शीला का काम ख़तम कर के, सीधे खेत में आ जाना…
मैंने बोला – ठीक है, मां जी…
फिर ऐसा हुआ की मैं समान उठा रहा था और शीला भाभी, मेरे साथ ही काम में लगी थी. 
भाभी ने, जो कपड़े पहने थे वो बहुत पतले से थे.
वो बार बार, मेरे साथ टकरा रहीं थीं.
उस के बूब्स और गाण्ड देख कर, मेरा लण्ड खड़ा हो गया. 
भाभी की नज़र, जब मेरी निक्कर पर पड़ी तो वो खड़ी ही रह गई और मेरी तरफ मुस्कराते हुए, देखने लगी. 
कुकी ने सही कहा था, मेरे लण्ड ने उस पर जादू का काम क्या था.
फिर वो मुस्करा कर बोली – भीमा, एक मिनट… 
मेरे नज़दीक आई और सीधा मेरी निक्कर में हाथ डाल दिया और बोली – अंदर लंगोट, पहन लिया कर… 
मैं चौंक गया, क्या करूँ.. यह सोचने लगा की भाभी क्या बोलेगी, मुझे.. 
पर वो इससे ज़्यादा कुछ नहीं बोली और मेरा लण्ड पकड़ कर, हिलाने लग पड़ी. 
भीमा, ऐसा लोडा मैंने कभी नहीं देखा, आज तक… मैंने पहले भी, तीन चार मर्दों से चुदाई करवाई है किंतु तेरे लण्ड जैसा किसी का नहीं… – भाभी ने कहा..
उस ने मेरे लण्ड पर थूक लगाया और आगे पीछे करने लग पड़ी.
मुझे, बड़ा अच्छा लग रहा था. 
फिर दोबारा, ढेर सारा थूक लगाया और बोली – थोड़ा रुक… मां तो है नहीं, यहा वो तो खेतों में चली गई है… और उस ने फटाफट, अपनी सलवार खोल दी और एक फटी हुई चटाई पर लेट गई और बोली – तूने, कभी ऐसी चूत देखी है पहले… देख, एक भी बाल नहीं है इस पर…
मैंने कहा – नहीं भाभी… पहली बार ही, देख रहा हूँ… 
पर बीबी जी, उनकी चूत थोड़ी सी “काली” थी जब की कुकी की एकदम दूध सी गोरी..
भाभी बोली – अच्छी से देख ले, आज… 
उस ने टाइम नहीं गवाया और सीधा, मेरा लण्ड अपने चूत पर रखा और बोली – थूक लगा के अंदर डाल… इस मूसल को धीरे से…
मैंने कहा – भाभी, क्या कह रही हैं आप… मैं आपका नौकर हूँ… 
वो बोली – अरे, कुत्ते… तुझे बिन माँगे, “चिकनी चूत” मिल रही है… साले, यह तो माँगने पर भी नहीं मिलेगी… मिलनी तो क्या, दर्शन भी नहीं होंगे… और नौकर वोकर, कुछ नहीं… अभी तू सिर्फ़ एक लंड है और मैं एक चूत… गाँव के लोग, मेरी गाण्ड और दूध देख कर, लण्ड हाथ में ले कर खड़े रहते हैं की मिले तो फाड़ डाले इस की… यह तो तेरे लण्ड की करामात है जो मैं, दो मिनिट में तेरे नीचे पड़ी हूँ, फ्री में… वरना लोग, अपने खेत मेरे नाम कर दें, इस चूत और गांड के लिए… समझा… जल्दी कर… 
वो नीचे लेट गई थी और बोली – अब चढ़ जा, सांड की तरह… मेरे ऊपर और घुसेड दे इस 10” डंडे को… 
उसने फिर से, अपने चूत पर थूक लगाया और मेरे लण्ड पर भी लगाया और ज़ोर से ऊपर को धक्का मारा.
मेरा आधा लण्ड, एक बार में अंदर चला गया. 
कुक्की की तरह, उसकी चूत कसी नहीं थी.
उसे इतना जोश आ गया था की बोली – पूरा ज़ोर से धक्का लगा और अंदर कर दे… 
मैंने भी अब देर नहीं की और दे दिया, ज़ोर का धक्का.
पूरा लण्ड झटके से, अंदर चला गया.
वो ज़ोर से चीखी, लेकिन अपना ही हाथ रख कर अपनी आवाज़ रोक ली फट से. 
फिर, वो बोली – मादर चोद, फट गई रे आज़ मेरी चूत… धीरे से, चोद अब मुझे…
कुकी की चुदाई कर के, मैं अब तक सीख गया था की कैसे चोदना है. 
15 मिनट तक, ज़ोर लगा लगा के चोदा मैंने भाभी को और मैंने अपना पूरा पानी, उस की चूत में ही डाल दिया. 
फिर वो बोली – बहन चोद, भर दी मेरी चूत… तू ने साले… मेरा पानी, अभी भी अंदर ही भरा पड़ा है…
फिर उस ने उठते ही, फट से उठ कर पेशाब कर दिया.
वो बोली – सारा माल बाहर कर देती हूँ नहीं तो मुश्किल में पड़ जाउंगी…
सच मुझे बड़ा मज़ा आया, उस दिन. 
पहली बार, पता चला की इतनी सुंदर, साफ सूत्री, बिना बाल की चूत में, लण्ड डाल कर चोदने में कितना मज़ा आता है और कैसे, आग लगी चूत चुदाई करवाती हैं.
शीला भाभी, बड़ी सुंदर हैं. उन्हें देखते ही मेरा लण्ड, हुंकार भरने लगता था अब तो. 
जाते जाते, भाभी बोली – भीमा, मज़ा आ गया… तेरा बड़ा लंबा और मोटा है… इसे औरतों को मत दिखना नहीं तो तेरी खैर नहीं… मोटे लंड के लिए, बड़ी से बड़ी “शरीफ औरत” का ईमान डोल जाता है… 
अब मैंने पूछा – अभी भी करते हो या बंद कर दी…
भीमा – करती हैं ना, बीबी जी… मौका ताड़ते ही, टूट पड़ती हैं…
मैं – कहाँ करते हो अब, यह सब कुछ… 
तो भीमा बोला – जहाँ पशु बाँधते हैं… सुबह सुबह ही कर लेते हैं… या फिर जब किसी काम को भाभी जी बुलाती है या फिर भैया को कहीं जाना हो तब…
मैं – कैसी हैं, भाभी… 
वो बोला – बहुत ही अच्छी हैं और बड़ा मज़ा आता है, शीला भाभी को चोदने में… उन की गाण्ड भी मोटी है इस लिए तो जब मैंने पहले दिन चोदा था तो इतनी तकलीफ़ नहीं हुई थी, भाभी को… उचक उचक कर, चुदाई करवाती हैं… सब कुछ सीखा दिया है, कुकी ने मुझे… कुकी कहती है की जिस औरत की गाण्ड मोटी या चौड़ी है, समझो मोटा लण्ड खा रही है और मेरे जैसे का आराम से ले लेगी… अब तो उन की गाण्ड और भी मोटी हो रही है… भाभी और कुकी दोनों, कभी कभी मुझसे गांड भी मरवाती हैं और मेरे मूठ से अपने गांड की मालिश करवाती है… भाभी तो चोदते चोदते, कभी मेरे लंड पर मूत भी देती हैं… कहती हैं, उससे कोई रोग नहीं होता…
फिर उसने बताया की एक दिन, भाभी उससे बोली – भीमा, तू ऐसे ही चोदता रहा तो मेरी गाण्ड और मोटी और चौड़ी हो जाएगी… अब तक किसी को भनक तक नहीं लगी की हम यह काम करते हैं… तेरे भैया तो चूतिए है, उनको कुछ समझ नहीं पड़ता… पर मां की नज़र पारखी है… 
फिर भाभी ने मुझसे पूछा – एक बात बता, सच सच किसी और की तो नहीं फादी तूने… 
मैं बोला – नहीं, भाभी जी… 
भाभी – चोदेगा, किसी को…
मैं – किस को चोदूँ… आप बताओ और केसे होगा, यह सब… मुझे कौन देने वाली है या चुदवाने वाली है यहाँ पर…
भाभी बोली – अभी नहीं… बाद में बताउंगी क्या करना है और कैसे करना है… पर किसी को कानों कान, खबर नहीं होनी चाहिए… समझा…
इस बीच में, ना मुझे बारिश का ख़याल था ना समय का.


