Mastram अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - Printable Version

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RE: Mastram अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - sexstories - 06-18-2017

थोड़ी देर के लिये दीप्ति की आंख भी लग गयी. अचानक, बिस्तर के हिलने और कराहने की आवाजों से दीप्ति जाग गयी. आंखें जब अन्धेरे की अभ्यस्त हुयीं तो देखा कि अजय चादर के अन्दर हाथ डाले किसी चीज को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था. अजय, कमरे में अपनी मां कि मौजूदगी से अनभिज्ञ मुट्ठ मारने में व्यस्त था. शायद अजय कल की रात को सपनों में ही दुहरा रहा था. "आह, चाचीईईई" अजय की कराह सुनकर दीप्ति को कोई शक नहीं रह गया कि अजय के दिमाग में कौन है. शोभा के लिये उनका मन घृणा से भर उठा. आखिर क्यूं किया उसने ऐसा? आज उनका लाड़ला ठीक उनके ही सामने कैसा तड़प रहा है. और वो भी उस शोभा का नाम ले कर. नहीं. अजय को और तड़पने की जरुरत नहीं है. उसकी मां है यहां पर उसकी हर ज़रुरत को पूरा करने के लिये. अजय के लिये उनके निर्लोभ प्रेम और इस कृत्य के बाद में होने वाले असर ने क्षण भर के लिये दीप्ति को रोक लिया. अगर उनके पति अजय के पिता को कुछ भी पता चल गया तो? कहीं अजय ये सोचकर की उसकी मां कितनी गिरी हुई औरत है उन्हें नकार दे तो? या फ़िर कहीं अजय जाकर सब कुछ शोभा को ही बता दे तो? तो, तो, तो? बाकी सब की उसे इतनी चिन्ता नहीं थी. और अपने पति को वो सब कुछ खुद ही बता कर समझा सकती थी कि अजय की जरुरतों को पूरा करना कितना आवश्यक था. नहीं तो जवान लड़का किसी भी बाजारु औरत के साथ आवारागर्दी करते हुये खुद को किसी भी बिमारी और परेशानी में डाल सकता था. पता नही कब, लेकिन दीप्ति चलती हुई सीधे अजय की तरफ़ बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गईं. अजय ने भी एक साये को भांप लिया. तुरन्त ही समझ गया की ये शख्स कोई औरत ही है और पक्के तौर पर घर के अन्दर से ही कोई ना कोई है. क्या उसकी प्यारी शोभा चाची लौट कर आ गयीं हैं? क्या चाची भी उससे इतना ही प्यार करती है जितना वो उनसे? रात अपना खेल खेल चुकी थी. उसकी बिस्तर की साथी उसके पास थीं. अपने लन्ड पर उसकी पकड़ मजबूत हो गयी. बिचारा कितना परेशान था सवेरे से. दसियों बार मुत्ठ मार मार कर टट्टें खाली कर चुका था. लेकिन अब उसकी प्रेमिका उसके पास थी. और वो ही उसको सही तरीके से शान्त कर पायेंगी.

दीप्ति कांपते कदमों से अजय कि तरफ़ बढ़ी. सही और गलत का द्वंद्ध अभी तक उसके दिमाग में चल रहा था. डर था कि कहीं अजय उससे नफ़रत ना करने लगे. तो वो क्या करेगी? कहीं वो खुद ही अपने आप से नफ़रत ना करने लगे. इन सारे शकों के बावजूद बेटे को चोदने का ख्याल दीप्ति अपने दिल से नहीं निकाल पाई. चादर के अन्दर हाथ डाल कर लन्ड के ऊपर जमे अजय के हाथों को अपने दोनो हाथों से ढक लिया. अब जैसे जैसे अजय लन्ड पर हाथ ऊपर नीचे करता दीप्ति का हाथ भी खुद बा खुद उपर नीचे होता. "चाची" अजय फ़ुसफ़ुसाया. अपना हाथ लन्ड से अलग कर मां के हाथों को पूरी आजादी दे दी उस शानदार खिलौने से खेलने की. अपने सपनों की मलिका को पास पाकर अजय का लन्ड कल से भी ज्यादा फ़ूल गया. दीप्ति ने अजय के लन्ड पर उन्गलियां फ़िराईं तो नसों में बहता गरम खून साफ़ महसूस हुआ.
आंखे बन्द करके पूरे ध्यान से उस महान औजार को दोनो हाथों से मसलने लगी. दीप्ति के दिल से आवाज आई कि ये अजय का लन्ड कभी उसी के शरीर का एक हिस्सा था. इतना कठोर, इतना तगड़ा, अपने ही पानी से पूरी तरह से तर ये जवानी की दौलत उसकी अपनी थी. इससे पहले अपनी जिन्दगी में उन्होनें कभी ऐसे किसी लन्ड को हाथ में नहीं लिया था. याद नहीं अजय के जन्म से पहले क्या खाया था कि आज उसका लन्ड अपने बाप चाचा से भी कहीं आगे था.
अपने ही ख्यालों में डूबी हुई उस मां को ये भी याद नहीं रहा कि कब उनकी मुट्ठी ने अजय के लन्ड को कसके दबाकर जोर जोर से दुहना चालू कर दिया. लन्ड की मखमली खाल खीचने से अजय दर्द से कराह उठा. हाथ बढ़ा कर अजय ने मां की अनियंत्रित कलाई को थामा. दीप्ति ने दूसरे हाथ से अजय का माथा सहलाया. खुद को घुटनों के बल बिस्तर के पास ही स्थापित करती हुई दीप्ति ने लन्ड को मुठियाना चालू रखा. अजय के चेहरे से हटा अपने हाथ को दीप्ति ने अब उसके सीने पर निप्पलों को आनन्द देने के काम में लगा दिया.
"हाँ आआआआहहहह". शरीर पर दौड़ती जादुई उन्गलियों का असर था ये. और ज्यादा आनन्द की चाह में अजय बेकरारी में अपनी कमर हिलाने लगा.
अजय के हाथ मां के कन्धों पर जम कर उन्हें अपने पास खीचने लगे. अन्धेरी रात में अजय उस मादा शरीर को अपने पूरे बदन पर महसूस करना चाहता था. लेकिन उसकी प्रेमिका ने तो पूरे कपड़े पहने हुये है. अजय की उत्तेजना अपने चरम पर थी.


RE: Mastram अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - sexstories - 06-18-2017

उधर दीप्ति ने भी शरीर को थोड़ा और झुकाते हुए अजय के खड़े लन्ड तक पहुंचने की चेष्टा की. जो शोभा ने किया वो वह भी कर सकती है. तो क्या हुआ अगर लन्ड चूसने का उसका अनुभव जीरो है, भावनायें तो प्रबल हैं ना. एक बार के लिये उसे ये सब गलत लगा किन्तु अपने ही बेटे के साथ सैक्स करने से ज्यादा गलत भला क्या होता. मन थोड़ा अजीब सा हो रहा था लेकिन फ़िर शोभा का ख्याल आते ही नया जोश भर गया. अगर उसने आज अजय का लन्ड नहीं चूसा तो वह कल फ़िर से इस आनन्द को पाने के लिये शोभा के पास जा सकता है. नहीं. नहीं. आज किसी भी कीमत पर वो अपने लाड़ले के दिलो दिमाग से शोभा की यादें मिटा देगी चाहे इसके लिये उन्हें कुछ भी क्युं ना करना पड़े.
अजय अब अपनी सहचरी का चेहरा देखना चाहता था. वहीं चेहरा जो कल रात किसी देवी की मूर्ति की तरह चमक रहा था. हाथ बढ़ाकर बिस्तर के पास की लैम्प जलाई तो लम्बे बालों मे ढका चेहरा आज कुछ बदला हुआ लगा. ये उसकी चाची तो नहीं थीं. दीप्ति ने अपना चेहरा अजय की तरफ़ घुमाया तो लड़के के चेहरे पर दुनिया भर का आश्चर्य और डर फ़ैल गया. अजय जल्दी से अपनी चादर की तरफ़ झपटा. दीप्ति समझ गईं अभी नहीं तो कभी नहीं वाली स्थिति आ खड़ी हुई है. अगर उन्होनें वासना और अनुभव का सहारा नहीं लिया तो इस मानसिक बाधा को पार नहीं कर पायेंगी और फ़िर अजय भी कभी उनका नहीं हो पायेगा.

