Maa ki Chudai माँ से बढ़कर प्यारा कौन
09-16-2018, 12:14 PM, (This post was last modified: 09-16-2018, 12:16 PM by sexstories.)
#1
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Incest -माँ से बढ़कर प्यारा कौन

बंधुओ एक और रचना शुरू कर रहा हूँ ये रचना भी पारवारिक रिश्तो का ताना बाना है इस रचना में एक विधवा माँ और उसके बेटे के बीच बने अवैध रिश्ते का व्याख्यान है जो आपको पसंद आएगा जिन बंधुओ को रिश्तों मे कहानियाँ पढ़ने में अरुचि होती हो वो कृपया इस रचना को ना पढ़ें . चलिए अब ज़्यादा बोर ना करते हुए कहानी की तरफ चलते हैं
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09-16-2018, 12:14 PM,
#2
RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
दिव्या अपने लंबे लंबे काले बालों को चेहरे से हटाते हुए अपने बेटे के बेडरूम के दरवाजे की ओर गुस्साई नज़रों से देखती है.

"बॉब्बी, मैं जानती हूँ तुम वहाँ पर इस समय क्या कर रहे हो! मुझे तुम्हारी ये रोज़ाना हस्तमैथुन करने की आदत से नफ़रत है. बॉब्बी क्या तुम सुन रहे हो?

नयी नयी जवानी मे पाँव रख रहे उस के बेटे ने कोई जवाब नही दिया. बेड की पुष्ट की दीवार से टकराने की लगातार आ रही आवाज़ और उँची हो जाती है, और बॉब्बी और भी आतूरता से अपने लंड को पीटने लग जाता है. उसकी कलाई उसके मोटे, लंबे और सख़्त लंड पर उपर नीचे और भी तेज़ी से फिसलने लग जाती है.

"बॉब्बी"
दिव्या ने तेश मे आते हुए ज़ोर से अपने पावं को फरश पर पटका. वो 36 बरस की यौवन से भरपूर नारी थी. बड़ी बड़ी काली आँखे, लंबे बाल छरहरा बदन और उसपे मोटे मोटे गोल मटोल मम्मे उसके जिस्म को चार चाँद लगाते थे.

"बॉब्बी, मेरी बात को अनसुना मत करो"

बॉब्बी एक गहरी सांस लेता है और बेड की पुष्ट की दरवाजे से टकराने की आवाज़ और भी उँची हो जाती है. शायद वो स्खलन के करीब था. दिव्या गुस्से से लाल होती हुई दरवाजे से पीछे की ओर हटते हुए नीचे हाल की तरफ बढ़ जाती है. उसने एक टाइट जीन्स और नीले रंग की शर्ट पहनी है जिसमे कि उसके मोटे मम्मे बिना ब्रा के काफ़ी उछल कूद मचा रहे होते हैं. यह किसी भी घरेलू ग्रहिणी के घर पर पहनने के लिए नॉर्मल पोशाक मानी जा सकती थी मगर वो जिस हालात मे से गुज़र रही थी वो नॉर्मल नही थे.

एक तो वो तलाक़सुदा थी और उसकी नौकरी से उसे बहुत ज़्यादा सॅलरी नही मिलती थी. उसके बेटे की पढ़ाई का खर्च उसके पति द्वारा दिए गये खर्च से होता था और उसकी अपनी सॅलरी से घर का खर्च अच्छे से चल जाता था. कुल मिलाकर वो कोई रईसजादि नही थी लेकिन जीवन की सभी आवश्यक ज़रूरते पूरी हो जाती थी. उसकी खुशकिस्मती यह थी कि तलाक़ के बाद उसके पति ने घर को खुद उसके नाम कर दिया था और बेटे की पढ़ाई के खर्च की ज़िम्मेदारी भी अपने उपर ली थी ता कि तलाक़ आसानी से हो जाए. इन सब के उपर बॉब्बी की हस्तमैथुन की लत ने उसे परेशान किया हुआ था.