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

ना जाने, कितनी देर हो गई थी और यहाँ भीमा की बातों से मेरी चूत तो पानी से भर गई थी.. 
सोच रही थी की अगर, भीमा ने जबरदस्ती कर दी तो ज्यादा देर नहीं लगेगी इस के लण्ड को घुसने में क्योंकि अब तक उस का डंडा खड़ा ही था.
कह तो वो सच रहा था, उसका लंड वाकई बहुत बड़ा था. 
पर मैंने भी पूरी तरह से, अपने ऊपर कंट्रोल कर रखा था और उस से बातें करती रही.
वो फिर शुरू हुआ.
मज़ा, उसे भी बहुत आ रहा था.
फिर एक दिन, शीला भाभी ने कहा – लकड़ी काटने है… जंगल से… जंगल कोई दो किलोमीटर पर है… 
सो उन्होने मां से बोली की दो तीन घंटे के लिए, भीमा चाहीए…
मां ने कहा – लिये जा… कोई काम नहीं है, उसे आज… 
और वैसे भी, भाभी मुझे पैसे दे देती थी, जो मैं माँ को बता देता था.
मां कहती – रख ले गूड़बक और खा लेना, जो मर्ज़ी इन पैसों से… मज़ा कर…
किसी को, कभी शक़ भी नहीं होता था.
सब सोचते मैं “एडा” हूँ.
मुझे हँसी आई क्यूंकी मैं भी, ऐसा ह सोचती थी.
फिर, भीमा बोला – उस दिन, भाभी को एक पानी के नाले के पास खड़े खड़े ही चोदा… 
सबसे ज़्यादा मज़ा, मुझे तब ही आया.
भाभी, पेड़ का सहारा ले उल्टी खड़ी थी और मैंने पीछे से लंड घुसाया उनकी चूत में.
हर झटके मे, उनकी “नरम, नरम, मांसल गांड” मेरे से टकराती तो मुझे बहुत मस्त लगता.
हाँ, बीबी जी.. लेकिन, उस दिन मेरा जल्दी निकल गया..
मैंने भाभी की गांड पर छोड़ा और भाभी ने मेरे मूठ से काफ़ी देर मालिश कराई.
मालिश करते करते, मैंने भाभी से कहा – भाभी बताओ ना, कोई और है क्या… किस को चोद सकूँ… आपने उस दिन कही थी… 
भाभी बोली – तू बहुत चालू हो गया है, कुत्ते अब तो… ज्यादा लालच ठीक नहीं, बहन चोद… और ख़याल रही की यह गाँव है… किसी को पता चला तो तू गया, काम से… यह बड़ा, बहन चोद गाँव है… भून देंगे, गोलियों से तुझे… और पहली गोली मां ही चलाएगी, जिस का तू बड़ा चहेता है… 
खैर, मेरे काफ़ी कहने पर भाभी बोली – भीमा, तू ऋतु दीदी और बड़ी भाभी के घर जाता है क्या… 
मैंने कहा – कभी कभी… लेकिन, क्यों पूछा आप ने… 
तो भाभी बोली – कही, उन की नज़र ना पड़ जाए… तेरे इस घोड़े जैसे लौड़े पर और यह हो गया तो तेरे मज़े हो जाएँगे… ऋतु और उसका पति तो साथ में, मज़े लेते हैं… मैंने देखी, एक बार दुपहरी के समय दोनो मिया बीबी, अपनी गाँव की भूरी के साथ चुदाई कर रहे थे… बड़ा मज़ा आया, मुझे देखन में… चुदाई देख, दबे पाँव लौट आई मैं… और तेरे को बता दूं भीमा, की कोई भी औरत जब तेरे जैसे के इतने बड़े और मोटे लण्ड को देखेगी तो वो रह नहीं पाएगी, अपनी चूत में इसे लिए बगैर… गाँव की सब से टॉप की औरतें हैं, यह दोनों ही हैं… घर की बात घर में… कोई डर भी ना… 
भीमा – लेकिन भाभी, ऐसा कैसा होने लगा… 
भाभी बोली – तेरे लण्ड की लंबाई और मोटाई देख कर, कोई भी औरत तेरे से मरवाना चाहेगी… पर तेरे को ध्यान रखना होगा की तू उन्हें, यह लण्ड खुद ना दिखाए… बस अचानक ही, अकेले में निक्कर में खड़ा कर के खड़े रहना जैसे पता ही ना हो… फिर देखना, उन की चूत कैसे पानी छोड़ती है…
भीमा – भाभी, वो इतनी सुंदर और अच्छी हैं की ऐसा नहीं हो सकता… पढ़ी लिखी हैं, सो अलग… 
तो भाभी बोली – सुअर की औलाद… मैं नहीं हूँ, क्या पढ़ी लिखी… मैं पराए लण्ड नहीं घुसवाती… तुझे क्या लगता है, मैं किसी और का नहीं लेती… वो और ज्यादा चुड़दकड़ है… बेपनहा चुदती हैं… तू घबरा मत, अपनी कोशिश चालू रख… एक दिन, दोनों ही तेरा यह डंडा अंदर ज़रूर ले लेंगी… 
टाइम, बहुत ज़्यादा हो गया था. 
मज़ा तो बहुत आ रहा था पर था, वो गाँव सो मैंने कहा – चलो, घर चलें… अब फिर बाकी की बातें होंगी… और, हम घर चले गये.
भीमा, अब अपनी निक्कर में अपने लण्ड को दबा रहा था. 
मैंने कहा की ठंडा कर ले, इस को अब… नहीं तो घोड़े की तरह गाँव भरे में हिलता रहेगा… गाँव में, सही नही लगेगा… मेरे साथ है… नहीं तो मूठ मार ले… पता है ना, कैसे मारते हैं… और तू लंगोट, क्यूँ नहीं पहनता… 
भीमा – हाँ, बीबी जी… पर मैं यह बहुत कम करता हूँ… एक बार कुकी ने तेल लगा कर मारी थी, मेरी मूठ… पूरा ज़ोर लगा दिया था, उस ने… जब निकाला था तो बोली थी की देख, कैसे निकलता है तेरा पानी घोड़े की तरह…
तीन दिन के बाद… 
मैंने मां को कहा की भीमा को घर भेज दें… घर की सफाई, करनी है…
भीमा, सुबह ही आ गया था.
मैंने भीमा को काम पर लगा दिया और बातें करने लगी.. .. 
मैं – हाँ तो भीमा… बता आगे… फँसा उन में से, कोई… 
वो बोला – शर्म आती है बीबी जी, बताने को… 
मैंने कहा – 1000 रुपए और दे दूँगी… 
वो खुश हो गया और चालू हो गया.
भीमा – बुरा मत माने, बीबी जी… आप की बड़ी बहन ऋतु, एक दिन अचानक ही फँस गई… शीला भाभी वाला आइडिया, ऋतु दीदी पर भी चल गया…
मैं – क्या कह रहे हो… वो ऐसा नहीं कर सकती… मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा… कैसे फँसी, वो तेरे साथ… 
वो बोला – एक दिन, हम घास काट रहे थे… बहुत टाइम से काम में लगे थे… खाना खाने के बाद, हम यह काम ख़तम कर के जाना चाहते थे… मां और कुकी, खाली बर्तन ले कर चली गई, घर और भाभी जी नहीं आई थी, उस दिन… 
दीदी ने कहा – भीमा, जल्दी करो… हम भी चल पड़ेंगे, थोड़ी देर में… 
मैंने कहा – ठीक है, दीदी जी… 


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

तभी बड़ी ज़ोर की पेशाब लगी दीदी को, सो वो बिना कुछ बोले थोड़ी साइड में जा कर पेशाब करने लगीं.
उन्होंने सोचा भीमा काम कर रहा है, उसे क्या पता चलेगा इस घास में. 
पर बड़ी ज़ोर की आवाज़ आ रही थी उनकी मूतने की, “सीटी” जैसी…
मैं छुप कर खड़ा हो गया और दीदी की तरफ, देखने लगा. 
उफ्फ !! दीदी सलवार ऊपर करने ही लगी थीं की मेरी नज़र उन की गाण्ड पर चली गई और दीदी जी ने भी देख लिया. 
दीदी बोली – भीमा, क्या देख रहे हो… 
मैं चुप रहा.. क्या बोलता.. 
वो बोली – चलो, अब तैयारी करो… सामान ले लो और चलें… 
यह सब देख कर, मेरा खड़ा हो गया था. 
फिर क्या हुआ… ?? – मैंने पूछा.. 
जब दीदी ने मेरा देखा की खड़ा हो गया है और में लण्ड को छुपा रहा हूँ तो दीदी बोली – भीमा क्या कर रहे हो… इसे अंदर रख, बाहर आ रहा है… 
मैंने खूब कोशिश की पर इतना लम्बा है की मुश्किल हो गया थे, छिपाना इसे.. 
बड़ी दीदी, बोली – भीमा, तेरा इतना लंबा है की छुपता तक नहीं है… चल दिखा अब, इसे मुझे… मैं भी देखूं की ऐसा कितना बड़ा है जो निक्कर मे छुप भी नहीं रहा है और वो हँसने लगी. 
मैं शर्मा गया.
दीदी ज़ोर से बोली – दिखाओ… 
मैंने धीरे से निकाल कर दिखा दिया. 
दीदी बोली – बाप रे, इतना मोटा और बड़ा लण्ड है रे तेरा… तभी तो यह छुप नहीं रहा था… यह ऐसे नहीं छुपेगा, भीमा… कोई तरक़ीब सोचनी होगी… 
फिर क्या था, दीदी ने मुझे साइड में घास के ऊपर बैठा दिया और हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. 
फिर थूक लगा कर, मेरे लण्ड को आगे पीछे करने लगी और अपने सलवार के अंदर हाथ डाल कर अपनी चूत भी सहलाने लगी और बोली – भीमा, घोड़ा बन गया है तू… इतना लंबा और मोटा तो घोड़े का ही होता है… और इस को ठंडा करने के लिए, घोड़ी ही चाहिए… घोड़ी, घोड़े का अंदर लेने को तैयार है… 
दीदी ने मुझे नीचे लेटा दिया और अपनी सलवार खोल कर, मेरे ऊपर चढ़ गई और धीरे धीरे मेरा लण्ड अंदर लेने लगी. 
कोई 15 मिनट में थूक लगा लगा कर, पूरा का पूरा अंदर ले लिया और ऊपर नीचे होने लगी.
दीदी बोली – तेरा बहुत बड़ा है, भीमा… दर्द हो रहा है लेकिन मज़ा भी आ रहा है… घोड़ा है रे, तू… 
फिर दीदी, धीरे धीरे मुझ पर चढ़ कर मुझे चोदती रही और निकल गया, उन का पानी.
मेरा माल, दीदी ने बाहर मूठ मार कर निकाल दिया. 
दीदी बोली – तेरा पानी भी घोड़े की तरह निकल रहा है… उफ्फ!! कितना निकल रहा है… देखा है क्या तूने घोड़े के लण्ड का पानी निकलता… 
मैंने कहा – हाँ, दीदी जी…
दीदी – भीमा, तेरे लौड़े का इतना पानी किसी की चूत में चला गया तो समझो फूल गया उस का पेट… 
दीदी ने 500 रुपये दिए और कहा – सुन भीमा, बताना मत किसी को भी… 
उस दिन, मैं दीदी की पूरी चूत नहीं देख पाया था पर बड़ा ही अच्छा लगा था.
दीदी, चीज़ ही ऐसी हैं की कोई भी मर जाए उन पर.
गोरी, चिकनी, चौड़ी गाण्ड और लंबे बाल. 
पर बीबी जी, मैंने आप को ही बताया हूँ, आप किसी को बताना मत. 
शीला भाभी की थोड़ी खुली है सो फिट बैठ जाता है लेकिन दीदी की चूत, बड़ी टाइट है, उसे तकलीफ़ होती है. 
फिर भी, हफ्ते में एक दो बार ज़रूर वो चुदवा लेती हैं.
फिर एक बार, मैंने बड़ी दीदी से पूछा की जीजा का लण्ड कितना बड़ा है… 
इस पर वो बोली – तेरे से आधा है पर चोदते बहुत हैं और मेरा दिल भर जाता है… लेकिन तेरा तो घोड़ा वाला लण्ड है… इस की तो बात ही और है… 
जब भी बड़ी दीदी को चुदवाना होता तो अब घर बुला लेती है, काम के बहाने.
घर पर पहले, दूध का गर्म गिलास पीने को देती है और कहती हैं की चोदने से पहले, घोड़े को तैयार केरना ज्र्रूरी होता है. 
जब भी चोदना हो तो कहती की बातरूम में लण्ड को साफ कर के आ जा. 
अब तो मुंह में ले के भी चूसती हैं, पर आज तक मुझे ऊपर नहीं चढ़ने दिया.
खुद ही, ऊपर चढ़ कर अंदर लेती हैं, धीरे धीरे.
जब मेरा माल निकलने वाला होता तो कह देती है की मेरे बूब्स पर डाल दे..
भाभी की तरह, वो भी मेरे माल से दूध की मालिश करती है.
हाँ, निप्पल पर नहीं लगने देती.
एक बात है, बीबी जी… बड़ी दीदी हैं बहुत साफ और बदन, एक दम से गोरा, गदराया हुआ.
दीदी की फुददी में लण्ड डाल कर, उन की गाण्ड को भींचने में मुझे बड़ा मज़ा आता है. 
मैंने पूछा की मेरे को माल अंदर क्यों नहीं डालने देती तो वो बोली – तेरा लण्ड बहुत लंबा है और मोटा भी है… जिस दिन, तेरे माल को अंदर लिया समझो गर्भ रह गया… मैं औलाद, तेरे जीजा के माल से ही पैदा करना चाहती हूँ… समझे, मेरे घोड़े… 
वो मुझे, धीरे धीरे चूत चाटने को कहती है. 
सो मैं सीख गया हूँ, बड़ा मज़ा आता है उन की चूत चाटने में.. 
कहती हैं की तुझे मैं चुदाई का “मास्टर” बना दूँगी… फिर जो भी चुदवायेगी, बार बार बुलागी तुझे…
मैंने कहा की तेरे मज़े हैं… जो दीदी, जैसी की चूत चोदने और चाटने को मिल रही है… दीदी को चोदना आसान नहीं है, यह में जानती हूँ… जवानी के दिनों में, कई लड़के अपना लण्ड हाथ में लिए घूमते थे, पर यह किसी को घास नहीं डालती थीं… यह तो तेरे लम्बे और मोटे लण्ड की ही करामात है… तू यह किसी को मत बताना, नहीं तो दीदी की इज़्ज़त की मां बहन हो जाएगी… समझा… दीदी को यह भी पता ना चले की मैं जानती हूँ, इस बात को… चाहे दीदी, कितना भी पूछे… 
मैंने देखा की भीमा, अब मेरे दूध की तरफ देख रहा है. 
उसने मौका देख कर, धीरे से अपने लण्ड को निकाल कर साइड में लटका दिया है. 
मेरी तो चूत, अब तक “आग” हो रही थी और उधर, भीमा का लण्ड अंदर घुसने को उतावला हो रहा था.
लेकिन, मैं भीमा की बातें सुनना चाहती थी. 
मैं तो बस, उसे तडफा रही थी नहीं तो भीमा तो मेरी चूत फाड़ने को तैयार था की कब मैं, सब की तरह उस का लण्ड हाथ में पकड़ लूँ और सलवार खोल कर अपनी चूत में उसका लंड घुसेड लूँ.
मुझे लगता था, उस को अब इस बात का भरोसा हो गया था की बीबी जी भी अब उस से ठुकवायगी, ज़रूर.. आज नहीं तो कल..
मैंने कहा – और बता, कुकी के क्या हाल चाल है… 
तो वो बोला – बीबी जी, कुकी तो अब पूरा लण्ड एक ही झटके में ले लेती है… उसे मेरा लण्ड, बड़ा पसंद है… अब तो वो भी अपनी चूत साफ रखती है… किसी को पता नहीं है, हमारी चुदाई का… हाँ, लेकिन बीबी जी एक बड़ी अजीब बात है, दीदी मुझसे चुदवाने से पहले मेरे लंड पर मूतती थीं और चुदवाने के बाद, अपनी चूत पर मुझसे मूतवाती थी… जब तक मैं मूत ना दूं वो मुझे जाने नहीं देती थीं…
ये सुन के, तब मुझे भी अजीब लगा क्यूंकी तब मैं नहीं जानती थी की मूत “एंटीसेप्टिक” होती है.
खैर, मैं बोली – चलो, सब ठीक है… आता होगा उन्हें मज़ा, इसी में… अब यह बता की चौथी खुशकिस्मत कौन है, जो इस फौलादी घोड़े का फौलादी लण्ड ले रही है… 
तो वो बोला की आप हैरान होंगी, बीबी जी के यह बड़ी भाभी ही हैं… वो भी बहूत ही अच्छी है… 
मैं शॉक में आ गई की एक मेरी बड़ी बहन, दूसरी मेरी बड़ी भाभी, यह क्या हो रहा है..
यह घोड़ा साला, मेरे घर में सब को खुले तबेले की घोड़ियों की तरह चोद रहा है क्या..
दूसरे मुझे ये लगा की भाभी तो भीमा को कभी भी नहीं मुँह नहीं लगाएँगी क्यूंकी वो तो उसे बहुत डांटा करती हैं और तो और, भीमा भी भाभी से बहुत डरता है.
सो मैंने कहा की भीमा एक बात बता… क्या खानदान की सब औरतें अपने सलवार खोल कर रखती हैं, तेरे लिए… अपनी टाँगें खोल कर, उठा कर, अपनी चूत चुद्वाने के लिए तैयार रहती है… पूरे घर में, तेरी ही चल रही है लगता है… अपना लंड फेंक के मेरा खानदान चोदता फिर रहा है रे तू, बहन चोद… चलो, ठीक है… अब ये बताओ, यह कैसे हुआ की भाभी तेरे जाल में फँसी… इस का मतलब है की शीला भाभी का ज्ञान, सही बैठा…
भीमा – हाँ, बीबी जी… 
मैं – अच्छा तो यह बता की निशा भाभी, कैसे फसाई तूने… ये तो मैं जानती हूँ कम से कम, उन्हें फसाना इतना आसान नहीं है… यह तो मैं जानती हूँ पर लगता तूने, कोई जादू किया होगा…
भीमा – यह कहानी भी तगड़ी है, बीबी जी… 
मैं – चल बता, कैसे… ??
तो वो बोला – भाभी जी ने गाय रखी है, घर में… हुआ ऐसे की गाय रांभने लगी थी तो भाभी जी ने मां को कहा की गाय रांभने लगी है और चुप नहीं हो रही है…
मां ने कहा की गाय के गयावान होने का वक्त है… उसको सांड को दिखाने की ज़रूरत है… मैं भीमा को भेजती हूँ… वो गाँव से सांड को ले आएगा, तेरे घर…
इस पर, भाभी बोली – ठीक है… मैं घर पर ही हूँ… 
दोपहर का टाइम था. 
मां ने मुझे कहा – गाँव में जो सांड है, उसे अपनी भाभी के घर ले जाओ…
मेरी किस्मत से, उस दिन भाभी जी घर पर अकेली थीं. 
भाई साहब तो तीन दिन के लिए, बाहर गये हुए थे. 
मैं सांड को ले कर, भाभी के घर चला गया.