लन्ड पर तुरन्त ही झुकते हुये दीप्ति ने पूरा मुहं खोला और अजय के तन्नाये पुरुषांग को निगल लिया. मां के होंठ लन्ड के निचले हिस्से पर जमे हुये थे. मुहं के अन्दर तो लार का समुन्दर सा बह रहा था. आखिर पहली बार कोई लन्ड यहां तक पहुंचा था. लन्ड चुसाई करते हुए भी दीप्ति के दिल में सिर्फ़ एक ही जज्बा था कि वो अजय को सैक्स के चरम पर अपने साथ ले जायेगी जहां ये लड़का सब कुछ भूल कर बस उन्हीं को चोदेगा.
दो मिनट पहले के मानसिक आघात के बाद जो लन्ड थोड़ा नरम पड़ गया था वो फ़िर से अपने शबाब पर लौट आया. मां के लम्बे बाल अजय की जांघों और पेट पर बिखर कर अलग ही रेशमी अहसास पैदा कर रहे थे. पिछली रात से बहुत ज्यादा अलग ना सही लेकीन काफ़ी मजेदार था ये सब. अजय ने भी अब सब कुछ सोचना छोड़ कर मां के सिर को हाथों से थाम लिया और फ़िर कमर हिला हिला कर उनके मुहं को चोदने लगा.
अजय का नियंत्रण खत्म हो गया. वो अभी झड़ना नहीं चाहता था परन्तु मां का मखमली मुहं, वो जोश, वो गर्मी और मुहं से आती गोंगों की आवाजों से आपा खो कर उसका वीर्य बह निकला.
"मां" अजय सीत्कारा "रुको, रुको.. रुक जाओ" अजय चिल्लाया. दीप्ति सब समझ गई. अजय छूटने वाला था. लन्ड की नसों मे बहते वीर्य का आभास पाकर दीप्ति ने अपना मुहं हटाय़ा और मुट्ठी में जकड़ कर अजय के लन्ड को पम्प करने लगीं. गुलाबी सुपाड़े में से वीर्य की धार छूट कर सीधे मां के चेहरे पर पड़ी. दीप्ति ने दोनो आंखें बन्द कर लीं. लन्ड से अजय का सड़का झरने की तरह बह निकला. दीप्ति का हाथ अजय के वीर्य से सना हुआ था. "बर्बाद" एक ही शब्द दीप्ति के दिमाग में घूम रहा था.
अभी तक झटके लेते लन्ड को दीप्ति ने निचोड़ निचोड़ कर खाली कर दिया. लड़के के मुहं से कराह निकली "मां, ये आपने क्या कर दिया?"
"वहीं, जो मुझे बहुत पहले कर देना चाहिये था" मां ने जवाब दिया "तुमको मेरी जरूरत है. ना कि किसी चाची या किसी भी ऐरी गैरी लड़की या औरत की" "तुम मेरे हो सिर्फ़ मेरे" उनके वाक्यों में गर्व मिश्रित अधिकार था. मां के हाथ, चेहरे और नाईटी अजय के वीर्य से सने हुये थे. दीप्ति ने अजय की जांघों पर सिमटी पड़ी चादर से चेहरा रगड़ कर साफ़ किया. अजय ने बिस्तर पर एक तरफ़ हटते हुये अपनी मां के लिये जगह बना ली. दीप्ति भी अजय के पास ही बिस्तर पर लेट गयी. खुद को इस तरह से व्यवस्थित किया की अजय का चेहरा ठीक उनके स्तनों के सामने हो और लन्ड उनके हाथ में. नाईट गाऊन के सारे बटन खोल कर दीप्ति ने उसे अपने बदन से आज़ादी दे दी.


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अजय की आंखों के सामने मां की नन्गी जवानी बिखरी पड़ी थी. जबसे सैक्स शब्द का मतलब समझने लगा था उसकी मां ने कभी भी उसे अपने इस रूप का दर्शन नहीं दिया था. हां चाची के साथ जरूर किस्मत ने कई बार साथ दिया था. अजय का सिर पकड़ दीप्ति ने उसे अपने चूंचों मे छिपा लिया. अजय थोड़ा सा कुनमुनाया. "श्श्श्श". "मेरे बच्चे, तेरे लिये तेरी मां ही सब कुछ है. कोई चाची या कोई भी दूसरी औरत मेरी जगह नही ले सकती. समझे?"
अजय के होठों ने अपने आप ही मां के निप्पलों को ढूंढ लिया. जीवन में पहली बार ना सही लेकिन इस समय अपनी मां के शरीर से अपनी भूख मिटाने का ये अनोखा ही तरीका था. मां के दोनों निप्पल बुरी तरह से तने हुये थे. शायद बहुत उत्तेजित थी. अपने बेटे के लिये उसकी मां ने अपने आनन्द की परवाह भी ना की. अजय का मन दीप्ति के लिये प्यार और सम्मान से भर गया.
मां बेटे एक दूसरे से बेल की तरह लपटे पड़े थे. अजय का एक पावं दीप्ति की कमर को जकड़े था तो हाथ और होंठ मां के सख्त हुये मुम्मों पर मालिश कर रहे थे. लन्ड में भी धीरे धीरे जान लौटने लगी. पर दिन भर का थका अजय जल्दी ही अपनी ममतामयी मां के आगोश में सो गया.
दीप्ति थोड़ी सी हताश तो थी किन्तु अजय की जरुरतों को खुद से पहले पूरा करना उनकी आदत में था. खुद की टांगों के बीच में आग ही लगी थी पर अजय को जन्मजात अवस्था में खुद से लिपटा कर सोना उसे सुख दे रहा था. थोङी देर में दीप्ति भी नींद के आगोश में समा गयी. जो कुछ भी उन दोनों के बीच हुआ वो तो एक बड़े खेल की शुरुआत भर था. एक ऐसा खेल जो इस घर में अब हर रात खेला जाने वाला था.


RE: Mastram अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - sexstories - 06-18-2017

पिछले चौबीस घन्टों में अपने ही घर की दो सीधी सादी दिखने वाली भद्र महिलाओं के साथ हुये उसके अनुभव को याद करके अजय का लन्ड फ़िर तेजी से सिर उठाने लगा. बिस्तर पर उसकी मां दीप्ति जन्मजात नन्गी अवस्था में उसकी बाहों में पड़ी हुयीं थीं. मां के कड़े निप्पलों को याद करके अजय का हाथ अपने आप ही दीप्ति के चूचों पर पहुंच गया. हथेली में एक चूचें को भर कर अजय हौले हौले से दबाने लगा. शायद मां जाग जाये और क्या पता खुद को चोदने भी दे. आज की रात वो किसी औरत के जिस्म को बिना चोदे रह नहीं पायेगा.
अजय ने धीरे से मां की तरफ़ करवट बदलते हुये अपना लन्ड उनके भारी नितंबों की दरार में घुसेड़ दिया. अपनी गांड पर दबाब पाकर मां की आंखें खुल गईं.
"अजय, ये क्या कर रहे हो?", दीप्ति मां बुदबुदाईं.
क्य बोलता बिचारा की मां मैं तुम्हे चोदना चाहता हूं. क्या आप में से कोई भी ये बात कभी भी अपनी मां से कह पायेगा? नहीं ना? अजय ने जवाब में अपने गरम तपते होंठों से दीप्ति के कानों को चूमा. बस. इतना करना ही काफ़ी था उस उत्तेजना से पागल हुई औरत के लिये. दीप्ति ने खुद पेट के बल लेटते हुये अजय के हाथों को खींच कर अपनी झांटो के पास रखा और एक पैर सिकोड़ कर घुटना मोड़ते हुये उसे अपनी बुरी तरह गीली हुई चूत के दर्शन कराये. अजय ने मां की झांटो भरी चूत पर उन्गलियां फ़िराई. परन्तु अनुभवहीनता के कारण ना तो वो उन बालों को अपने रास्ते से हटा पा रहा था ना ही मां की चूत में अन्दर तक उन्गली करने का साहस कर पा रहा था.
समस्या को तुरन्त ही ताड़ते हुये दीप्ति ने अजय की उन्गलियो को अपने हाथों से चूत के होठों से छुलाया. फ़िर धीरे से अजय की उन्गली को गीली चूत के रास्ते पर आगे सरका दिया. जहां दीप्ति को स्वर्ग दिख रहा था वहीं अजय ये सोच कर परेशान था की कहीं उसकी कठोर उन्गलियां उसकी प्यारी मां की कोमल चूत को चोट ना पहुंचा दे. अजय शायद ये सब सीखने में सबसे तेज था. थोडी देर ध्यान से देखने के बाद बुद्धीमत्ता दिखाते हुये उसने अपनी उन्गली को चूत से बाहर खींच लिया. अब अपनी मध्यमा (बीच की सबसे बड़ी उन्गली) को मां की गांड के छेद के पास से कम बालों वाली जगह से ठीक ऊपर की तरफ़ ठेला. चूत के इस हिस्से में तो जैसे चिकने पानी का तालाब सा बना हुआ था. इस तरह धीरे धीरे ही सही अजय अपनी मां की खुजली दूर करने लगा.
दीप्ति मां सिसकी और अपनी टांगों को और ज्यादा खोल दिया. साथ ही खुल गई चूत की दीवारें भी. अब एक उन्गली से काम नही चलने वाला था. अजय ने कुहनियों के बल मां के ऊपर झुकते हुये एक और उन्गली को अपनी साथी के साथ मां की चूत को घिसने की जिम्मेदारी सौंप दी.
"आह, मेरे बच्चे", अत्यधिक उत्तेजना से दीप्ति चींख पड़ी. बाल पकड़ कर अजय का चेहरा अपनी तरफ़ खींचा और अपने रसीलें गरम होंठ उसके होठों पर रख दिये.
आग में जैसे घी ही डाल दिया दीप्ति ने. अजय ने आगे की ओर बढ़ते हुये मां की जांघों को अपने पैरों के नीचे दबाया और फ़ुंकार मारते लन्ड से चूत पर निशाना लगाने लगा. अजय के शारीरिक बल और प्राकृतिक सैक्स कुन्ठा को देख कर दीप्ति को शोभा की बात सच लगने लगी. नादान अजय के लन्ड को जांघों के बीच से हाथ डाल कर दबोचा और खाल को पीछे कर सुपाड़े को अपनी टपकती चूत के मुहांने पर रख दिया. कमर हिला हिला कर खुद ही उस कड़कड़ाते लन्ड को चूत रस से सारोबार करने के बाद फ़ुसफ़ुसाई "अब अन्दर पेलो ये लौड़ा". एक बार भी दिमाग में नहीं आया की ये कर्म अजय के साथ उनके एक नये रिश्ते को जन्म दे देगा. अब वो सिर्फ़ अजय की मां नहीं बल्कि प्रेमिका, पत्नी सब कुछ बन जायेंगी. अजय ने मां के मुम्मों को हथेलियों में जकड़ा और एक ही झटके में अपने औजार को मां की पनियाती चूत में अन्दर तक उतार दिया.