यह 6 महीने पहले शुरू हुआ था जब उसका नया नया तलाक़ हुआ था. बॉब्बी 18 बरस का बहुत ही सुंदर और मज़बूत कद काठी का मालिक था. उसकी जीन्स मे हर समय रहने वाले उभार को दिव्या शरम के बावज़ूद वी नज़रअंदाज़ नही कर सकती थी. दिव्या ने कहीं पर पढ़ा था कि किशोर युवकों में संभोग की बहुत ही तेज़ और ज़ोरदार चाहत होती है. मगर अपने बेटे की पॅंट में हर समय रहने वाला उभार उसके लिए अप्रत्याशित था. 


उसे लगता था कि शायद उसकी सुंदर काया उसके बेटे के हस्तमैथुन का कारण है. दिव्या की कमर ज़रूरत से कुछ ज़यादा ही पतली थी और उसकी लंबी टाँगे और उसकी वो गोल मटोल उभरी हुई गान्ड. मगर उसके जिस्म को चार चाँद लगाते थे उसके बड़े बड़े मोटे मोटे मम्मे. एसा लगता था जेसे वो कमीज़ फाड़ कर बाहर आना चाहते हों जेसे वो पुकार पुकार कर कह रहे हों आओ और हमें निचोड़ डालो. उसका जिस्म हर मर्द को अपनी ओर आकर्षित करता था और उसे डर था कि उसका अपना बेटा भी कोई अपवाद नही है. तलाक़ के बाद पिछले 6 महीनो में उसने अपने बेटे को अक्सर उसके जिस्म का आँखो से चोरी चोरी मुयायना करते हुए पकड़ा था और उसकी पैंट में उस वक्त बनने वाले तंबू को देखकर वो अक्सर काँप जाया करती थी

'कम से कम उसे खुद को रोकने की कोशिस तो करनी चाहिए' दिव्या सोचती 'या कम से कम उसे यह काम धीमे बिना किसी आवाज़ के करना चाहिए'. इस वक़्त दुपहर के साढ़े तीन बाज रहे थे और बॉब्बी को घर आए हुए अभी आधा घंटा ही हुआ था. वो घर आते ही भाग कर सीढ़ियाँ चढ़ कर सीधे उपर अपने कमरे में चला गया उसकी पैंट में सामने का उभार सॉफ दिखाई दे रहा था.


दो मिनिट बाद ही थप थप की आवाज़ आनी शुरू हो गयी. वो यह आवाज़ रोज़ाना कम से कम चार बार सुनती थी. उसने कयि बार कोशिस की बॉब्बी से इस बाबत बात करने की नर्मी से भी और सख्ताइ से भी लेकिन बॉब्बी कभी भी उसकी सुनता नही था. उसने जवाब मे सिर्फ़ इतना ही कहा था कि वो चाह कर भी खुद को रोक नही पाता जैसे ही उसका लंड खड़ा होता था उसके हाथ खुद ब खुद उसे रगड़ने के लिए उठ जाते थे.

'नहीं ऐसे नही चलेगा, उसे खुद पर संयम रखना सीखना होगा' दिव्या ने सहसा अपने ख़यालों से बाहर आते हुए खुद से कहा. वो उठकर हॉल के क्लॉज़ेट मे से बॉब्बी के कमरे की चाबी निकालती है. पक्के इरादे के साथ वो बॉब्बी के कमरे की ओर वापस बढ़ जाती है यह सोचते हुए कि आज वो अपने बेटे को रंगे हाथों पकड़ने जा रही है. किसी युवक के लिए इतना हस्तमैथुन ठीक नही था. बॉब्बी को अपनी शरीरक़ इच्छाओं को काबू में रखना सीखना होगा.
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#3
RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
दिव्या ने डोर खोला और अंदर दाखिल हो गयी. बूबी को एक लम्हे बाद एहसास हुआ कि उसकी मम्मी डोर खोल कर अंदर आ गयी है. उसे ऐसी आशा नही थी. वो हमेशा डोर लॉक करके हस्तमैथुन करता था लेकिन उसने कभी नही सोचा था कि उसकी मम्मी दूसरी चाबी से लॉक खोल सकती है. जैसी दिव्या को आशा थी, वो पीठ के बल लेटा हुआ था और उसकी पॅंट बेड के पास नीचे पड़ी हुई थी. बेबी आयिल की एक बोतल बेड के पास रखे नाइट्स्टेंड के उपर खुली पड़ी थी. बॉब्बी अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए अपनी कलाई को अपने लंड पर उपर नीचे करते हुए और भी तेज़ी से चलाने लगता है. 