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

सांड, काले रंग का बहुत बड़ा और मोटा ताज़ा था. 
पूरे गाँव वाले, उसे खिलाते पिलाते थे और बो बहुत तगड़ा हो गया था.
असल में, एक ही सांड़ था जिससे गाय एक ही बार में गयावान हो जाती थी.
उस सांड़ का लण्ड, कई बार देखा था मैंने, बहुत बड़ा और मोटा था.. 
मैंने सोचा की गाय कैसे ले पाएगी, इतना बड़ा अंदर.. 
जैसे ही, मैं सांड को ले कर भाभी के घर पहुँचा तो मैंने भाभी जी को आवाज़ दी की सांड आ गया है.
तभी भाभी दौड़ कर आ गई और कहा की इसे घर के पीछे ले चल… गाय, वहीं पर बँधी है… 
मैं जैसे ही सांड को ले कर घर के पीछे गया तो सांड बिदक कर, सीधा गाय के पास चला गया. 
बेचारी गाय, शायद इतने बड़े सांड को देख कर डर गई. 
भाभी बोली – कहीं, ये सांड मारे ना हमे… 
मैंने कहा की नहीं ऐसा नहीं है, यह बहुत शरीफ सांड़ है…
इतने में सांड ने गाय की चूत तीन चार बार चाटी और बिना इधर उधर देखे, गाय पर चढ़ गया और अपना दो फुट लंबा लण्ड, उस की चूत में धड़क से पेल दिया.
इतने ज़ोर का धक्का मारा की गाय के छक्के छूट गये.
बड़ी बुरी तरह से रंभाई थी, गाय तब..
भाभी देख के बोली – अरे, बाप रे… इतना बड़ा… लंबा और मोटा… ये सांड तो गाय को मार ही ना दे… अंदर कितनी जोरे से घुसेड दिया है… मर जाएगी यह… 
सांड इतना गर्मी में था के दो पल में ही, तीन बार अपना मूसल निकाल निकाल के अंदर घुसेड दिया. 
भाभी, बड़े मज़े से देख रही थी, गाय की चुदाई और हंस रही थी.
फिर वो बोली – साले सांड के मज़े हैं, आज़ तो… नयी नवेली गाय है ना इसलिए सांड का अंदर घुसते ही, मचला जा रहा है… 
इधर, मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया था.
मैं बैठा हुया था की सांड एक साइड को चलने लगा. 
तो भाभी बोली – पकड़ इसे और गाय के पास ला… 
जैसे मैं उठा की मेरी निक्कर में मेरा लण्ड तना हुआ था, सांड की चुदाई देख कर. 
जैसे ही, मैंने सांड को गाय के नज़दीक किया की वो फिर से गाय पर चढ़ गया और पूरा घुसेड दिया. 
भाभी ने जब यह सब देखा तो बोली – बहुत बड़ा सांड है और इस का लण्ड भी बहुत बड़ा है… मैंने ऐसा बड़ा लण्ड, नहीं देखा… 
मैने कहा – लगता है की भाभी मूड में आ रही थी… 
भीमा – हाँ, कुछ भी बोले जा रहीं थी… 
मेरे से नज़र बचा कर उन्होने, दो तीन बार अपनी सलवार के अंदर हाथ डाल कर चूत पर फेरा, जो की मैंने देख लिया था. 
लगता था की भाभी की चूत गीली हो रही थी, सांड का लण्ड देख कर.
अचानक भाभी की नज़र, मेरी तरफ गई और उस ने देखा की मैं बड़े मज़े से सांड का लण्ड, अंदर घुसते देख रहा हूँ. 
सांड ने नई नवेली गाय की चूत चोद चोद कर, चौड़ी कर दी थी. 
अब सांड थोड़ा पीछे मुड़ा तो भाभी ने कहा – भीमा, पकड़ इसे…
जैसे में उठा, भाभी की नज़र मेरी निक्कर पर पड़ी तो वो हैरान रह गई. 
वो फट से बोली – क्या हुआ… बाँध दे इसे… 
मैंने कहा – भाभी जी, इसे मज़ा करने दो… तभी गाय गयावान होगी… 
भाभी ने कहा – सांड़ को छोड़, तू इधर आ ज़रा… 
उन्होने मुझे अंदर बुलाया और सीधे मेरी निक्कर पर हाथ रख दिया. 
वो बोली – बड़ा मतवाला हो गया है रे तू, गाय की चुदाई देखते हुए… ज़रा हम भी तो देखे, इस सांड का कैसा है…
मैंने बोला – भाभी जी, शर्म आती है मुझे… 
भाभी बोली – अच्छा, शर्म के चचे… गाय के अंदर सांड का लण्ड जाता हुआ तो खूब मज़े से देख रहा है… अब क्या तकलीफ़ है, मुझे दिखाने में…
जैसे ही, मैंने अपना लण्ड निक्कर से बाहर निकाला तो भाभी की सांस ही रुक गई. 
मेरे लंड को घूरते हुए वो बोली – बाप रे, एक सांड बाहर और दूसरा सांड अंदर… तेरा तो बहुत बड़ा और मोटा है… कहाँ छुपा रखा था इसे, तू ने… अब समझ आया इसी लिए बोल रहा था की भाभी, सांड आ गया है… भीमा, बाहर वाले सांड ने गाय की चोद चोद कर चौड़ी कर दी… अब तू इस गाय की चौड़ी कर… देख, बाहर सांड अपना काम कर रहा है और अब यह सांड, अपनी इस गाय को ठोकेगा… 
भाभी बहुत गर्म हो गई थी, सांड की चुदाई से और फिर मेरे लण्ड को देख कर.