"ओह मांआआ", "बहुत गरम हो तुम अन्दर से" दोनों आंखे बन्द किये हुए मां की कोख में लन्ड से खुदाई करने लगा. स्तनों को छोड़ अजय ने मां की भरी हुई कमर को पकड़ा और अपनी तरफ़ खींचा कि शायद और अन्दर घुसने को मिल जाये. अजय के अलावा दीप्ति का और कोई बच्चा नहीं था और उसके पिता के पिद्दी से लन्ड से इतने सालों तक चुदने बाद दीप्ति की चूत अब भी काफ़ी टाईट बनी हुई थी. अजय का लन्ड आधा ही समा पाया था उस गरम चूत में. "आह बेटा, चोद ना मुझे, प्लीज फ़क मी", दीप्ति गिड़गिड़ाई. अपनी संस्कारी मां के मुहं से ऐसे वचनों को सुनकर अजय पागल हो गया.
"हां, हां, हां. बेटा, मेरे प्यारे बच्चे""यहीं तो तेरी मां को चाहिये था""रुक मत", दीप्ति मां तकिये में चेहरा घुसाये आनन्द के मारे रो पड़ी थीं. आज तक उनके पति अजय के पिता ने कभी भी उनकी चूत को इस तरह से नहीं भरा था. सबकुछ काफ़ी तेजी के साथ हो रहा था और दीप्ति अभी देर तक इन उत्तेजना भरे पलों का मजा उठाना चाहती थी. खुद को कुहनियों पर सम्भालते हुये दीप्ति ने भी अजय के लन्ड की ताल के साथ अपने कुल्हों को हिलाना शुरु कर दिया. एक दूसरे को पूरा आनन्द देने की कोशिश में दोनो के मुहं से घुटी घुटी सी चीखें निकल रही थीं. "हां मां, ले लो मेरा लन्ड, तुम्हें चाहिये था ना?" लन्ड को दीप्ति की चुत पर मारते हुये अजय बड़बड़ा रहा था.


RE: Mastram अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - sexstories - 06-18-2017

अचानक दीप्ति ने अपनी गति बढ़ा दी. अजय का लन्ड खुद को सम्भाल नहीं पाया और चूत से बाहर निकल कर मां की गोल गांड पर थपकियां देने लगा. "हाय, नो नो, अजय बेटा इधर आ, प्लीईईईज" "ले भर ना इसे" दीप्ति कुतिया की तरह एक टांग हवा में उठा कर कमर को अजय के लन्ड पर पटकती हुई मिन्नतें करने लगी.
लेकिन अजय का मन अब इस आसन से भर गया था. अब वो चोदते वक्त अपनी शयनयामिनी का चेहरा और उस पर आते जाते उत्तेजना के भावों को देखना चाहता था. मां को अपने हाथों से करवट दे पीठ से बल पलटा और दोनों मांसल जाघों को अलग करते हुये उठा कर अपने कन्धों पर रख लिया. हजारों ब्लु फ़िल्मों को देखने का अनुभव अब जाकर काम आ रहा था. परन्तु एक बार फ़िर से मां के अनुभवी हाथों की ज़रुरत आन पड़ी थी. दीप्ति ने बिना कहे सुने ही तुरन्त लन्ड को पकड़ कर चूत का पावन रास्ता दिखाया और फ़िर अजय की कमर पर हाथ जमा एक ही धक्के में लन्ड को अपने अन्दर समा लिया.
अजय ने मां के सुन्दर मुखड़े की तरफ़ देखा. गोरा चिकना चेहरा, ताल के साथ थिरकते स्तन और उनके बीच में से उछलता मन्गलसुत्र नाईट लैम्प की मद्दम रोशनी में दमक रहे थे. बुलबुलाती चूत में अजय का लन्ड अन्दर बाहर हो रहा था और मां किसी रन्डी कि तरह चीखने को विवश थी. "हांआआआआ, हां बेटाआआआ" "उंफ़, आह, आह, हाय राम मर गई".
मन ही मन सोचने लगी की शायद अजय के साथ में भी जानवर हो गयी हूं. अपने ही हाथों से अपने बेटे की पीठ, कुल्हों और टांगो पर ना जाने कितनी बार नाखून गड़ा दिये मैनें.
अजय ने आगे झुक कर मां के एक मुम्में को मुहं में दबा लिया. एक साथ चुदने और चुसे जाने से दीप्ति खुद पर नियंत्रण खो बैठी. चूचों के ऊपर अजय ने दांत गड़ा कर चाहे अपना हिसाब किताब पूरा कर लिया हो पर इससे तो दीप्ति की चूत में कंपकंपी छूट गयी. दीप्ति को अपनी चूत में हल्का सा बहाव महसूस हुआ. अगले ही क्षण वो एक ज्वालामुखी की तरह फ़ट पड़ी. ऐसा पानी छूटा की बस "ओह अजय, मेरे लाल, मैं गई बेटा, हाय मांआआआआ". दीप्ति के गले से निकली चींख घर में जागता हुआ कोई भी आदमी आराम से सुन सकता था. पूरी ताकत के साथ अपने सुन्दर नाखून अजय के नितम्बों में गड़ा दिये.
दीप्ति ने अजय को कस कर अपने सीने से लगा लिया.

लेकिन अजय तो झड़ने से कोसों दूर था. दीप्ति मां खुद थोड़ा सम्भली तो अजय से बोली "श्श्श्श्श बेटा, मैं बताती हूं कैसे करना है". दीप्ति को अपनी बहती चूत के अन्दर अजय का झटके लेता लन्ड साफ़ महसूस हो रहा था. अभी तो काफ़ी कुछ सिखाना था इस नौजवान को. जब अजय थोड़ा सा शांत हुआ तो दीप्ति ने उसे अपने ऊपर से धक्का दिया और पीठ के बल उसे पलट कर बैठ गईं. अजय समझ गया कल रात में चाची को अपने बेटे के ऊपर सवारी करते देख मां भी आज वहीं सब करेंगी. लेकिन अजय को इस सब से क्या मतलब उसे तो बस अपनी गरम गरम रॉड को किसी चिकनी चूत में जल्द से जल्द पैवस्त करना था.