दिव्या अपने बेटे के लंड को निगाह भर कर देखती है. यह पहली बार था कि वो अपने बेटे के पूर्ण रूप से विक्षित खड़े लंड को उसके असली रूप मे देख रही थी. उसकी कल्पना के अनुसार उसके बेटे के लंड का साइज़ छोटा होना चाहिए था यदि वो पूर्ण रूप से वयस्क था. 

मगर उसने पहली नज़र मे ही जान लिया कि उसकी कल्पना ग़लत थी. बॉब्बी का लंड बहुत बड़ा था. घूंघराली झान्टो के बीच मे खड़े उस मोटे सख़्त लंड की लंबाई कम से कम 9 इंच थी और उसकी मोटाई उसकी कलाई के बारोबार थी. लंड का सुपाडा किसी छोटे सेब जितना मोटा था और गहरे लाल रंग की गहराई लिए हुए था उसके मुँह से रस बाहर आ रहा था. उसी पल तलाक़ शुदा सेक्स की प्यासी कुंठित माँ ने अपनी चूत में एक नयी तड़प महसूस की.

उसने कभी सपने में भी नही सोचा था कि अपने बेटे का सख़्त लंड देखकर उसकी चूत इतनी गीली और गरम हो जाएगी.

" ऑल राइट. बॉब्बी. मैं कहती हूँ इसी पल रुक जाओ"

बॉब्बी सर उठाता है और ऐसे दिखावा करता है जैसे उसे अपनी मम्मी के अंदर आने का अभी पता चला हो. वो एक गहरी सांस लेता है और अपने लंड से हाथ हटाकर अपने सर के पीछे बाँध लेता है. वो अपने लंड को छुपाने की कोई कोशिस नही करता है. उसका विकराल लंड भयंकर तरीके से झटके मार रहा होता है. दिव्या अपने बेटे के पास बेड के किनारे बैठ जाती है और प्रयत्न करती है कि वो उसके लंड की ओर ना देखे. हू महसूस करती है कि उसके निपल्स कड़े हो रहे हैं और शर्ट के उपर से नज़र आ रहे हैं. वो मन ही मन सोचती है कि काश उसने ब्रा पहनी होती तो उसके स्तन उसके बेटे के सामने इस तरह झूला नही झूलते.

"मोम मुझे आपसे इस तरह की उम्मीद नही थी" बॉब्बी भूंभुनाते हुए बोलता है "क्या मुझे थोड़ी सी भी प्राइवसी नही मिल सकती"

"तुम अच्छी तरह जानते हो मैने कुछ समय पहले तुम्हारे डोर पर दस्तक दी थी. मेरे ख़याल से इतना प्रयत्न काफ़ी है मेरे द्वारा चाबी यूज़ करने के लिए. तुम जानते हो ये एसा गंभीर मुद्दा है जिसपर हमें बात करने की सख़्त ज़रूरत है. इन दिनो तुम सिर्फ़ हस्तमैथुन मे ही व्यस्त रहते हो. यह सही नही है. तुम कभी भी सामान्य तोर पर विकास नही कर सकोगे अगर तुम अपना सारा समय इस तरह हस्तमैथुन करते हुए बर्बाद करोगे"

"मैं खुद को विवश महसूस करता हूँ मोम. जैसे ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है मेरे हाथ खुद ब खुद उसे रगड़ने के लिए उठ जाते है. आख़िर इसमे ग़लत क्या है" उसने बिना किसी शरम के लंड शब्द का इस्तेमाल किया था. दिव्या उसकी बेशर्मी पर हैरान हो जाती है मगर अपने अंदर एक अजीब सी सिहरन महसूस करती है.