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

बिना देर किए, फट से भाभी ने मेरा लण्ड पकड़ा और उस का साइज़ देखने लगी और बोली – मेरा तजुर्बा कहता है, कम से कम “9 – 10 इंच” लंबा होगा… 
उन्होने बिना टाइम देखे, फटा फट अपनी सलवार खोल दी और लगी, मेरा लण्ड सहलाने.
उस की चूत गीली तो पहले से ही थी कहने लगी की तेल लगा लेती हूँ… बहुत बड़ा है, तेरा… 
उस ने अपनी चूत पर तेल लगाया और फिर, मेरे लण्ड पर लगाया.
फिर, भाभी बोली – देख मत… आ जा मेरे सांड, आ जा… चढ़ जा, मेरे ऊपर, काले सांड के जैसे और एक ही झटके में अंदर कर दे, अपना मोटा लण्ड… जन्नत दिखा दे, अपनी भाभी को… 
एक ही पल में, भाभी ने पूरा कपड़े उतार दिए और एक दम नंगी खड़ी हो गई सामने. 
पूरी नंगी औरत देख कर, मुझ से कंट्रोल नहीं होता.
उफ्फ !! क्या सुंदर लग रही थी वो.
बीबी जी, सबसे मस्त चुचे उनके थे.
बिल्कुल गोरे और एकदम गोल.
सबकी निप्पल भूरी थी पर उनकी एकदम “गुलाबी” और बिल्कुल छोटी सी. 
मेरी तो नज़र ह नहीं हट रही थी, उनके चुचे से.
मैंने कहा – भाभी जी, आप तो बहुत ही सुंदर हैं… मेरा लण्ड तो और भी अकड़ गया था… 
मुझे तो लगता था, भाभी जी बड़ी शर्मीली और कठोर थीं लेकिन अब सब शर्म भाग गई थी और टाँगें चौड़ी कर नंगी हो कर मेरे नीचे पड़ी थीं. 
मैंने सोचा की ऐसी सुंदर औरत, वो भी भाभी मुझ जैसे को कहाँ मिलेगी. 
वैसे तो मुझे कई बार गाली देती थी और कभी कभी तो मारती भी थी. 
सो मैंने सोचा – भाभी, आज सब एक कर दूँगा और मैं और चढ़ गया. 
ऊपर, टाँगें कर कंधे पे रखी और लण्ड को चूत पर लगाया और जोरे का धक्का मारा और पूरे का पूरा अंदर घुसेड दिया, भाभी की साफ, चिकनी और फूली हुई चूत में. 
बीबी जी, उनकी तो चूत भी “गुलाबी” थी.
भाभी, बहुत ज़ोर से चिल्लाई पर मैंने हाथ रख दिया उस के मुँह पर.
अब तक तो मेरे पास भी तजुर्बा हो गया था. 
मैंने भाभी की चूत से रगड़ते हुए, लण्ड बाहर निकाला और एक ज़ोर का धक्का और दे मारा और पूरा लण्ड अंदर घुस गया. 
भाभी – अरे, फाड़ दी मेरी चूत तूने… तेरा तो घोड़े से भी बड़ा है… तेरे लिए औरत नहीं, घोड़ी चाहिए… 
लेकिन बीबी जी, कुकी की चूत से खून निकला क्यूंकी वो 5 साल से चुदि नहीं थी पर भाभी की चूत से भी खून रिस रहा था, हल्का हल्का सा..
मैं – भैया को ज़्यादा चोदने नहीं देती होगी… और तेरा है भी तो इतना बड़ा… वो सब छोड़… तू आगे बता…
मैं भी गरम था. 
मैंने कहा – भाभी जी, आज तो आप ही मेरी गधी हैं और मैं गधा और मैंने दे मारा, लण्ड पूरा का पूरा अंदर… 
फिर क्या था, दिल भर के चोदा भाभी को.. 
कई दिनों से भाभी की गाण्ड देख कर, मेरा दिल खराब हो जाता था.
अब तो बस, भाभी नीचे और मैं ऊपर कोई 15 मिनट तक उछल उछल कर चुदाई हुई. 
भाभी, जल्द ही बड़ी खुल गई थी. 
बोली – रात को आ जाओ… भैया दो दिनों के बाद आएँगें… 
फिर तो बीबी जी, भाभी की चूत का भोसड़ा बना दिया, उस रात मैंने.. 
भाभी गरम दूध पिलाती और कहती – चढ़ जा, मेरे सांड… 
उस रात, मैंने भाभी को “चार” बार चोदा.
वो तो उसके बाद, मेरा लंड ही नहीं खड़ा हुआ नहीं तो भाभी मुझे तब भी ना छोड़ती.
सुबह, भाभी बोली – भीमा, मैंने आज तक ऐसा लण्ड नहीं देखा था… तूने मेरी चूत चौड़ी कर दी… चोद चोद कर, भोसड़ा बना दिया इसका… बड़ा मज़ा दिया रे, तेरे लण्ड ने… 
फिर भाभी बोली – बस, अब जब में बोलूं तब आना और किसी को कानों कान खबर ना हो के हम ने चुदाई की… 
मैं बोला – भाभी जी, मुझे भी मज़ा आ गया… कहो तो आज़ रात को भी आ जाऊं…
भाभी बोली – नहीं रे… तेरे भाई आते ही, मुझे चोद डालेगें… ज़्यादा फट गई को पता चल जायगा… बोलेगा, इतनी चौड़ी कैसे हो गई… 
बस बीबी जी, अब जब भाभी बुलाती हैं, जाता हूँ. 
सच तो ये है, बड़ी मस्ती से चुदाई करवाती हैं भाभी जी.. तीनों में सब से ज़्यादा, मस्त तरीके से..
जब भी जाता हूँ, कहती हैं – आ मेरे सांड… चढ़ जा, मेरे ऊपर… और हंसने लगती हैं. 
कहतीं है की खूब खाया कर, तब ही तो सांड की तरह ऊपर चढ़ पाएगा…
अब जब कभी भाई बाहर जातें हैं तो भाभी, मां को कह देती हैं की भीमा को भेज देना… 
खूब मज़े से चुदाई करवाती हैं, बीबी जी.
मुझे भी सबसे ज़्यादा, उन्हें ही चोदने में मज़ा आता है.
उनके “गुलाबी निप्पल और गुलाबी चूत” तो मैं कितनी भी देखु, मेरा जी ही नहीं भरता..
हाँ, लेकिन बीबी जी, भाभी ने भी मेरा वीर्य अब तक अंदर नहीं लिया. 
वो कहती हैं – तेरा अंदर लिया तो सांड ही पैदा होगा…
सो, उस दिन से मैं गाय और सांड का शुक्र गुज़ार हूँ की भाभी जैसी औरत मिली, चोदने को जो की नसीब वालों को ही मिल सकती, चोदने को.
मेरे को कहाँ रखी थी, ऐसी औरत.. आप ही बताओ..
मैं यह समझ नहीं पाई की यह सब कैसे हुआ पर इतना ज़रूर था की उस ने अपने लण्ड के ज़ोर पर, सब की चुदाई कर डाली थी. 
मैं देख रही हूँ की आगे चल कर, यह पूरा गाँव का सांड बन जायगा, इस तरीके से. 
जिस किसी चूत को, अपनी आग बुझानी हो तो भीमा जो है. 
भीमा, चालू तो एक नंबर था.. सिर्फ़ देखने में ही, “सीधा” लगता था वो.. 
और अब तो वो चुदाई और औरत की आग मिटाने का “मास्टर” बन गया था. 
मैंने कहा – चलो, भीमा अच्छा है… तू खुश है ना… तेरे को तो इतनी सुन्दर और खूबसूरत औरतो की चूत मिल रही है…
तो वो बोला – बीबी जी, चारों ही बड़ी सुन्दर हैं और चूतड़ भी अच्छे मोटे हैं इन सब के… पूरा पूरा मज़ा करती हैं… इन चारों को ही एक दूसरे का पता नहीं है, अब तक… सब को बारी बारी से चोदता हूँ… एक ही घर की हैं, सो घर की बात घर में ही रहेगी… शीला भाभी ने ठीक ही कहा था यह “जन्नत की हूर” हैं… मज़ा करेगा तू, अगर यह चोदने को मिल गयीं तो… 
यहाँ, अब मेरी हालत खराब थी. 
मैं भी देखना चाहती थी एक बार हाथ में और चूत में लेकर की कैसा है इस का लण्ड, जो इन अप्सराओं की चुदाई कर रहा है. 