दीप्ति ने अजय को एक बार भरपूर प्यार भरी निगाहों से देखा और फ़िर उसके ऊपर आ गईं. एक हाथ में अजय का चूत के झाग से सना लन्ड लिया तो सोचा की इसे पहले थोड़ा पोंछ लूं. अजय की छाती पर झुकते हुये उसकी छाती, पेट और नाभी पर जीभ फ़िराने लगी. खुद पर मुस्कुरा रहीं थीं कि सवेरे मल मल कर नहाना पड़ेगा. दिमाग ने एक बात और भी कही कि ये सब अजय के पिता से सवेरे आंखे मिलाने से पहले होना चाहिये. दीप्ति ने बिस्तर पर बिखरे हुये नाईट गाऊन को उठा कर अजय के लन्ड को रगड़ रगड़ कर साफ़ किया. अपने खड़े हथियार पर चिकनी चूत की जगह खुरदुरे कपड़े की रगड़ से अजय थोड़ा सा आहत हुआ. हालांकि लन्ड को पोंछना व्यर्थ ही था जब उसे मां की रिसती चूत में ही जाना था. सवेरे से बनाया प्लान अब तक सही तरीके से काम कर रहा था. अजय को अपना सैक्स गुलाम बनाने की प्रक्रिया का अन्तिम चरण आ गया था. दीप्ति ने अजय के लन्ड को मुत्ठी में जकड़ा और घुटनों के बल अजय के उपर झुकते हुये बहुत धीरे से लन्ड को अपने अन्दर समा लिया. पूरी प्रक्रिया अजय के लिये किसी परीक्षा से कम नहीं थी. "हां मां, प्लीज, फ़क मी, फ़क मी...ओह फ़क" जोर जोर से चिल्लाता हुआ अजय अपनी ही मां की कोख को भरे जा रहा था. जब अजय का लन्ड उसकी चूत की असीम गहराईओं में खो गया तो दीप्ति सीधी हुई. अजय के चेहरे को हाथों में लेते हुये उसे आदेश दिया "अजय, देखो मेरी तरफ़". धीरे धीरे एक ताल से कमर हिलाते हुये वो अजय के लन्ड की भरपूर सेवा कर रही थीं. उस तगड़े हथियार का एक वार भी अपनी चूत से खाली नहीं जाने दिया. वो नहीं चाहती थी की अजय को कुछ भी गलत महसूस हो या जल्दबाजी में लड़का फ़िर से सब कुछ भूल जाये.
"मै कौन हूं तुम्हारी?" चुत को अजय के सुपाड़े पर फ़ुदकाते हुए पूछा.
"म्म्मां" अजय हकलाते हुये बोला. इस रात में इस वक्त जब ये औरत उसके साथ हमबिस्तर हो रही है तो उसे याद नहीं रहा की मां किसे कहते है.
"मैं वो औरत हूं जो इतने सालों से तुम्हारी हर जरूरत को पूरा करती आई है. है कि नहीं?" दीप्ति ने पासा फ़ैंका. आगे झुकते हुये एक ही झटके में अजय का पूरा लन्ड अपनी चूत में निगल लिया.
"आआआआआह, हां मां, तुम्हीं मेरे लिये सब कुछ हो!" अजय हांफ़ रहा था. उसके हाथों ने मां की चिकनी गोल गांड को पकड़ कर नीचे की ओर खींचा.
"आज से तुम अपनी शारीरिक जरूरतों के लिये किसी भी दूसरी औरत की तरफ़ नहीं देखोगे. समझे?" अपने नितंबों को थोड़ा ऊपर कर दुबारा से उस अकड़े लन्ड पर धम्म से बैठ गईं.

"उउउह्ह्ह्ह, नो, नो, आज के बाद मुझे किसी और की जरुरत नहीं है." कमर ऊपर उछालते हुये मां की चूत में जबर्दस्त धक्के लगाने लगा.


RE: Mastram अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - sexstories - 06-18-2017

अजय के ऊपर झुकते हुये दीप्ति ने सही आसन जमाया. "अजय, अब तुम जो चाहो वो करो. ठीक है" दीप्ति की मुस्कुराहट में वासना और ममता का सम्मिश्रण था. अजय ने सिर उठा कर मां के निप्पलों को होठों के बीच दबा लिया. दीप्ति के स्तनों से बहता हुआ करन्ट सीधा उनकी चूत में पहुंचा. हांलाकि दोनों ही ने अपनी सही गति को बनाये रखा. जवान जोड़ों के विपरीत उनके पास घर की चारदीवारी और पूरी रात थी.
दीप्ति ने खुद को एक हाथ पर सन्तुलित करते हुये दूसरे हाथ से अपनी चूचीं पकड़ कर अजय के मुहं में घुसेड़ दी. अजय ने भी भूखे जानवर की तरह बेरहमी से उन दो सुन्दर स्तनों का मान मर्दन शुरु कर दिया. मां के हाथ की जगह अपना हाथ इस्तेमाल करते हुये अजय ने दोनों निप्पलों को जोर से उमेठा. नीचे मां और पुत्र की कमर हिलते हुये दोनों के बीच उत्तेजना को नियन्त्रण में रख रही थी.
अब मां ने आसन बदलते हुये एक नया प्रयोग करने का मन बनाया. अजय की टांगों को चौड़ा करके दीप्ति उनके बीच में बैठ गयीं. एक बार के लिये अजय का लन्ड चूत से बाहर निकल गया परन्तु अब वो अपने पैरों को अजय की कमर के आस पास लपेट सकती थी. जब अजय भी उठ कर बैठा तो उसका लन्ड खड़ी अवस्था में ही मां के पेट से जा भिड़ा. दीप्ति ने नज़र नीची करके उस काले नाग की तरह फ़ुंफ़कारते लन्ड को अपनी नाभी के पास पाया. २ सेकेन्ड पहले भी ये लन्ड यहीं था लेकीन उस वक्त यह उनके अन्दर समाया हुआ था. अजय की गोद में बैठ कर दीप्ति ने एक बार फ़िर से लन्ड को अपनी चूत में भरा. चूत के होंठ बार बार सुपाड़े के ऊपर फ़िसल रहे थे. अजय ने घुटनों को मोड़ कर उपर ऊठाने का प्रयत्न किया किन्तु मां के भारी शरीर के नीचे बेबस था.
"ऊईईई माआआं" दीप्ति सीत्कारी. अजय की इस कोशिश ने उनको उठाया तो धीरे से था पर गिरते वक्त कोई जोर नहीं चल पाया और खड़े लन्ड ने एक बार फ़िर मां की चूत में नई गहराई को छू लिया था. दीप्ति ने बेटे के कन्धे पर दांत गड़ा दिये उधर अजय भी इस प्रक्रिया को दुहराने लगा. दीप्ति ने अजय का कन्धा पकड़ उसे दबाने की कोशिश की. इतना ज्यादा आनन्द उसके लिये अब असहनीय हो रहा था. मां पुत्र की ये सैक्सी कुश्ती सिसकियों और कराहों के साथ कुछ क्षण और चली.
पसीने से तर दोनों थक कर चूर हो चूके थे पर अभी तक इस राऊंड में चरम तक कोई भी नहीं पहुंचा था. थोड़ी देर रुक कर दीप्ति अपने लाड़ले बेटे के सीने और चेहरे को चूमने चाटने लगी. अजय को अपने सीने से लगाते हुये पूछा, "शोभा कौन है तुम्हारी?".
"कौन?" इस समय ऐसे सवाल का क्या जवाब दिया जा सकता था? अजय ने एक जोरदार धक्का मारते हुये कहा.
"कोई नहीं, राईट?" दीप्ति ने भी अजय के धक्के के जवाब में कमर को झटका दे उसके लन्ड को अपनी टाईट चूत में खींच लिया. मां के जोश को देख कर बेटा समझ गया कि शोभा जो कोई भी हो अब उसे भूलना पड़ेगा.
"उसका काम था तुम को मर्द बना कर मेरे पास लाना. बस. अब वो हमेशा के लिये गई. समझ गये?" दीप्ति के गुलाबी होंठों पर जीत की मुस्कान बिखर गई.
इतनी देर से चल रहे इस चुदाई कार्यक्रम से अजय के लन्ड का तो बुरा हाल था ही दीप्ति कि चूत भी अन्दर से बुरी तरह छिल गय़ी थी. शोभा सही थी. उसके बेटे ने जानवरों जैसी ताकत पाई है. और ये अब सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी है. अजय को वो किसी भी कीमत पर किसी के साथ भी नहीं बाटेगी.
"अजय बेटा. बस बहुत हो गया. अब झड़ जा. मां कल भी तेरे पास आयेगी" दीप्ति हांफ़ने लगी थी. अजय का भी हाल बुरा था. उसके दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया था. समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दे. बस दीप्ति के फ़ुदकते हुये मुम्मों को हाथ के पंजों में दबा कमर उछाल रहा था.
"ऊहहहहहहहहहह! हां! ऊइइइ मांआआ!" चेहरे पर असीम आनन्द की लहर लिये दीप्ति बिना किसी दया के अजय के मुस्टंडे लन्ड पर जोर जोर से चूत मसलने लगी. "आ आजा बेटा, भर दे अपनी मां को", अजय को पुचकारते हुये बोली.
इन शब्दों ने जादू कर दिया. अजय रुक गया. दोनों जानते थे कि अभी ये कार्यक्रम कफ़ी देर तक चल सकता है लेकिन उन दोनों के इस अद्भुत मिलन की साथी उन आवाजों को सुनकर गोपाल किसी भी वक्त जाग सकते थे और यहां कमरे में आकर अपने ही घर में चलती इस पाप लीला को देख सकते थे. काफ़ी कुछ खत्म हो सकता था उसके बाद और दोनों ही ऐसी कोई स्थिति नहीं चाहते थे. अजय ने धक्के देना बन्द कर आंखे मूंद ली. लन्ड ने गरम खौलते हुये वीर्य की बौछारे मां की चूत की गहराईयों में उड़ेल दी. "ओह" दीप्ति चीख पड़ी. जैसे ही पुत्र वीर्य की पहली बौछार का अनुभव उन्हें हुआ अपनी चूत से अजय के फ़ौव्वारे से लन्ड को कस के भींच लिया. अगले पांच मिनट तक लन्ड से वीर्य की कई छोटी बड़ी फ़ुहारें निकलती रहीं.
थोड़ी देर बाद जब ज्वार उतरा तो दीप्ति बेटे के शरीर पर ही लेट गय़ीं. भारी भरकम स्तन अजय की छातियों से दबे हुये थे. अजय ने मां के माथे को चूमा और गर्दन को सहलाया.
"मां, मैं हमेशा सिर्फ़ तुम्हारा रहूंगा. तुम जब चाहो जैसे चाहो मेरे संग सैक्स कर सकती हो, आज के बाद मैं किसी और की तरफ़ आंख उठा कर भी नहीं देखूंगा", अजय ने अपनी मां, काम क्रीड़ा की पार्टनर दीप्ति को वचन दिया.
दीप्ति ने धीरे से सिर हिलाया. उनका बेटा उनके प्यार की गहराई को समझ चुका था. अजय आज के बाद उनकी आंखों से दुनिया देखेगा. एक बार फ़िर अजय को सब कुछ सिखाने की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी. और अब उन्हें भी सैक्स में वो सब करने का मौका मिलेगा जो उनके पति के दकियानूसी विचारों के कारण आज तक वह करने से वंचित रहीं. अपने बेटे को फ़िर से पा लेने की सन्तुष्टी ने उनके मन से अपने कृत्य की ग्लानि को भी मिटा दिया था.
दीप्ति ने अजय के मोबाईल में सवेरे जल्दी उठने का अलार्म सेट किया ताकि अपने पति से पहले उठ कर खुद नहा धो कर साफ़ हो सकें. मोबाईल वापिस रख अजय के होठों पर गुड नाईट किस दिया और उस की बाहों में ही सो गयीं.