"क्या तुम अपने स्कूल मे किसी हमउम्र लड़की को नही जानते जो तुम्हारे साथ...." दिव्या शरम से लाल हो जाती है ये सोचते हुए कि वो उसे किसी जवान लड़की को चोदने के लिए बोल रही है. "...जो तुम्हे सामान्य तरीके को समझने मे मदद कर सके"

"मम्मी तुम्हारा मतलब अगर किसी लड़की की चुदाई करने से है तो मोम मैं ना जाने कितनी लड़कियों को चोद चुका हूँ. लड़कियाँ मेरे इस मोटे लंड पे मरती हैं. अगर तुम आग्या दो तो मैं कल एक लड़की लाकर यहीं पर चोद सकता हूँ. मुझे बस हस्तमैथुन करने में हद से ज़यादा मज़ा आता है, इसलिए मैं खुद को रोक नही पाता" दिव्या ने महसूस कर लिया था कि उसका बेटा उसके सामने शरम नही करेगा. उसे खुद की स्थिति बहुत दयनीय लगी, एक तरफ़ तो उसे अपने बेटे से एसी खुली बाते करते हुए अत्यंत शरम महसूस हो रही थी मगर उसका मातृधरम उसे मजबूर कर रहा था कि वो उससे बातचीत करके कोई हल निकाले ऑर दूसरा उसे अपनी चूत मे सुरसूराहट बढ़ती हुई महसूस हो रही थी.

"तुम कम से कम अपनी पॅंट तो वापिस पहन सकते हो जब तुम्हारी माँ तुमसे बात कर रही है. तुम कितने बेशर्म हो गये हो"

"मोम, आप मुझसे बात करना चाहती थी. मैं अब और नही रुक सकता. मेरे टटटे वीर्य से भरे हुए हैं मुझे अपना रस बाहर निकालना है"

उसके बाद उस भारी भरकम लंड के मालिक उसके बेटे ने अपनी मम्मी को फिर से चोंका दिया जब उसने अपना हाथ लंड पर फेरते हुए उसे मजबूती से थाम लिया. असचर्यचकित दिव्या चाह कर भी खुद को अपने बेटे के विशाल लंड को घूर्ने से रोक ना सकी जब बॉब्बी फिर से अपने लंड को धीमे मगर कठोरता से पीटने लग जाता है. बॉब्बी के मुख से कराहने की आवाज़ें निकलने लगती हैं जब उसकी कलाई उसके कुदरती तोर पर बड़े लंड पर उपर नीचे होने लगती है.
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#4
RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
"बॉब्बी! बॉब्बी, भगवान के लिए!" तेज गुस्से और प्रबल कामुकता से अभिभूत दिव्या अपने बेटे पर चकित रह जाती है. "तुम्हारी.... तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अपनी माँ के सामने एसा नीच कार्य करने की. तुम अपने लंड से अपना हाथ इसी पल हटाओ वरना..." दिव्या गुस्से मे सीधे लंड शब्द का इस्तेमाल कर गयी लेकिन उसकी हालत एसी थी कि उसे इसकी कोई परवाह नही थी.

"मुझे इतना मज़ा आ रहा है मम्मी के अब मुजसे अब रुका नही जाएगा"

और फिर बॉब्बी ने पूरी बेशर्मी से अपनी नज़रें अपनी मम्मी के मम्मों पर गढ़ा दी, उसके मूह से आह निकलती है जब वो अपनी मम्मी के मोटे गुदाज मम्मों को उसकी शर्ट के नीचे हिलते हुए देखता है. 

"माँ! वाकई मे तुम्हारे बहुत बड़े हैं मम्मे. कभी कभी मैं मूठ मारते हुए उन्हे चूसने के बारे मे सोचता हूँ. मगर मूठ मारते हुए उन्हे अपनी आँखो के सामने देखना कहीं ज़यादा बेहतर है"

"बॉब्बी!"