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

मेरी बहन और भाभी तो अपने उपर, मखी भी नहीं बैठने देती थी. 
फिर एक नौकर के नीचे, चौड़ी हो उस का मोटा, लम्बा लण्ड गुपा गुप खा रही हैं. 
एक बार देखूं, जो मेरी बहन और भाभियों को पसंद आया है. 
सो मैंने भीमा को 1000 रुपए देते हुए बोला – चल अब, तू घर जा… लेकिन पहले अपना लण्ड मुझे भी दिखाओ… मै भी तो देखूं जो मेरी बहन और भाभी को बड़ा पसंद है… 
उस का लण्ड एक दम से खड़ा था, अब. 
मेरे कहने पर उस ने फ़ौरन, लण्ड बाहर निकल दिया ओर वो यही तो चाहता था.. 
हे मां !! यह क्या है… घोड़े जैसा, काले नाग जैसा… कोई 10 इंच लंबा और 3 इंच मोटा…
मैंने कहा – भीमा… क्या, है क्या ये… ख़ाता क्या है रे, तू… तूने तो मेरी बहन और भाभी की चूत चौड़ी कर दी होगी, अब तक… तभी तो मैं देख रही थी की उन की गाण्ड भी बहुत चौड़ी हो रही है, आज कल… और तेरे पर भी बड़ी मेहरबान हैं, यह तीनों आज कल…
उस का लण्ड देखते ही, मेरे तो होश उड़ गये थे. 
मैं समझ गई की ऐसी कौन औरत नहीं होगी जो इस का लण्ड, अपनी चूत में नहीं लेना चाहेगी. 
मैंने ना चाहते हुए भी, उस के लण्ड को हाथ में पकड़ा और आगे पीछे करने लगी. 
बिना किसी होश के, ज़ोर ज़ोर से मूठ मार रही थी मैं उस की.
मैंने देखा की और कड़क होता जा रहा था.
भीमा एक दम से बोला – बीबी जी… बड़ा मज़ा आ रहा है, आप के हाथ से मूठ मरवाने में… आप को कैसा लग रहा है… 
मैं – बहुत अच्छा, रे…
मैंने देखा की उस के लण्ड का सुपाड़ा, कोई दो इंच लंबा है और आगे से “कटा” हुआ है. 
तो मैंने पूछा – यह कटा हुआ, क्यूँ है…
वो बोला – बीबी जी, पहले से ही है जब मैं श्रीनगर में था…
मैं – तो तुम “पठान” हो…
हाँ बीबी जी, सिर्फ़ आप ही पहचान पाईं हैं, इस बात को… – वो थोड़ा झेप का बोला..
अप बताना मत किसी को भी… नहीं तो शायद, सब बुरा ना मान जाएँ… 
इस दौरान, में उस के लण्ड को आगे पीछे करती रही..
मुझे तो शुरू से मोटे लंबे लण्ड को हिलाने और मूठ मारने में, बड़ा मज़ा आता है. 
यहाँ, लगातार मेरी चूत पानी छोड़ रही थी, लेकिन टाइम कम था इसलिए कुछ करने का सही वक्त नहीं था, उस दिन.
इतने बड़े लण्ड को तो बड़े प्यार से लेना चाहिए और खुल के मज़े करने चाहिए. 
वैसे भी मुझे लम्बा, साफ सुथरा सुपाड़ा बहुत अच्छा लगता है, चूसने में.
मैंने भीमा को बोला – तेरा लण्ड अब तक खड़ा हुआ है, क्या बात है… 
वो बोला – बीबी जी, इतनी जल्दी ठंडा होने वाला नहीं है यह…
तो मैंने पूछा – क्यों… ?. 
वो बोला – आप जो हैं, सामने… फिर, कैसे बैठ जाएगा… आपको, सलामी दे रहा है…
मैं, ज़ोर से हंस पड़ी. 
अच्छा, यह बात है तो तेरी पूरी परेड ही करानी पड़ेगी, लगता है… 
वो बोला – करा दो, बीबी जी… वैसे आप जब काम कर रही रही थी तो मुझे आप की गाण्ड के थोड़े से दर्शन हो गये… देख ली थी मैंने आपकी, जब आप झुकी हुई थीं… 
(मेरे कपड़े, जो भीमा के आने से पहले ही मैंने जान मुझ कर पतले से पहने हुए थे.. जिस से, भीमा को सब नज़र आता रहे..) 
भीमा बोला – इतनी गोरी गाण्ड को देख कर तो मुर्दे का भी खड़ा हो जायगा और वो फिर से जीना शुरू कर दे… मेरी तो बात ही अलग है…
मैंने कहा – तो मेरे देसी घोड़े, अब इसे अंदर कर ले और ठंडा कर ले…
भीमा बोला – बीबी जी, ठंडा तो यह रात को कुकी की चूत में ही होगा… वैसे, बीबी जी आप को कैसा लगा मेरा लण्ड… 
मैंने कहा की ऐसा लण्ड, किसी किसी के पास ही होता है और जिस किसी के पास होता है वो कई चूत का मालिक होता है… तू तो यह बता की मैं तुझे कैसी लगती हूँ… 
शरमाते हुए, वो बोला – सच बोलूं, बीबी जी… जब आप चलती हैं ना तो एक मस्त हिरनी लगती हैं… मैं सोचता हूँ की इस हिरनी का, हिरण बन जाऊं और पीछे से आपकी चूत चाट चाट कर एक ही धक्के में पूरा लण्ड अंदर घुसेड दूँ… छुट्टी आती है ना तो मेरा लण्ड तो आप को देख कर, हुंकार भरता रहता है… मैं ही जानता हूँ की इसे कैसे, लगाम दे कर रख ता हूँ…
मैं हंसते हुए बोली – तो फिर, तेरा क्या इरादा है मेरे बारे में… चोदना चाहता है, मेरी चूत…
भीमा – आप को, कौन नहीं चोदना चाहेगा… आदमी तो क्या, घोड़ा तो क्या, गधा भी, अपना लण्ड पलेने को हुंकार भर देगा… आप की गाण्ड, है ही ऐसी… वैसे आप बहुत शांत हैं… कोई दूसरी होती तो अब तक, चार बार मेरा लण्ड ले चुकी होती… इतनी गरम बातें सुन कर भी, आप की चूत नहीं भड़की… 
मैं – चल, अब मक्खन मत मार… देख, आज तो यह सब होगा नहीं… फिर, सही टाइम पर बता दूँगी… 
भीमा – बीबी जी, मैं किस्मत वाला हूँ, जो आप के चूत में अपना इतना बड़ा और मोटा लण्ड पेलुँगा और आप को भी मेरा यह हथियार बहूत अच्छा लगेगा… 
मैं – अरे, अच्छा तो है ही… बस, अब अंदर लेना है किसी दिन… 
मैंने, ना बोला, ना जाहिर होने दिया उस को की मेरी चूत का शोला भी भड़क़ उठा है और हालत खराब हो चुकी है, इन सब की चुदाई की कहानी सुनते हुए.
असल में तो, चिप चिप कर रही है मेरी चूत अंदर से.
एक बात थी की मां ने सब के घर, अलग अलग बनवा दिए थे और सब अपने अपने में ही रहते थे. 
नहीं तो मुश्किल होती, यह सब कुछ कांड करने की. 
फिर, मैंने कहा – भीमा, अच्छा मैं सोचती हूँ… 
अब तेरा लण्ड मुझे सोने तो नहीं देगा… – यह बात, मैंने दिल में ही रख ली.
मैं सोचती रही की लूँ, इस का मूसल लण्ड अपनी नाज़ुक चूत में की नहीं.. क्या करूँ..
मुझे, मेरे हब्बी का भी ख़याल था, इस लिए इस पेशोपश में काफ़ी समय रही लेकिन उस का लण्ड, रात दिन आँखो के सामने आ रहा था. 
दूसरे दिन संयोग से, फिर मुलाकात हो गई, भीमा से खेतों में. 
देखा की उस की नज़र रह रह कर, मेरी गाण्ड पर ही जा रही थी. 
एक बार तो मेरी बड़ी दीदी ने कुछ भाँप सा भी लिया के भीमा, कुत्ता छोटी को भी पेलने के चक्कर में है क्या. 
वो भी सोचती होगी की यह नहीं ले पाएगी, इस के मूसल जैसे लण्ड को.


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

खैर, दो तीन दिन निकल गये और धीरे धीरे, मैं बड़ी बेचन हो गई. 
फिर आख़िर, मैंने भीमा को बोला – सुन, आज तू मेरे घर आएगा… मेरे पास… किसी को भी पता नहीं चलेगा क्योंकि बारिश ज़ोर से पड़ रही है… 
मेरे कमरे में, रात को कोई नहीं आता है. 
मेरा घर, मां के घर से थोड़ी दूर था.
मैंने भीमा को कहा की तकरीबन 8 बजे तक आ जाना… तब तक बाजू वाले सब सोने चले जाते हैं और सबके गेट बंद हो जाते हैं… गाँव का यही फायदा है… 
ठीक है, बीबी जी… – वो बोला.. 
और सुन, नहा धो कर आना… ऐसे ही नहीं, जैसे सांड सिर उठा कर आता है… – मैंने, उससे बोला..
रात को आठ बजे, भीमा सांड की तरह सिर उठा के आ गया.
मैंने गेट खुला ही रखा था, सो वो सीधा अंदर आ गया.
मैंने कहा की किसी ने, देखा तो नहीं… 
वो बोला – नहीं, बीबी जी…
उस के अंदर आते ही, थोड़ी देर में ज़ोर की बारिश शुरू हो गई. 
मैं बहुत खुश हो गई की चलो, अच्छा मौसम बन गया है..
भीमा, बैठ गया.
वो, बहुत खुश था. 
जैसे की बहुत बड़ा “खजाना” मिलने वाला हो.
मैंने अब तक दूध गरम कर दिया था, उस में थोड़ा शहद भी मिला डाला था की ज़रा गरम रहे. 
दूध उसे दिया और दूसरे रूम में ले गई, जहाँ बेड नीचे लगा दिया था, मैंने.. अपनी, “घमासान चुदाई” के लिए..
भीमा बोला – बीबी जी, आप दोनों बहने एक जैसी ही हैं… दोनों, जीजा जी के मज़े हैं… आप जैसी सुन्दर औरतें मिली हैं, उन को देखभाल और चोदने के लिए…
मैंने कहा की चल, चल… अब बस कर… दूध पी ले, गरम है और हो जा तैयार अपने हथियार को ले कर… आज, देखती हूँ की यह घोड़ा कितने स्पीड से दौड़ता है… इस घोड़ी को कितने मज़े देता है… और खचर, कैसे वनता है…
मैंने अपनी चूत, एक दम से साफ़ कर रखी थी. 
एक एक बाल को, बड़ी बारीकी से सॉफ किया था.
“गुलाब जल” और “नींबू” से अपनी गांड और दूध घिस घिस के सॉफ किए थे.
भीमा, पता है की खचर किसे कहते हैं… – मैंने पूछा.. 
वो बोला – नहीं, बीबी जी… 
मैंने कहा – जिस घोड़ी को गधा, चोदे उसे खचर कहते हैं… तूने कभी गधे को घोड़ी को चोदते हुए देखा है, क्या… 
वो बोला – जब छोटा था तो देखा था, गाँव में… 
क्या देखा था… ठीक से बता – मैंने फिर पूछा.. 
भीमा बोला की हमारे चाचा, अपनी नयी घोड़ी को घोड़े से लगवाने आए थे पर गाँव में उस दिन, घोड़ा नहीं मिला और उन को कहा की गधे से ही ठुकवा लो… चाचा बोला – ठीक है तो… हम सब देख रहे थे… गधे को लाया गया… गधा पहले तो घोड़ी से खेलता रहा कभी ऊपर चढ़ता तो कभी उस की चूत चाटता, घोड़ी आराम से थी की अचानक, गधा ने अपना 2 फुट लंबा लण्ड घोड़ी पर रगड़ा और धीरे से घोड़ी पर चढ़ गया और अपने 2 फुट भर मोटे लण्ड को उस की चूत में घुसेड़ने लगा… घोड़ी अचानक लण्ड घुसते पा कर, बिदकने लगी… पर तब तक गधे ने पूरा ज़ोर का धक्का मारा और पूरा का पूरा, अंदर कर दिया… घोड़ी की जीभ, बाहर आ गई… वहाँ पर लोग तालियाँ बजाने लगे… गधे ने कई बार धक्के मारे अपने मोटे लण्ड के उस की चूत में और आधा किलो माल, उस की चूत में डाल दिया था… बड़ा मोटा और लंबा लण्ड था, उस गधे का… उसे गधी, घोड़ियों की चुदाई के लिए ही रखा था, उस गाँव मे… 
फिर तू समझ ले की मैं घोड़ी, तू गधा आज के लिए…
फिर हो गई, बातें शुरू..
मैंने बोला के मेरी बहन की चूत, कैसे लगी तुम को…
वो बोला – बीबी जी, एक दम साफ रखती हैं और मुझे तो अब चाटने में भी मज़ा आता है… उन की चूत, एक पाव जैसी फूल जाती है, जब वो ज़्यादा जोश में आती हैं… 
कुछ बोली तो नहीं, मेरे बारे में… – मैने पूछा..
वो बोला – कल कह रही थी की तेरी नज़र, छोटी पर है… ज़रा संभाल के… वो, नहीं ले पाएगी, तेरा गधे जैसा यह लण्ड… वैसे भी, बड़ी नाज़ुक है, वो… अगर, ऐसा कुछ हुआ भी और तेरे से चुदवाने को उस का मन हुआ तो खूब तेल या क्रीम लगा लेना, अपने लण्ड पर और उस की चूत में भी… नहीं तो फट जाएगी, उस की… और अगर ठीक से सहन कर गई तो एक दम सांड की तरह, चढ़ जाना और जितना ज़ोर है लगा देना उसे ठोकने में… क्या याद करेगी की देसी घोड़ा, कैसा पेलता है… डरने का नहीं, बस फुल स्पीड से चोदना उसे… सो उस का जी भर जाए… मिटा देना, उसकी चूत की भूख… आख़िर है तो मेरी बहन… उसे भी जिंदगी के मज़े लेने का पूरा हक है… 
मैने सोचा – अच्छा तो दीदी को पता है की छोटी, भीमा से मरवाएगी ज़रूर…
फिर और बातें होती रही, गाँव की और भाभी की.. बो बहुत गरम हो गया था..
रहा तो अब, मुझसे भी नहीं जा रहा था.
बातों से ही, मेरी चूत दो बार छोड़ चुकी थी.
अब मैने, सब्र छोड़ा और कहा की नंगे हो जाओ… 
बेशर्म की तरह, भीमा फट से नंगा हो गया. 
सीधा लण्ड तना हुआ था, उसका. 
मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी खुद ही, नंगी हो गई. 
अब शरमाना कैसा.. 
इतनी जल्दी, शायद उस दिन से पहले मैं कभी नंगी हुई थी.
कितना सुकून मिल रहा था मुझे उसकी नज़रें, अपने नंगे बदन पर देख कर मैं बता नहीं सकती.
और मेरी चूत देखते ही, उस के मुंह से “आह” निकल गई.. 
वो बोला – बीबी जी, आप तो परी लग रही हैं… मैंने इतनी “सुन्दर औरत” नहीं देखी, आज तक… 
फिर भीमा, मेरे पास आया और पीछे से मेरे बूब्स पकड़ कर बदहवासी में दबाने लगा और गर्दन पर अपने होंठ (लिप्स) रख कर चूमने लगा. 
उस का लण्ड, मेरी गाण्ड की दरारों में घुसे जा रहा था और वो भी रगड़ने लगा था. 
शायद, इतने दिन में मैने उसे बहुत बैचेन कर दिया था.
उसकी हालत देख कर, मैंने कहा – चलो, अब बिस्तर पर चलते हैं… 
वो तुरंत बोला – ठीक है… 
अंदर पहुँचते ही, वो सीधा मेरे ऊपर आ कर, मेरी चूत चाटने लग पड़ा..
अब मैंने भी उस का लण्ड चूसना शुरू कर दिया था. 
वो बोला – ओह, बीबी जी… बड़ा मज़ा आ रहा है… 
10 मिनट, मेरी चूत चूसने के बाद, वो मेरी चूत पर क्रीम लगाने लगा.. जो की मैंने पास ही रखी थी.. 
मैंने भी उस के लण्ड पर लगाई और उस ने, मेरी चूत पर.. 