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उस रात के बाद दीप्ति के जीवन में एक नया परिवर्तन आ गया. अपने बेटे अजय के साथ संभोग करते समय हर तरह का प्रयोग करने की छूट थी जो उनका उम्रदराज पति कभी नहीं करने देता था. हालांकि दैनिक जीवन में मां बेटे काफ़ी सतर्क रहते थे. दोनों के बीच बातचीत में उनके सैक्स जीवन का जिक्र कभी नहीं आता था. दीप्ति ने अजय के व्यवहार में भी बदलाव महसूस किया. अजय पहले की तुलना में काफ़ी शान्त और समझदार हो गया था.सबकुछ अजय के बेडरूम में ही होता था और वो भी रात में कुछ घन्टों के लिये. दीप्ति ही अजय के बेडरूम में जाती थी जब उन्हें महसूस होता था की अजय की जरुरत अपने चरम पर है. बाकी समय दोनों के बीच सब कुछ सामान्य था या यूं कहें की मां बेटे और ज्यादा करीब आ गये थे. हाँ, अजय के कमरे में दोनों के बीच दुनिया की कोई तीसरी चीज नहीं आ सकती थी. अजय और दीप्ति यहां वो सब कर सकते थे जो वो दोनों अश्लील फ़िल्मों में देखते और सुनते थे. एक दूसरे को सन्तुष्ट करने की भावना ही दोनों को इतना करीब लाई थी.और इस सब के बीच में फ़िर से शोभा चाची का आना हुआ. काफ़ी दिनों से कुमार अपने बड़े भाई के घर जाना चाहता था और शोभा इस बार उसके साथ जाना चाहती थी. पिछली बार शोभा ने कुमार को वहां से जल्दी लौटने के लिये जोर डाला था और कुमार बिचारा बिना कुछ जाने परेशान सा था कि अचानक से शोभा का मूड क्यूं बिगड़ गया. खैर अब सब कुछ फ़िर से सामान्य होता नज़र आ रहा था.उधर शोभा अपने घर लौटने के बाद भी अजय को अपने दिमाग से नहीं निकाल पाई थी. अजय के साथ हुये उस रात के अनुभव को उसने कुमार के साथ दोहराने का काफ़ी प्रयत्न किया परन्तु कुमार में अजय की तरह किशोरावस्था की वासना और जानवरों जैसी ताकत का नितान्त अभाव था. कुमार काफ़ी पुराने विचारों वाला था. शोभा को याद नहीं कि कभी कुमार ने उसने ढंग से सहलाया और चाटा हो. लेकिन अजय ने तो उस एक रात में ही उसके पेटीकोट में घुस कर सूंघा था. क्या पता अगर वो अजय को उस समय थोड़ा प्रोत्साहन देती तो लड़का और आगे बढ़ सकता था. चलो फ़िर किसी समय सही....शोभा दीप्ति के घर में फ़िर से उसी रसोईघर में मिली जहां उसने अजय के साथ अपनी रासलीला को स्वीकारा था. अजय एक मिनट के लिये अपनी चाची से मिला परन्तु जल्द ही शरमा कर चुपचाप खिसक लिया था. अभी तक वो अपनी प्रथम चुदाई का अनुभव नहीं भूला था जब उसकी चाची ने गरिमापूर्ण तरीके से उसे सैक्स जीवन का महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाया था. "सो, कैसा चल रहा है सब कुछ", शोभा ने पूछा."क्या कैसा चल रहा है?" दीप्ति ने शंकित स्वर में पूछा. अपनी और अजय की अतरंगता को वो शोभा के साथ नहीं बांट सकती थी."वहीं सबकुछ, आपके और भाई साहब के बीच में.." शोभा ने दीप्ति को कुहनी मारते हुये कहा. दोनों के बीच सालों से चलता आ रहा था इस तरह का मजाक और छेड़खानी."आह, वो", दीप्ति ने दिमाग को झटका सा दिया. अब उसे बिस्तर में अपने पति की जरुरत नहीं थी. अपनी शारीरिक जरुरतों को पूरा करने के लिये रात में किसी भी समय वो अजय के पास जा सकती थी. अजय जो अब सिर्फ़ उनका बेटा ही नहीं उनका प्रेमी भी था."दीदी, क्या हुआ?" शोभा के स्वर ने दीप्ति के विचारों को तोड़ा."नहीं, कुछ नहीं. आओ, हॉल में बैठ कर बातें करते हैं". साड़ी के पल्लू से अपने हाथ पोंछती हुई दीप्ति बाहर हॉल की तरफ़ बढ़ गई.हॉल में इस समय कोई नहीं था. दोनों मर्द खाने के बाद अपने अपने कमरों मे सोने चले गये थे और अजय का कहीं अता पता नहीं था. दिन भर में अजय ने सिर्फ़ एक बार ही अपनी चाची से बात की थी और पहले की तुलना में काफ़ी सावधानी बरत रहा था. उसके हाथ शोभा को छूने से बच रहे थे और ये बात शोभा को बिल्कुल पसन्द नहीं आई थी.

दीप्ति सोफ़े पर पसर गई और शोभा उसके बगल में आकर जमीन पर ही बैठ गयी."आपने जवाब नहीं दिया दीदी.""क्या जवाब?" दीप्ति झुंझला गयी. ये औरत चुप नहीं रह सकती. "मुझे अब उनकी जरुरत नहीं है" फ़िर थोड़ा संयन्त स्वर में बोली. "क्यूं?" शोभा ने दीप्ति के चेहरे को देखते हुए पूछा. "क्या कहीं और से...?" शोभा के होठों पर शरारत भरी मुस्कान फ़ैल गई.दीप्ति शरमा गई. "क्य कह रही हो शोभा? तुम्हें तो पता है कि मैं गोपाल को कितना प्यार करती हूं. तुम्हें लगता है कि मैं ऐसा कर सकती हूं?" "हां तुम ने जरूर ये कोशिश की थी" दीप्ति ने बात का रुख पलटते हुये कहा. अजय और शोभा के संसर्ग को अभी तक दिमाग से नहीं निकाल पाई थी. चूंकि अब वो भी अजय के युवा शरीर के आकर्षण से भली भांति परिचित थी अतः वो इसका दोष अकेले शोभा को भी नहीं दे सकती थी. लेकिन अजय को अब वो सिर्फ़ अपने लिये चाहती थी.शोभा दीप्ति के कटाक्ष से आहत थी. खुद को नैतिक स्तर पर दीप्ति से काफ़ी छोटा महसूस कर रही थी."आप जैसा समझ रही हैं वैसा कुछ भी नहीं था मेरे मन में. अपने ही बेटे जैसे भतीजे की जरुरत को पूरा करने के लिये ही मैनें ये सब किया था. हां उसके कमरे में गलती से में घुसी जरूर थी", वो दीप्ति के सामने सिर झुकाये बैठी रही.दीप्ति ने अपना हाथ शोभा के कन्धे पर रखते हुये कहा "हमने कभी इस बारे में खुल कर बात नहीं की ना?""मुझे लगा आप मुझसे नाराज है. इसी डर से तो में उस दिन चली गई थी" शोभा बोली."लेकिन मैं तुमसे नाराज नहीं थीं." शोभा के कन्धे पर दबाव बढ़ाते हुये दीप्ति ने कहा."फ़िर आप कुछ बोली क्यूं नहीं""मैं उस वक्त कुछ सोच रही थी और जब मुड़ कर देखा तो तुम जा चुकी थीं. अब मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है. इस उम्र के बच्चों को ही अच्छे बुरे की पहचान नहीं होती और फ़िर तुम उसके कमरे में गलती से ही घुसी थीं. अजय को देख कर कोई भी औरत आकर्षित हो सकती है"."हां दीदी, मैं भी आज तक उस रात को नहीं भूली. उसकी वो ताकत और वो जुनून मुझे आज भी रह रह कर याद आता है. कुमार और मैं सैक्स सिर्फ़ एक दुसरे की जरूरत पूरा करने के लिये ही करते हैं." "अजय ने मेरी बरसों से दबी हुई इच्छाओं को भड़का दिया है और ये अब मुझे हमेशा तड़पाती रहेंगी. लेकिन जो हुआ वो हुआ. उस वक्त हालात ही कुछ ऐसे थे. अब ये सब मैं दुबारा नहीं होने दूंगी.


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शोभा के स्वर में उदासी समाई हुई थी. मालूम था की झूठ बोल रही है. उस रात के बारे में सोचने भर से उसकी चूत में पानी भर गया था.दीप्ति ने शोभा की ठोड़ी पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर उठाया, बोली "उदास मत हो छोटी, अजय है ही ऐसा. मैनें भी उसे महसूस किया है. सच में एक एक इन्च प्यार करने के लायक है वो".शोभा दीप्ति के शब्दों से दंग रह गयी,"क्या कह रही हो दीदी?"दीप्ति को अपनी गलती का अहसास हो गया. भावनाओं में बह कर उसने शोभा को उसके और अजय के बीच बने नये संबंधों का इशारा ही दे दिया था. दीप्ति ने शोभा को हाथ पकड़ कर अपने पास खींचा और बाहों में भर लिया. "क्या हुआ था दीदी" शोभा की उत्सुकता जाग गयी."मैं नहीं चाहती थी अजय मेरे अलावा किसी और को चाहे. पर उसके मन में तो सिर्फ़ तुम समाई हुयीं थी.""तो, आपने क्या किया?""उस रात, तुम्हारे जाने के बाद मैं उसके कमरे में गई, बिचारा मुट्ठ मारते हुये भी तुम्हारा नाम ले रहा था. मुझसे ये सब सहन नहीं हुआ और मैनें उसका लन्ड अपने हाथों में ले लिया और फ़िर...." दीप्ति अब टूट चुकी थी.शोभा के हाथ दीप्ति की पीठ पर मचल रहे थे. जेठानी के बदन से उठती आग वो महसूस कर सकती थी. "क्या अजय ने आपके चूंचें भी चूसे थे?" बातों में शोभा ही हमेशा बोल्ड रही थी."हां री, और मुझे याद है कि उसने तुम्हारे भी चूसे थे." दीप्ति ने पिछले वार्तालाप को याद करते हुये कहा. उसके हाथ अब शोभा के स्तनों पर थे. अंगूठे से वो अपनी देवरानी के निप्पल को दबाने सहलाने लगी. अपनी बहन जैसी जेठानी से मिले इस सिग्नल के बाद तो शोभा के जिस्म में बिजलियां सी दौड़ने लगीं. दीप्ति भी अपने ब्लाऊज और साड़ी के बीच नन्गी पीठ पर शोभा के कांपते हाथों से सिहर उठी. अपने चेहरे को शोभा के चेहरे से सटाते हुये दीप्ति ने दूसरा हाथ भी शोभा के दूसरे स्तन पर जमा दिया. दोनों पन्जों ने शोभा के यौवन कपोतों को मसलना शुरु कर दिया. शोभा के स्तन आकार में दीप्ति के स्तनों से कहीं बड़े और भारी थे.

शोभा ने पीछे हटते हुये दीप्ति और अपने बीच में थोड़ी जगह बना ली ताकि दीप्ति आराम से उसके दुखते हुये मुम्मों को सहला सके। उसका चेहरा दीप्ति के गालों से रगड़ रहा था और होंठ थरथरा रहे थे "आप बहुत लकी है दीदी. रोज रात आपको अजय का साथ मिलता है" शोभा की गर्म सांसे दीप्ति के चेहरे पर पड़ रहीं थीं. दोनों के होंठ एक दूसरे की और लपके और अगले ही पल दोनों औरतें प्रेमी युगल की भांति एक दूसरे को किस कर रही थीं. दोनों की अनुभवी जीभ एक दूसरे के मुहं में समाई हुई थी."उसे मुम्मे बहुत पसन्द हैं. तुम्हारे मुम्मे तो मेरे मुम्मों से भी कहीं ज्यादा भरे हुये है" "जी भर के चूसा होगा इनको अजय ने" दीप्ति शोभा के स्तनों को ब्लाऊज के ऊपर से ही दबाते हुये बोली. अजय ने इन्हीं मुम्मों को चूसा था ना. जैसा मेरे साथ करता है उसी तरह से छोटी के मुम्मों की भी दुर्गति की होगी. शोभा दीप्ति के मन की बात समझ गई. तुरन्त ही ब्लाऊज के सारे बटन खोल कर पीछे पीठ पर ब्रा के हुक भी खोल दिये. शोभा के भारी भारी चूचें अपनी जामुन जैसे बड़े निप्पलों के साथ बाहर को उछल पड़े. दीप्ति जीवन में पहली बार किसी दुसरी औरत के स्तनों को देख रही थी. कितने मोटे और रसीले है ये. निश्चित ही अजय को अपने वश में करना शोभा के लिये कोई कठिन काम नहीं था.शोभा ने दोनों हाथों में उठा कर अपने चूंचे दीप्ति की तरफ़ बढ़ाये. दीप्ति झुकी और तनी हुई निप्पलों पर चुम्बनों की बारिश सी कर दी. कुछ दिन पहले ठीक इसी जगह उनके पुत्र के होंठ भी कुछ ऐसा ही कर रहे थे. "ओह, दीदीइइइ" शोभा आनन्द से सीत्कारी.दीप्ति ने एक निप्पल अपने मुहं मे ही दबा लिया. उसकी जीभ शोभा की तनी हुई घुंडी पर वैसे ही नाच रही थी जैसे वो रोज रात अजय के गुलाबी सुपाड़े पर फ़ुदकती थी. पहली बार एक औरत के साथ. नया ही अनुभव था ये तो. खुद एक स्त्री होने के नाते वो ये जानती थी की शोभा क्या चाहती है. अजय और शोभा में काफ़ी समानतायें थीं. अजय की तरह शोभा के बदन में भी अलग ही आकर्षण था. उसके शरीर में भी वही जोश और उत्तेजना थी जो हर रात वो अजय में महसूस करती थी. दोनों का मछली पानी जैसा साथ रहा होगा उस रात. ये सोचते सोचते ही दीप्ति शोभा के निप्पल को चबाने लगी."और क्या क्या किया दीदी अजय ने आपके साथ? क्या आपको वहां नीचे भी चाटा था उसने?" "आऊच...आह्ह्ह" शोभा के मुहं से सवाल के साथ ही दबी हुई चीख भी निकली. दीप्ति अब उस बिचारे निप्पल पर अपने दातों का प्रयोग कर रही थी."नीचे कहां?""टांगों के बीच में." कहते हुये शोभा ने अपना दूसरा स्तन हाथ में भर लिया. ये अभागा दीप्ति के प्यार की चाह में अन्दर से तड़प तड़प कर सख्त हो गया था."टांगों के बीच में?" दीप्ति ने शोभा का थूक से सना निप्पल छोड़ दिया और अविश्वास से उसकी तरफ़ देखती हुई बोली. "भला एक मर्द वहां क्यूं चाटने लगा?" फ़िर से शोभा के निप्पल को मुहं में भर लिया और पहले से भी ज्यादा तीव्रता से चुसाई में जुट गयी मानो निप्पल नहीं लन्ड हो जो थोड़ी देर में ही अपना पानी छोड़ देगा."आआआह्ह्ह्ह्ह्ह॥ दीदी, प्लीज जोर से चूसो, हां हां", शोभा दीप्ति को उकसाते हुये चीखी. उसकी चूत में तो बिजली का करंट सा दौड़ रहा था."यहां, देखो यहां घुसती है मर्द की जुबान", शोभा ने फ़ुर्ती के साथ दीप्ति कि साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर पैन्टी की कसी हुई इलास्टिक में हाथ घुसेड़ दिया. पैन्टी को खींच कर उतारने का असफ़ल प्रयास किया तो हाथ में चुत के पानी से गीली हुई झांटे आ गईं जो इस वक्त दीप्ति के शरीर में लगी आग की चुगली खा रही थी. दीप्ति ने खुद ही साड़ी और पेटिकोट को कमर पर इकट्ठा कर उन्गली फ़सा अपनी पैन्टी नीचे जांघों तक सरका दी. इधर दीप्ति ने फ़िर से शोभा के स्तनों को जकड़ा उधर शोभा भी पूरी तैयारी में थी. चूत का साथ छोड़ चुकी पैन्टी को थोड़ा और नीचे खींच कर उसने दीप्ति की बुल्बुले उगलती चूत को बिल्कुल आजाद करा दिया. चूत के होंठों को अपनी पतली पतली उंगलियों से सहलाते हुये फ़ुसफ़ुसाई, "दीदी, आप लेट जाओ, मैं आपको बताती हूं कि कैसा महसूस होता है जब एक जीभ हम औरतों की चूत को प्यार करती है". दीप्ति की समझ में तो कुछ भी नहीं आ रहा था और शोभा अपने जिस्म में उमड़ती उत्तेजना से नशे में झूम रही थी.