फिर, मैंने कहा – भीमा, नीचे आ जाओ… मुझे करने दो… 
वो भी बोला – ठीक है, बीबी जी… 
मैं उस के ऊपर आ गई और धीरे धीरे, उस का मोटा लण्ड अंदर डालने लगी. 
आधा ही गया होगा की मेरी तो चूत फटने को हो गई. 
मैंने कहा – ना बाबा ना, यह पूरा अंदर नहीं जा सकता… 
भीमा बोला – बीबी जी, धीरे धीरे डालती रहो… जैसे बड़ी दीदी करती हैं…
एक बार, पूरा अंदर चला गया फिर मज़ा आना शुरू हो जायगा.
15 मिनिट तक, धीरे धीरे पूरा अंदर चला गया.. इनका यानी मेरे हब्बी का भी तो 8” का है पर इतना मोटा नहीं है.. 
फिर क्या था, भीमा शुरू हो गया, नीचे से ही.. 
पठान का लण्ड था, ना.. 
क्रीम लगा लगा कर दे फ़चा फ़चा, कोई 10 मिनट तक खूब पेलता रहा.
फिर बोला – बीबी जी, निकलने वाला है मेरा… 
मेरा तो दो बार बातें करने में और एक बार चूत चूसने में और 2 बार मरवाने में निकल चुका था.
मैं बोली – मेरे पेट पर छोड़ दे… 
क्या कहूँ, कोई 50 ग्राम था उस का माल.. 
मैंने सोचा की अगर, अंदर छोड़ देता तो गर्भ पक्का रह जाता. 
इस लिए तो दीदी नहीं लेती, इस का बीज़ अपने अंदर.
उस रात, भीमा ने मुझे दो बार ऊपर चढ़ कर चोदा पूरा दिल लगा के.. 
मेरा पूरा बदन निचोड़ दिया था, उस ने, जानवरों की तरह एक बार जो घुसेड़ता तो पानी निकलने के वक्त ही, लण्ड को बाहर निकालता था चूत से. 
कसम से, आग पैदा कर देता था चूत में लण्ड को घिस घिस कर. 
सच कहूँ तो मुझे भी बहुत ज़्यादा ही मज़ा आया था, इस “अनोखी चुदाई” में.

मुझे देखते ही, वो घोड़े की तरह हीनहिनाने लगता था.
किसी को भी भनक तक नहीं हुई, भीमा के आने की, क्यूंकि पूरी रात बारिश होती रही.. 
बाहर बारिश, अंदर चूत की मस्त चुदाई. 
सच कहूँ तो उस का लण्ड, बड़ा “फौलादी लण्ड” है.
दिल करता है की अंदर ही डाले रखे. 


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

एक दिन, भीमा ने कहा की बीबी जी, मुझे आप की गाण्ड बहुत अच्छी लगती है… एक बार, मारना चाहता हूँ… 
तो मैंने कहा की बिल्कुल नहीं… मुझे भरी जवानी में नहीं मरना…
फिर मैने पूछा – कहाँ से आदत पड़ गई, यह… 
भीमा बोला – दोनों भाभी की एक एक बार उन की गाण्ड में डाला हूँ… पर अब नहीं देतीं कहती हैं की बहुत दर्द होता है… तेरा लण्ड, गाण्ड मरवाने लायक नहीं है… यह तो गधे के लंड जैसा है, कोई गधी देख…
मैंने कहा की सही तो कहती हैं… दर्द तो होगा ही, तेरा लोडा इतना मोटा है की गाण्ड फट जाएगी… 
फिर, मेरे वापस आने से तीन दिन पहले भीमा बोला – बीबी जी, आज आ जाऊं…
मेरा भी दिल करने लगा था सो मैंने कहा की ठीक है… रात को आ जा और फिर उस रात, दो बार चोदा उस ने मुझे… 
गाण्ड मारने को बहुत ज़ोर मारा पर मैंने बोला – इतना बड़ा लण्ड, मेरी गाण्ड में नहीं जायगा… 
उस रात भीमा, मेरे ऊपर चढ़ गया और पूरी ताक़त से चोदने लगा था. इतना जोश तो शायद, एक सांड में ही होता है. 
दो बार चोदने के बाद, मैंने कहा की अब बस… अब और नहीं… बहुत चौड़ी कर दी है, तूने मेरी चूत… फूल गई है… 
वो बोला – कोई बात नहीं… अब पता नहीं, कब मिलेगी मारने को… पर बीबी जी दोबारा आएँगी तो ज़रूर में आप की गाण्ड मारूँगा… 
मैं बोली – ठीक है, तब तक मैं अपने पति से थोड़ी चौड़ी करवा लूँगी… पर मेरी चूत जो तुमने चौड़ी कर दी है… तीन दिन खूब मालिश करनी पड़ेगी “घी” से… नहीं तो मेरे पति, डालते ही समझ जाएँगें की खूब गुल खिलाए हैं मैने मायके में… वैसे भीमा, तूने हम दोनों बहन और भाभी को गुलाम बना दिया अपने फौलादी लौड़े का…
वो बोला – बीबी जी, आप जैसी कोई नहीं… आप की चूत तो बिल्कुल स्प्रिंग जैसी है… मुझे बुला लेना, मालिश करने के लिए…
मैं बोली – चल बंद कर, अब यह सब बातें… 
बस उस के बाद, मैं आ गई बॉम्बे लेकिन भीमा बहुत याद आता रहता है… 
मैं उससे टेलिफोन पर बात करती रहती थी मां के बहाने से, की क्या हो रहा है, आज कल… कैसे हैं, सब… 
एक बार उसने बताया की उसने मेरी बहन को बता दिया था की मैंने आप को बहुत चोदा और वो भी ऊपर चढ़ कर. बहुत हँसी थी, वो. 
उन्होंने कहा की इस घोड़े ने सब के चूत चौड़ी कर दी और कहा की ठीक किया तूने, उसे भी हक है जिंदगी के मज़े लेने का.. तेरे से तो बुढ़िया भी चुदवा मारे… तेरा लंड देख कर, कोई क्या कर सकता है… 
भीमा बोला – बीबी जी, बड़ी बहन अब बहुत खुल गयीं हैं… अब तो लण्ड भी चूसती हैं और ऊपर चढ़ कर चोदने को भी कहती हैं… आपकी कैसे कैसे चुदाई की, ये भी पूछती हैं… कहती हैं की भीमा पूरा जोरे से चोदो और एक ही धक्के मैं डाल दो, अपना डंडा… थोड़ी सी और मोटी हो गयीं हैं… आपकी तरह, रोज़ घी से और कभी कभी मेरे मूठ से अपनी चूत की मालिश करवाती हैं… 
फिर एक दिन, भीमा ने बताया की एक दिन की बात है की बड़ी दीदी ने मुझे रात को बुलाया… जीजा जी दौरे पर गये थे, 10 दिनों के लिए… अगले 5 दिन खेत से छुट्टी थी… दीदी को और मां को बोला था, दीदी ने की भीमा को भेज देना… मैं अकेली हूँ… बाहर के कमरे में सो जायेगा…
मैं तीन रातें रहा, दीदी के पास. 
दिन में, घर पर ही काम करता था. 
यह तीन रातें, खास थीं.
दीदी ने खूब सेवा की मेरी, गरम गरम दूध पिलाती और पता नहीं क्या डालती थी, उस दूध में की मेरा लण्ड खंबे की तरह खड़ा ही रहता था और दीदी बोलती – आ मेरे सांड चढ़ जा अब, मेरे ऊपर और चोद मुझे दिल भर के… 
बीबी जी इन तीन रातें, मैंने दीदी को “चार चार” बार, पूरा ज़ोर लगा कर चोदा और हैरानी थी की दीदी पूरा दिल लगा कर चौड़ी हो कर चुदाई करवाती थी और मेरा पूरा मूठ, दीदी चौड़ी हो कर अपनी चूत के अंदर लेती रही. 
“फ़चा फ़चा”, होती पूरे कमरे में.. 
चुदाई की आवाज़, आती थी.
जब मेरा निकलता था तो कहती की लण्ड, पूरा अंदर डाल के पिचकारी मार दे और भर दे मेरी चूत को… मेरे घोड़े, भर दे इस घोड़ी की चूत, अपने इस घने माल से… और भींचे रखती थी, अपने ऊपर कोई 5 मिनट तक.
मैं समझ गई की अब दीदी ने इस घोड़े का “बीज़”, अपनी चूत में ले लिया है और वो इस का ही पिल्ला पैदा करेगी. 
लेकिन मैं तो इस सोच में थी की आख़िर, उन्होने दूध में मिलाया क्या था.
फिर तीन महीनो के बाद, मैंने भीमा को फिर फ़ोन किया तो पता चला की दीदी गर्भ से है.
मैं समझ गई थी की यह भीमा के लण्ड के माल ही पिल्ला है पर यह बात, सिर्फ़ हम तीनों के बीच में है. 
भीमा बोला की अब दीदी ने कहा की बहुत चोद लिया तूने मुझे… अब आराम कर और मेरे नज़दीक नहीं आना… 
दीदी बोली की अब कोई और देख ले… बहुत हैं, जो तेरा लण्ड आराम से लेने को तैयार हो पड़ेगी… 
और कहा इस बात का किसी को भी पता ना चले… कभी भी नहीं…
मैं एक साल बाद, फिर 30 दिन की छुट्टी पर गई और इस बार मेरा हज़्बेंड भी साथ में थे. 
उन को 12 दिन बाद, वापिस आना था सो कुछ दिन घर पर बिज़ी रही और हम, इधर उधर घूमते रहे.
मेरे पति, एक बहुत सुंदर आदमी है और तू तो जानती है, इधर उधर हाथ मारने से नहीं डरता.
खुले विचारों का है.
हम लोग, घर पर ही थे और भीमा भी घर पर ही रहता था. 
घर पहुचने के बाद, दो दिन में ही उस से मुलाकात हुई.. 
मैंने पूछा – भीमा, कैसे हो… 
तो वो बोला – बीबी जी, ठीक हूँ… आप तो और अच्छी लग रही हैं और सुंदर भी… 
मैंने कहा – हाँ… वो तो है… तू सुना, क्या हो रहा है… 
वो बोला – आज कल, दीदी अपने घर पर ही हैं और कुछ होना है… और बड़ी भाभी भी घर पर ही हैं… ठीक से हैं… कुकी इधर ही है, मां के साथ… शीला भाभी भी, इधर ही हैं… 
और सुना, क्या कोई और लगी तेरे हाथ की नहीं… – मैं पूछ बैठी..
वो बोला – हाँ, एक है… आप को दिखा दूँगा…
मैं और मेरे पति, मां के पास गये और मिले उन से. 
बाद में भाभी के पास और फिर, दीदी के पास गये. 
दीदी से बात हुई, अकेले में तो बोली की छोटी, तो बड़ी चालक हो गई है…
क्या हुआ, दीदी… – मैंने पूछा, उन से.. 
तो वो बोली – भीमा ने सब बता दिया है, मुझे… 
अच्छा दीदी, क्या करती… मुझ से नहीं रहा गया था और हो गया, सब कुछ… – मैने जवाब दिया..
वो “देसी घोड़ा” है छोटी और काम भी वैसा ही करता है… तू अब जानती है ना, सब कुछ… – वो बोली..
हाँ दीदी… कब ड्यू है, डेलिवरी और जीजा जी कैसे हैं… – मैने पूछा..
अरे पूछ मत, आज कल वो बहुत खुश हैं… बच्चा होना है, ना… – भाभी बोली..
मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो मुस्करा दी और बोली – जानती हूँ, तू क्या पूछना चाहती है… जो तू सोच रही है ना, सही है… उस का ही बीज़ है… पता है छोटी, फसल अच्छी तगड़ी और सुंदर चाहिए तो बीज़ अच्छा और साफ़ सुथरा होना चाहिए, क्यों ना दूसरे से ही डलवाना पड़े… देख जानवरों में तो यह कामन है, “क्रॉस ब्रीडिंग”… गाय के लिए, बड़ा और तगड़ा सांड़ ढूँढते हैं… भैंस के लिए, तगड़ा भैंसा… घोड़ी के लिए, शानदार नसल का घोड़ा जो की सब से हट्टे कट्टे हों… ताकि लण्ड अंदर घुसते ही, उन्हें ठंड पड़ जाए और ढेर सारा बीज़ भी अंदर चला जाए… तो फिर डरना क्यों… तेरे जीजे की लुल्ली से, कुछ होने वाला नहीं है तो फिर मैंने सोचा की क्यों ना मोटे तगड़े घोड़े से ही, यह घोड़ी अपनी चूत शांत करे और बीज़ भी उसी का डाला जाए… बस खूब दिल खोल के मज़ा लिया, चुदाई का और बंद कर लिया चूत का ढक्कन… 
मैं बड़ी हँसी और बोली – दीदी, यह सांड है ही ऐसा… बड़ी ताक़त है, इस में… एक ही झटके में, खोल देगा चूत को…
तो वो बोली – मुझे भी पता है की तू ने भी ले लिया था इस का लण्ड और अच्छी तरह से चुदी थी, तू इस सांड से… तूने कुछ सोचा है क्या…
मैं बोली – नहीं, अब तक नहीं… देखेंगे… 
तेरा पति, कैसा है… – दीदी ने पूछा..
ठीक है, उसे पता ना चले इस चुदाई के खेल का समझी ना दीदी… – मैने कहा..