RE: Mastram अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - sexstories - 06-18-2017

दीप्ति सोफ़े पर लेट गयी और शोभा ने भी उसकी टांगों के बीच में जगह बनाते हुये उंगलियों से पैन्टी को सरका कर उतार दिया.काफ़ी मादक दृश्य था. दो जवान सैक्सी औरतें, एक सोफ़े पर साड़ी और पेटीकोट उठाये बैठी है और दूसरी उसकी टांगों के बीच में ब्लाऊज खोले बैठी मुहं को गदराई जांघों के बीच में दबाये तड़प रही है."दीदी, ये किया था आपके प्यारे बेटे ने मेरे साथ." कहते हुये शोभा ने दीप्ति की चूत के पास अपने होंठ रख दिये. दीप्ति के अन्दरूनी अंगों पर बहता पानी शोभा के भी गालों पर चुपड़ गया. इतना करने के बाद शोभा दीप्ति के गले से लिपट कर उसके कान में फ़ुसफ़ुसाई "इतना शरारती है अपना अजय"."बस इतना ही." दीप्ति शोभा के कन्धे पर होंठ रगड़ते हुये बोली."हाँ, इतना ही", शोभा ने अपने स्तनों पर चुभते दीप्ति के मन्गलसूत्र को एक तरफ़ हटाते हुये कहा. "ये सब उसने मुझे वहां से जाने से रोकने के लिये किया था. पता नहीं कहां से सीखा औरतों को इस तरह से वश में करना. शायद किसी ब्लू फ़िल्म में देखा होगा.""हाँ छोटी, देखा तो मैनें भी है. लेकिन उसके बाद क्या होता है मुझे कुछ पता नहीं. तुम्हारे भाईसाहब अपनी उन्गलियां तो चलाते थे मेरी चूत पर और मुझे काफ़ी मजा भी आता था लेकिन लन्ड से चुदाई तो अलग ही चीज़ है. अजय के लन्ड से चुदने के बाद से तो मुझे इन तरीकों का कभी ध्यान भी नहीं आया." दीप्ति बोली,"दीदी, मुझे पता है कि आगे अजय क्या करने वाला था." शोभा ने दुबारा से घुटने जमीन पर टिकाते हुये अपनी जीभ जेठानी की टांगों के जोड़ के पास घुसा दी. खुद की चूत में लगी आग के कारण उसे मालूम था की दीप्ति को अब क्या चाहिये. पहले तो शोभा ने जीभ को दीप्ति की मोटी मोटी जांघों पर नचाया फ़िर थूक से गीली हुई घुंघराली झांटों को एक तरफ़ करते हुये दीप्ति की रिसती योनि को पूरी लम्बाई में एक साथ चाटा."उई मां...छोटीईईईईई", दीप्ति ने गहरी सिसकी भरी. "क्या हुआ दीदी?" भोली बनते हुये शोभा ने पूछा जैसे कुछ जानती ही ना हो."तेरी जीभ.." दीप्ति का पूरा बदन कांप रहा था. उसकी गांड अपने आप ही शोभा के चेहरे पर ठीक वैसे ही झटके देने लगी जैसे लंड चुसाई के वक्त अजय अपनी कमर हिलाकर उसका मुहं चोदता था.शोभा ने महसूस किया की दीप्ति की चूत ने खुल कर उसकी जीभ के लिये ज्यादा जगह बना ली थी. दीप्ति ने अपनी टांगें चौड़ा दी ताकि शोभा की जुबान ज्यादा से ज्यादा गहराई तक पहुंच सके. हालांकि चूत चाटने में शोभा को कोई अनुभव नहीं था पर रोज बाथरुम में नहाते वक्त अपनी चूत से खेलने के कारण उसे पता था कि दीप्ति को सबसे ज्यादा मजा कब आयेगा.शोभा ने जीभ को सिकोड़ कर थोड़ा नुकीला बनाय़ा और दीप्ति की चूत के ऊपरी हिस्से पर आहिस्ते से फ़िराया. दीप्ति के मुहं से घुटी हुई सी चीख निकली और उंगलियां शोभा के सिर पर जकड़ गयीं. दुबारा शोभा ने फ़िर से जीभ को उसी चिकने रास्ते पर फ़िराया तो वही हाल. दीप्ति फ़िर से होंठ दबा कर चीखी. अनजाने में ही सही शोभा का निशाना सही बैठ गया था. दीप्ति की अनछुयी क्लिट सर उठाने लगी. शोभा भी पूरे मनोयोग से दीप्ति के चोचले को चाटने चूसने लगी गई. इधर दीप्ति को चूत के साथ साथ अपने चूचों में भी दर्द महसूस होने लगा. बिचारे उसके स्तन अभी तक ब्रा और ब्लाउज की कैद में थे. दीप्ति ने शोभा के सिर से हाथ हटा ब्लाऊज के सारे हुक खींच कर तोड़ डाले. हुक टूटने की आवाज सुनकर शोभा ने सिर उठाय़ा और छोटी सी रेशमी ब्रा में जकड़े दीप्ति के दोनों कबूतरों को निहारा. दीप्ति की ब्रा का हुक पीछे पीठ पर था पर शोभा इन्तजार नहीं कर सकती थी. दोनों हाथों से खींच कर उसने दीप्ति की ब्रा को ऊपर सरकाया और तुरन्त ही आजाद हुये दोनों चूचों को दबोच लिया.दीप्ति ने किसी तरह खुद पर काबू करते हुये जल्दी से अपन ब्लाऊज बदन से अलग किया और फ़िर हाथ पीछे ले जाकर बाधा बन रही उस कमबख्त ब्रा को भी खोल कर निकाल फ़ैंका. दो सैकण्ड पहले ही शोभा की जीभ ने दीप्ति की चूत का साथ छोड़ा था ताकि वो उसके स्तनों को थाम सके परन्तु अब दीप्ति को चैन नहीं था. अपने चूचों पर शोभा के हाथ जहां उसे मस्त किये जा रहे थे वहीं चूत पर शोभा की जीभ का सुकून वो छोड़ना नहीं चाहती थी. मन में सोचा कि शोभा को भी ऐसे ही प्यार की जरुरत है पर इस वक्त वो अपने जिस्म के हाथों मजबूर हो स्वार्थी हो गयी थी.


RE: Mastram अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति - sexstories - 06-18-2017

दीप्ति ने पास ही पड़े एक कुशन को उठा अपने चुतड़ों के नीचे व्यवस्थित किया. इस प्रकार उसकी टपकती चूत और ज्यादा खुल गय़ी. शोभा भी दीप्ति का इशारा समझ कर वापिस अपने मनपसन्द काम में जुट गई. कुशन उठाते वक्त दीप्ति को अहसास हुआ कि इस समय दोनों कहां और किस अवस्था में हैं. घर के हॉल में बीचों बीच दोनों महिलायें नंगे जिस्मों को लिये वासना और प्यार से भरी हुई एक दूसरे कि बाहों में समाई थीं. किसी भी क्षण घर का कोई भी पुरुष यहां आकर उन दोनों को रंगे हाथों पकड़ सकता था. परंतु जीवन में पहली बार किसी दूसरी औरत के साथ संभोग के लिये इतना खतरा लेना अनुचित नहीं था.दीप्ति की खुली चूत शोभा के मुहं में फ़ुदक रही थी और शोभा की जीभ भी उसकी चूत के अन्दर नई नई गहराईयां नापने के साथ हर बार एक नई सनसनी पैदा कर रही थी. किसी मर्द के या कहे अजय के लन्ड से चुदते वक्त भी सिर्फ़ चूत की दीवारें ही रगड़ती थी. लेकिन शोभा की जीभ तो अन्दर कहीं गहरे में बच्चेदानी तक असर कर रही थी. पूरे शरीर में उठती आनन्ददायक पीड़ा ये सिद्ध करने के लिये काफ़ी थी कि किसी भी औरत के बदन को सिर्फ़ एक छोटे से बिन्दु से कैसे काबू में किया जा सकता है.कुछ ही क्षण में शोभा को अपनी जुबान पर दीप्ति की चूत का पानी महसूस हुआ. देखते ही देखते चूत में से झरना सा बह निकला. निश्चित तौर पर यहां पानी छोड़ने के मामले में दीप्ति उसे मात देती थी. हे भगवान, इस औरत का पानी पीकर तो किसी प्यासे की प्यास बुझ जाये. शोभा को अपनी चूत में आया खालीपन सता रहा था. परन्तु अभी दीप्ति का पूरी तरह से तृप्त होना जरूरी था ताकि वो फ़िर शोभा के साथ भी यही सब दोहरा सके. शायद दीदी को भी चूत में खालीपन महसूस हो रहा होगा. ऐसा सोच शोभा ने तुरन्त ही अपनी दो उन्गलियों को जोड़ कर उस तपती टपकती चूत में पैवस्त कर दिया.सही बात है भाई, एक औरत ही दूसरी औरत की जरुरत को समझ सकती है, दीप्ति शोभा के इस कारनामे से सांतवे आसमान पर पहुंच गई. उसके गले से घुटी घुटी आवाजें निकलने लगी और चूत ने शोभा की उन्गलियों को कसके जकड़ लिया. उधर शोभा के दिमाग में भी एक नई शरारत सूझी और उसने चूत के अन्दर एक उन्गली को हल्के से मोड़ लिया. अब कसी हुय़ चूत की दिवारों को इस उन्गली के नाखून से खुरचने लगी. हालांकि शोभा दीप्ति को और ज्यादा पीड़ा नहीं देना चाहती थी. कहीं ऐसा ना हो कि अत्यधिक आनन्द के मारे जोर से चीख पड़े और उनके पति जाग कर यहां आ जायें. दीप्ति भी होठों को दातों में दबाये ये सुख भरी तकलीफ़ सहन किये जा रही थी.अचानक से दीप्ति छूटी. सैक्स में इतने ऊंचे बिन्दु तक पहुंचने के बाद दीप्ति का शरीर उसके काबू में नहीं रह गया. रह रह कर नितम्ब अपने आप ही उछलने लगे मानो किसी काल्पनिक लन्ड को चोद रहे हो. शोभा पूरे यत्न से दीप्ति की चूत पर अपने मुहं की पकड़ बनाये रख रही थी. लेकिन दीप्ति कुछ क्षणों के लिये पागल हो चुकी थी. एक ही साथ हंसने और रोने लगी."हां शोभा हां. यहीं बस यहीं...और चाट ना प्लीज. उई मां. मैं गईईईई..आई लव यू डार्लिंग.." शोभा के बदन पर हाथ फ़िराते हुये दीप्ति कुछ भी बक रही थी. एक साथ आये कई आर्गेज्मों का नतीजा था ये. "कभी अजय भी मुझे इतना मजा नहीं दे पाया....आह आह.. बस.." दीप्ति ने शोभा को अपने ऊपर खींचा और उसका चेहरा अपने चेहरे के सामने किया. शोभा के गालों और होठों पर उसकी खुद की चूत का रस चुपड़ा हुआ था परन्तु इस सब से दीप्ति को कोई मतलब नहीं था. ये वक्त शोभा को धन्यवाद देने का था. दीप्ति ने शोभा को जोर से भींचा और अपने होठों को उसके होठों पर रख दिया. शोभा भी अपनी दीदी अपनी जेठानी के पहलू में समा गई. दीप्ति के स्तन उसके भारी भरे हुये स्तनों के नीचे दबे पड़े गुदगुदी कर रहे थे.

शोभा को सहलाते हुये दीप्ति पूछ बैठी, "क्या अजय ने ये सब किया था?"शोभा ने ना में सिर हिलाया। "अजय इतना आगे नहीं बढ़ पाया था. पता नहीं उसे ये सब मालूम भी है कि नहीं. उस रात तो हम दोनों पर बस चुदाई करने का भूत सवार था." थोड़ा रुक कर फ़िर से बोली "दीदी, आप ने भी तो नहीं बताया कि उसने आपके साथ क्या क्या किया?"दोनों औरतों के बीच एक नया रिश्ता कायम हो चुका था. दीप्ति थोड़ा सा शरमाई और शोभा के पूरे बदन पर हाथ फ़िराते हुये सोचने लगी कि कहां से शुरु करे."उसने मेरे साथ सैक्स किया या मैनें उसके साथ? पता नहीं. लेकिन मैं उसे वो सब देना चाहती थी जो एक मर्द एक औरत के बदन में ढूंढता है." दीप्ति के हाथों ने शोभा की सारी को पकड़ कर उसकी कमर पर इकट्ठा कर दिया. दोनों हाथों से शोभा की खुली हुई चिकनी गांड सहलाते हुये सोच रही थी कि अब उसे भी शोभा के प्यार का बदला चुकाना चाहिये.शोभा ने सिर उठा कर दीप्ति की आंखों में झांका और शरारती स्वर में पूछा "क्या आपने भी उसके तगड़े लन्ड को अपने भीतर समाया था?"दीप्ति ने धीरे से सिर हिलाया और शोभा को अपने ऊपर से हटने का इशारा दिया. शोभा अचंभित सी जब खड़ी हुई तो दीप्ति ने उसकी अधखुली साड़ी को खींच कर उसके शरीर से अलग कर दिया. उसके सामने खड़ी औरत के चूचें उत्तेजना के मारे पत्थर की तरह कठोर हो गये थे. दोनों निप्पल भी बिचारी तने रह कर दुख रहे होंगे. शोभा ने अपने बाल खोल दिये. उसका ये रुप क्या औरत क्या मर्द, सभी को पागल करने के लिये काफ़ी था. दीप्ति ने पेटीकोट के ऊपर से ही दोनों हथेलियों से शोभा की गांड को दबोचा. थोङा उचक कर उसके होठों को अपने होठों की गिरफ़्त में ले लिया और अपनी जीभ को उसके मुहं मे अन्दर बाहर करने लगी."लेट जाओ, मैं तुम्हारा बदला चुकाना चाहती हूँ. मैं भी तुम्हें जी भर के प्यार करना चाहती हूं." दीप्ति की इच्छा सुनकर शोभा टेबिल और सोफ़े के बीच में अपनी खुली हुई साड़ी को बिछा उसी पर लेट गय़ी. ""पता नहीं जितना तुम जानती हो उतना मैं कर पाऊंगी या नहीं लेकिन मुझे एक बार ट्राई करने दो" दीप्ति उसके ऊपर आती हुई बोली. पहले की भांति दीप्ति ने फ़िर से अपने स्तनों को शोभा के चेहरे के सामने नचाकर उसे सताना शुरु कर दिया. शोभा ने गर्दन उठा उसके स्तनों को होठों से छुने की असफ़ल कोशिश की तो दीप्ति खिलखिला कर हँस पड़ी. पीछे सरकते हुये दीप्ति अब शोभा की जांघों पर बैठ गय़ी और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. दोनों हाथों से पकड़ कर पहले पेटिकोट को पैंटी की इलास्टिक तक खींचा और फ़िर पैंटी को भी पेटीकोट के साथ ही उतारने लगी. शोभा ने तुरन्त ही कमर उठा कर दोनों वस्त्रों को अपने भारी नितम्बों से नीचे सरकाने में मदद की. पैन्टी चूत के पास पूरी गीली हो चुकी थी तो उतरते समय चप्प की आवाज के साथ सरकी. अब सिर्फ़ कन्धों पर झूलते खुले हुए ब्रा और ब्लाऊज के अलावा शोभा भी पूरी तरह नन्गी थी. दीप्ति ने प्यार से शोभा की नाभी के नीचे बाल रहित चिकने त्रिकोण को निहारा. अपने घर से निकलने से पहले शोभा ने अजय से पुनर्मिलन की क्षीण सी आस में अपनी झांटे कुमार के रेजर से साफ़ कर दी थीं. दीप्ति के मुहं में ढेर सारी लार आने लगी. हाय राम ये कैसी प्रतिक्रिया है? धीरे से दीप्ति ने शोभा की एक टांग को उठा कर टेबिल पर रख दिया और दूसरी को सोफ़े पर.


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