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

एक दिन, मैंने टाइम पा कर जय को भीमा से मिलाया कहा की यह भीमा है और खेतो में काम करता और करवाता है… 
उसे देखते ही, जय बोला – अच्छा तगड़ा है, यह… सांड जैसा ही लगता है… मस्त… 
मैंने कहा – सही पहचाना, आप ने… 
तब तक, कुकी आ गई. 
मैंने कहा – और यह कुकी है… मां को देखती है और घर का काम करती है… 
जय बोला की वाह !! क्या जोड़ी है, दोनों की…
मैं हंस दी.
जय को जाने में पाँच दिन बाकी थे और हम देर रात तक, मां के पास बैठे थे.
फिर हम, अपने घर चलने लगे. 
मैंने कहा की कुकी को या भीमा को बोलना है की हमारे घर काम कर जाए और समान भी बांधना है, आप का…
जय बोला – ठीक है, बोल दो इन्हें… 
हम उन की कमरे की तरफ चले और भीमा का दरवाजा नोक करने ही वाले थे की अंदर से आवाज़ आने लगी.
मैंने साइड की खिड़की से अंदर झाँका तो क्या देखा की कुकी की “चुदाई” हो रही है..
भीमा, कुकी पर सांड की तरह चढ़ा हुआ है.. 
सोचा रहने दो, चला जाए..
फिर, ख्याल आया की जय को दिखा दूँ. 
मैंने जय को हाथ हिला कर बुलाया और मुँह पर, उंगली रख दी.
जय ने जब यह सब देखा तो उस की तो बोलती ही, बंद हो गई. 
इतना बड़ा लण्ड तो घोड़े का हो सकता है, वो बोला धीरे से.
और इधर, कुकी आराम से चुदाई करवा रही थी.
थोड़ी देर में, हम चुप से निकल गये अपने घर को. 
जय बोला – यार, इस का बहुत बड़ा है… कुकी, कैसे ले रही है इतना मोटा और लंबा, उचक उचक कर… 
मैंने कहा की उसे इस की आदत पड़ गई है और बड़े और मोटे लण्ड का मज़ा ले रही है… 
घर पहुँचे और सोने चले गये, हम. 
बेड पर जय बोला – आज, मैं भी इस घोड़े के जैसे ही चोदूँगा तुझे… 
मैं बोली – ठीक है पर इतने लंबा और मोटा लण्ड कहाँ से लाओगे… 
मुझे पता था की जय, “वियाग्रा” अपने साथ ही रखता है.
कहता है – पता नहीं, कहाँ लेनी पड़े यह गोली…
उस ने वियाग्रा लिया.. फिर, जय ने मुझे उस रात को दो बार चोदा पूरे जोश में आ कर.. 
चोदते हुए, बोला – सुमन, अगर इतना मोटा तेरी चूत मैं घुसे तो क्या होगा… 
मैंने हंसते हुए कहा की क्या होना है, फट जाएगी… 
फिर, मैंने कहा – बहुत लंबा और मोटा है उस का… देखा ना, आप ने… गाण्ड, फाड़ देगा…
जय बोला – यार, बात तो ठीक है… तुझे लेना है इसका तो बोल… मैं भी देख लूँगा, कैसे घुसता है तेरी चूत में यह मोटा डंडा… 
मैंने बनावटी गुस्सा करते हुए कहा की आप को शरम नहीं आती… यह कहते हुए… क्या तुम्हारी पत्नी, एक घोड़े जैसे लण्ड वाले के नीचे चौड़ी हो कर चुदाई कराए और और तो और वो भी नौकर से और आप तमाशा देखो की कैसे चोद रहा है…
जय का शुरू से बड़ा मन था, मुझे किसी से चुदवाते देखने का.
वो बोला – अरे, यह तो मेरा कब से मन होता है मेरी जान… बोलो तो कुछ करें हम…
मैंने कहा – नहीं बाबा… मैं नहीं कर पाऊँगी, यह सब इस घोड़े से… बात मत करो इस की, मुझे वो सीन याद आ जेया रहा है… क्या लण्ड है उस का, यार जय…
मैंने हंस कर कहा – क्यूँ, अपनी बीबी को पराए मर्द के लंड का शोक लगाना चाहते हो… 
जय बोला – लगता है, तेरा अब मन कर रहा है उस का लण्ड लेने को… यार लेना है तो ले ले ना… मैं कहाँ मना कर रहा हूँ… थोडा मज़ा मुझे भी दे दे…
मैं बोली – ऐसा कुछ नहीं है… वो उस की चीज़ है जैसा चाहे उसे काम लाए… हमे क्या… और वो हमारा नौकर है इस का मतलब यह नहीं की उसे जैसे चाहो इस्तेमाल करो और फिर इज़्ज़त भी कोई चीज़ है ना… 
जय बोला – वो सब ठीक है, लेकिन कल बुलाओ तो उसे… कह देना, घर पर काम है…
मैंने कहा – ठीक है, बाबा… मां को कह देंगे, सुबह… ठीक है ना… आगे तुम जानो, तुम्हारा काम जाने… 
वो बोला – सुमन, मेरी जान जिंदगी बहुत छोटी है… मज़ा लेना है या ऐसे ही बितानी है… फ़ैसला तुम्हारा है… कल देखते हैं, क्या होगा… बुलाओ तो पहले उसे… 
मैंने मां को फ़ोन किया और कहा – ज़रा, भीमा को घर भेज दो… जय को काम है… 
भीमा, हमारे घर कोई 6 बजे शाम को आ गया. 
मुझे देखा और बोला – बीबी जी बुलाया है, साहब ने… मां बोली… 
मैंने उस से चुपके से कहा की चुप चाप रहना और जो जय बोले करते रहना… उसे ज़रा सी भी भनक नहीं होनी चाहिए, हमारे बारे में… 
वो बोला – ठीक है… 
भीमा, हमेशा की तरह निक्कर में ही था.. 
गर्मियों के दिन थे सो निक्कर और शर्ट, उस का पुराना ड्रेस है. 
मैंने जय को बताया की भीमा आ गया है… क्या काम है, बता दो इसे… कर देगा जल्दी से और इसे जाना भी है… 
जय बोला – थोड़ा ठहरो, भाई… बोलो उसे, बैठ जाए… थोड़ी साँस ली…
एक घंटे बाद, जय आया और बोला भीमा – कैसे हो, भाई… 
भीमा बोला – ठीक हूँ, साहब… 
गुड… गुड… – जय बोला.. 
फिर, जय बोला – भीमा, ऊपर बेड रूम और दूसरे कमरों की सफ़ाई कर दो और यह कपड़े हैं इन्हें प्रेस कर देना… अगर टाइम ज्यादा हो जायगा तो सुबह चले जाना… 
भीमा 9 बजे, रात तक काम करता रहा. 
इस बीच, मैंने भीमा को चाय दी और कुछ खाने को दिया.
जय ने कहा की मैं नहा कर आता हूँ, तुम बैठो… 
जब जय नाहने गया तो मैंने भीमा से कहा की आज, जय तुम्हे अगर बोलेगा की मुझे चोदना है तो ना मत कर देना, सीधे ही… हंसते रहना और कहना, साहब क्या कह रहें आप… मेडम को ऐसे कैसे कर सकता हूँ मैं… फिर धीरे धीरे से मान जाना… देखो क्या करता है वो… समझे… 
भीमा बोला – ठीक है, बीबी जी…
पर अगर वो बोला की गाण्ड मार लो तो मैं ना कर दूँगी, तुझे… वो हम इन के जाने के बाद करेंगे… ठीक है ना…
हाँ बीबीजी… – भीमा बोला..
तब तक, जय नहा कर आ गया और कहा की सुमन, भीमा को नहाने दो और कुछ खाने को दो… यह यहीं रहेगा, आज क्यूंकि कल सुबह भी थोड़ा काम है… 
मैंने कहा – ठीक है, जी…
फिर भीमा नहाने गया, दूसरे रूम में और उसे मैने दूसरे कपड़े दिए पहनने को.
इसी में, रात के 11 बज गये. 
जय ने कहा की खाना खा लेते हैं, अब… 
हम ने सब मिल के खाना खाया और बैठ गये ड्रॉयिंग रूम में ही.
12 बजने को थे. 
मैंने जय को कहा की दूध पी के सो जाओ कल का कल देखेंगे…
जय भीमा से बोला – भीमा, तुम एक अच्छे आदमी हो आर सब की देख भाल करते रहते हो… यह 2000 रुपए रख लो… आड़े वक्त, काम आएँगे… 
भीमा बोला – ठीक है, साहब जी और कोई काम हो सेवा का मौका ज़रूर दें… मैं आप का सेवक हूँ…
जय – ठीक है… अब खुश रहो और मस्त रहो… 
जय ने कहा – सुमन, दूध लाओ… और जय उठ कर अंदर गया और एक वियाग्रा की गोली उस ने चुपके से मुझे दे दी और मैंने उस के ग्लास में डाल दी… 
मैं तो यही चाहती भी थी.
फिर सब उठ कर, बेड रूम में बैठ गये.. 
भीमा भी कुर्सी पर अंदर बैठ गया और दूध पीने लगे और बातें करने लगे.
जय बोला – भीमा, तू ने शादी नहीं की अब तक…
भीमा बोला – साहब, अब तक नहीं मिली कोई… जल्द ही, कर लूँगा…
जय, हंसते हुए बोला – कुकी अच्छी लड़की है… कर लो, उस से ही… 
तो वो शर्मा सा गया और बोला – आप मां से बात करेंगे, साहब… 
जय बोला – तू मेरे पर छोड़ दे… अपने हिसाब से बात कर देंगे…
भीमा थोड़ा टाँगे दबा देना मेरी और फिर मेडम की भी..
मैं मैक्सी पहन कर आ गई थी, जय पजामे में ही था. 
थोड़ी देर के बाद, जय ने कहा – बस अब मेडम की खिदमत कर दो… वो भी थक गई हैं… 
ठीक है, साहब… बोल कर, भीमा ने मेरी टाँगे दबाना शुरू कर दिया, धीरे धीरे.. 
जय बोला की भाई, ज़रा ऊपर तक दबा दो…
और मुझ को बोला – पेट के बल लेट जाओ सो भीमा, तेरे पैर दबा देगा ठीक से… 
भीमा, लगा दबाने टांगों को घुटनो तक और जय ने कहा – भीमा, सरसों का तेल ले लो… अलमारी में रखा है… 


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, मैं आराम से लेट गई थी, तब जय ने कहा – भीमा, ऊपर तक तेल मालिश करो… 
यह कहते ही, मैंने कहा – क्या कहते हो… अब रहने दो… 
जय बोला – भीमा, इन की मैक्सी ऊपर तक कर दो… 
जय ने मेरी मैक्सी, चूतड़ों तक उठा दी.. 
मैंने बहुत ही, पतली सी चड्डी पहन रखी थी. 
उसके उपर उठाते ही, मेरी चूत ने अपनी “धार” छोड़ दी.
कसम से, अपने पति के सामने नंगी होने का मज़ा क्या होता है ये मुझ से अच्छे से कोई नहीं जानता..
जैसे ही, भीमा ने तेल लगाया और मालिश करने लगा मैं तो जैसे आनंद में आ गई.
तभी जय ने कहा – सुमन, सीधी हो कर भी मालिश करवा लो… मैं बाद में करवा लूँगा…
मैं सीधी हो गई और भीमा, मालिश करने लगा.. 
मैंने देखा की भीमा का 10” लण्ड खड़ा हो गया है. 
जय को मैंने इशारा किया की देख लो… अब इस घोड़े का खड़ा हो गया है…
मैंने इंग्लीश में कहा की इसे अपनी गाण्ड में ले लो, बड़ा मज़ा आएगा…
तो जय बोला – पहले तेरी… फिर मैं पक्का… और हम हंस पड़े.. 
अब जय ने भीमा से कहा की भीमा, बीबी जी कैसी लगती हैं तुझे… 
वो बोला – साहब, बहुत अच्छी हैं… सुंदर भी हैं… 
अच्छा तो भीमा, एक बात बताओ… अगर, तुझे बीबीजी एक रात को मिल जाएँ तो क्या करोगे… 
वो बोला – बीबी जी से पूछूँगा, साब जी… 
जय ने मुझे इशारा किया और कहा – भीमा, ज़रा पानी तो लाओ… 
जैसे ही भीमा उठा, निक्कर में उस का भारी लण्ड तना हुया था. 
जय ने कहा – भीमा, यह क्या हो गया… 
वो बोला – साहब, पता नहीं अपने आप ही ऐसा हो गया है…
अच्छा तो अब कैसे बैठेगा, यह तेरा घोड़े जैसा लण्ड… – जय ने पूछा..
वो बोला – साहब, पता नहीं… 
जय ने मुझे को इंग्लीश में कहा की चड्डी उतार के आ जाऊं… 
मैं तुरंत, चड्डी उतार कर आ गई थी. 
जय ने भीमा को कहा की तेल ले कर, बीबी जी की चूत पर लगाओ…
जय बिना टाइम बर्बाद करे, सीधी बात करने लगा था. 
इधर, मैंने भीमा को पहले ही बता दिया था इस प्लान के बारे में.
भीमा ने तेल की शीशी, मेरी चूत पर डाली और धीरे से लगाने लगा.
जय का लण्ड, खड़ा हो गया था या कहूँ “नाच” रहा था.
जय ने मुझे से कहा की उतार दे अपने मैक्सी को और उस ने भी उतार दिए अपने कपड़े. 
अब जय ने भीमा को कहा की बीबी जी, कैसी लग रही है “नंगी”…
तो वो बोला की बहुत ही सुंदर हैं… 
यहाँ अपने पति के सामने नंगी होने से, मेरी चूत में से भबकारे छूट रहे थे.
जय बोले की भीमा, तुम क्या देख रहे हो अब उतार दो अपने कपड़े…
जब भीमा ने अपने कपड़े उतरे तो जय देखता ही रह गया, उस के लण्ड को और बोला – यार, बहुत बड़ा और लंबा है, तेरा भीमा… कहीं गधी को तो नहीं चोदता फिरता है… 
इस पर, भीमा हंस पड़ा और बोला – नहीं साहब… बस ऐसे ही, देसी घोड़ियों को ही पेलता हूँ… 
भीमा, तू आज़ बीबीजी को चोदेगा… – जय ने सीधे सीधे पूछा.. 
भीमा, चुप रहा.
जय बोला – देख, मैं क्या करता हूँ… 
उस ने मेरी चूत चाटना शुरू किया और फिर चूत में, उंगली डाली तेल लगा कर. 
दो चार बार, अंदर बाहर करने के बाद घुसेड दिया अपना लण्ड मेरी चूत में और शायद 3 या 5 धककों में ही झड़ गया, मेरी चूत में ही. 
इधर, मेरी चूत ने भी मूत दिया, वहीं पड़े पड़े..
जय बोला – अब तेरी बारी है, अपनी मेम साब को चोदने की…
चलो, अब चढ़ जा इन पर और घुसेड दे, अपना “मोटा, फौलादी लण्ड”… मेरी आँखें के, सामने.. 
भीमा, वियाग्रा की डोस में तो था ही अपने लण्ड को तेल लगाया और सीधे ही, उस ने मेरी टाँगें कंधे पर रखी और तब भीमा ने एक ही धक्के में पूरा का पूरा लण्ड घुसेड दिया. 
मुझ को यह उमीद नहीं थी, उस से.. 
सोचा था, आराम से डालेगा.. 
मेरी तो “चीख” निकल गई.. 
शायद वो भी मेरे पति के सामने, मुझे चोदने के एहसास से पगला गया था.
मैं चिल्ला पड़ी – भीमा, मां के लौड़े… फाड़ दी, तू ने मेरी चूत साले, सांड… तेरी बहन की चूत, मैं भैंस हूँ क्या, जो सांड की तरह घुसेड दिया है… मां चुद जाए तेरी, कुत्ते… 
यहाँ विग्रा की वजह से, उस का लण्ड “बंदूक” जैसा हो गया था. 
उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ा और वो लगा, चोदने जय के सामने और बड़े मज़े से भका भक चोद रहा था, मुझे.. 
पूरा का पूरा निकालता और दे मारता, सीधा अंदर चूत में. 
जय देखता ही रहा और बोला – भीमा, चोद जितना चोदना है तुझे आज… यह मौका फिर नहीं मिलेगा…
भीमा भी बोला – ठीक है, साहब… 
मैं तिलमिलती रही और चुदवाती रही.
जय का 3 बार निकल चुका था, मुझे चुदते देख.
एक बार, वो वहीं “मूत” चुका था.
यहाँ मेरा इतना निकला था की मुझ पर बेहोशी छा रही थी.
पूरा मुँह, सुख चुका था.
कोई 20 मिनट में, उस का पानी आने वाला था तो उसने पूछा – कहाँ डालूं बीबी जी… 
मैं बोली छोड़ दे फबारे को, मेरी चूत में देसी घोड़े… 
उस ने अपना लण्ड चूत की जड़ तक घुसेड़ा और पूरा निकाल दिया, उस में.
फिर अपनी हिम्मत बटोरते हुए, मैं बोली – अगर रह गया तो घोड़ा ही पैदा होगा, जय… 
जय बोला – घबरा मत… कल “कच्चा पपीता”, खा लेना… 
फिर मैं उठी और बाथरूम में जा के चूत साफ की, मुता और सारा पानी बाहर निकाला. 
मैं 9 या 10 बार झड़ चुकी थी, इसी बीच. 
जय बोला, ऐसी चुदाई मैंने कभी नहीं देखी थी… किसी भी “पॉर्न या ब्लू फिल्म” से अच्छा है, अपनी बीबी को चुदते देखना… 
मैं बोली – अपनी बीबी को कुतिया की तेरह चुद्वा कर मज़ा आया, तुम्हें… 
जय, हँसने लगा. 
हम तीनों को ही शायद, सबसे ज़्यादा मज़ा आया था.. 
मैं तो अंदर से बहुत ही खुश थी की रास्ता अब फ्री है जब चाहो, पति के सामने ही चुदवा लो…
चूत खुलने की भी चिंता नहीं..
उस हरामी भीमा ने, मेरी चूत चौड़ी कर दी थी, इतना ज़ोर से चोदा था कुत्ते ने.
हम तीनों ही अब तक नंगे थे और भीमा का लण्ड, अभी भी खड़ा हुआ था.
मैंने जय को कहा – लो अब, क्या करना है… इस का तो खड़ा हुआ है… अब किस की चौड़ी करवानी है, इस से… मेरी हिम्मत नहीं है, अब इस के धक्के झेलने की… याद है ना, अब तुम्हारी बारी… 
जय बोला – जानू, कुछ करते हैं… इस में शरमाना क्या है… 
जय ने भीमा को बोला – अपने लण्ड को, धो कर आ…
भीमा जैसे ही आया, जय ने उस का लण्ड चूसने शुरू कर दिया.. 


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