दिव्या अपने बेटे की बातों से इतना स्तब्ध रह जाती है कि वो निस्चय कर लेती है कि उसे अपने बेटे को इसी पल उसका लंड रगड़ने से रोकना है. वो अपना हाथ नीचे उसके लंड की ओर बढ़ाती है इस इरादे के साथ कि वो उसकी उंगलियों को खींच कर उसके लंड से अलग कर देगी. मगर उसी समय बॉब्बी जिसने देख लिया था कि उसकी मम्मी का इरादा क्या है, चालाकी से अपने हाथ को एकदम से हटा देता है और अगले ही पल दिव्या को महसूस होता है कि उसके हाथ मे उसके बेटे का विकराल लंड समा चुका है.

"ओह मम्मी! तुम्हारे हाथ का स्पर्श कितना मजेदार है. तुम अपने हाथ से इसे क्यों नही रगड़ती"

"बदतमीज़! बेशरम!"

और फिर दिव्या वाकई मे अपने बेटे की इच्छा अनुसार उसके लंड को सहलाने लग जाती है. उसे समझ मे नही आ रहा था कि उसे क्या हो गया है. क्यों वो अपने बेटे के साथ दुनिया का शायद सबसे बड़ा गुनाह करने को इतना उत्सुक थी. अत्यधिक कामोत्तेजना मे उसकी फुददी कामरस से भीग कर उसकी कच्छि में कांप रही थी. वो खुद को गुस्से, निराशा और एक अनियंत्रित कामुकता से अभिभूत महसूस कर रही थी.

अपनी कम-लोलुप मम्मी के हॅंड-जॉब के आगे पूरी तरह समर्पण कर बॉब्बी वहाँ पर लेटे हुए मुस्करा रहा था. दिव्या अब अपने बेटे के लंड को खुल्लम्खुल्ला निहार रही थी. और मुँह बनाकर अपना हाथ उसके विकराल लंड पर जितनी तेज़ी से वो कर सकती थी, उपर नीचे कर रही थी.

"क्या तुम्हे ये अच्छा लग रहा है? बॉब्बी, क्या तुम यही चाहते थे कि मैं तुम्हारे साथ एसा करूँ? तुम्हारी अपनी सग़ी माँ? क्या तुम सचमुच में इतने नीचे गिर चुके हो, इतने बेशरम हो गये हो, तुम यही चाहते हो कि मैं तुम्हारी मम्मी तुम्हारे इस मोटे लंबे लंड को अपने हाथों में लेकर मूठ मारे?"

"क्या तुम मम्मी को अपना लंड भी चुसवाना चाहते हो? तुम्हे बहुत अच्छा लगेगा, है ना? तुम्हे कितना मज़ा आएगा अगर तुम्हारी अपनी मम्मी तुम्हारे लंड को मुँह मे लेकर चूसे और तुम्हारा सारा रस पी जाए!"

बॉब्बी जवाब में उसका हाथ अपने लंड से हटा देता है, झूलते हुए उठता है और बेड के किनारे पर बैठ जाता है. वो अपनी मम्मी की ओर देखते हुए दाँत निकलता है और फिर घमंड से अपने तगड़े लंड की ओर इशारा करता है.

"हाँ, यही तो मैं चाहता था, हमेशा से. मम्मी तुम घुटनो के बल हो जाओ. मेरे लौडे को इस समय एक जोरदार चुसाइ की ज़रूरत है"

"बॉब्बी तुम एक बहुत ही गंदे बेशरम लड़के हो..."

और फिर दिव्या के मुँह से अल्फ़ाज़ निकलने बंद हो गये, वो वोही करने जा रही थी जैसा उसके बेटे ने उनुरोध किया था. बॉब्बी के सामने घुटनो पर होते हुए उसने उस विशाल और कड़े लंड को अपनी आँखों के सामने पाया. दिव्या ने महसूस किया कि वो बहुत गहरी साँसे ले रही है कि वो अपनी दिल की धड़कन को अपनी छाती से कहीं ज़यादा अपनी चूत मे महसूस कर रही थी.

उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो सारा नियनतरण खो बैठी हो जैसे अब उसके लिए इस बात में अंतर करना नामुमकिन था कि वो क्या कर रही थी और क्या करने का सोच कर वहाँ आई थी. उसे खुद पर विश्वास नही हो रहा था कि वो अपने बेटे के लंड को अपने मुँह मे डाल कर उसका उगलने वाले रस को पीने जा रही है
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09-16-2018, 12:14 PM,
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RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
दिव्या ने अपनी उंगलियाँ उस फडफडा रहे लंड के गिर्द कठोरता से कसते हुए अपनी कलाई उसकी जड तक ले गयी. वो कुछ पलों के लिए गुलाबी रंगत लिए उस फूले हुए सुपाडे की ओर देखती है कि कैसे वो मोटा मुकुट चिपचिपे रस से चमक रहा है. उसकी आँखों में एक इरादे की झलक थी. फिर वो चंचल और अनियंत्रित माँ अपने सिर को नीचे की ओर लाती है और अपने होंठ उसके सुपाडे से सटा देती है. बेशरमी से वो अपनी जिव्हा बाहर निकालते हुए सिहरन से कांप रहे लंड के सुपाडे से गाढ़ा रस चाट लेती है.

"आहह! मम्मी मैं तुम्हे बता नही सकता मुझे कैसा महसूस हो रहा है. मैं सोच भी नही था कि इसमे इतना मज़ा आएगा" बॉब्बी अपनी मम्मी के सिर को दोनो हाथों से थामे हुए कांप सा जाता है. "इसे अपने मुँह मे डालो मम्मी! चूसो इसे! हाए मम्मी, अच्छे से चूसो!"

दिव्या ने अपनी आँखे बंद कर ली, वो अपने दिमाग़ मे गूँज रही उस आवाज़ को बंद कर देना चाहती थी जो उसे बता रही थी कि वो अब एसी माँ बन गयी है जो अपने ही बेटे का लंड मुँह मे लेकर चुस्ती है. धीरे धीरे उसके होंठ अपने बेटे के लंड की कोमल त्वचा पर फिसलने लगे. एक एक इंच कर सुड़कते हुए वो उस विशालकाय धड़कते लंड को मुँह मे भरती जा रही थी. जब एक तिहाई लंड उस कामुक माँ के मुँह मे समा जाता है तो वो गहरी साँस लेते हुए रुक जाती है. अगर वो इससे ज़्यादा लंड को अपने मुँह में लेने की कोशिश करती तो उसका गला रुंध जाता या उसकी साँस ही बंद हो जाती.

उसके बाद कामोत्तेजित माँ अपने बेटे के लंड को अत्यधिक कड़ाई से चूसना चालू कर देती है.आँखे बंद रखते हुए वो संतुष्टिपूर्वक उसके आकड़े हुए लंड को चुस्ती है. वो अपने दिमाग़ मे एक बेतुके/निरर्थक विचार से उस गुनाह को न्यायसंगत/उचित ठहरा रही थी जो अपने सगे बेटे के साथ वो कर रही थी. इस विचार के तहत कि वो अपने बेटे के सामने साबित कर रही थी कि उसे कितना घिनोना और बुरा महसूस होगा अगर वो अपनी ही मम्मी को अपना लंड 
चुस्वाएगा.

दिव्या ने ज़ोर लगाते हुए, पूरा ज़ोर लगाते उस लंड को चूसा.उसे इस बात से झटका लगता है कि वो कितनी तत्परता से अपने ही बच्चे के लंड को सुड़कते हुए चूस रही थी. वो अपने मुख को बलपूर्वक उस लंड की जड़ों तक पहुँचाने की कोशिस करती है. बुरी तरह से खाँसते हुए वो पूर्ण आत्मबल से पूरे लंड को एक ही बार में निगलने की कोशिस करती है.इतनी देर से चल रही उस कठोर ऑर गीली चुसाइ का असर उस लंड पर अब दिखाई दे रहा था, 

वो बढ़ते हुए और भी बड़ा और कठोर हो गया था. बेटे के लंड का सुपाडा असलीलतापूर्वक घमंड से अपनी मम्मी के गले की गहराई मे चोट मार रहा था.

"उमल्ल्लप्प्प"दिव्या के मुख से निकलने वाली संतुष्टिपूर्वक लंड चुसाइ की अति कामुक और सुड़कने की आवाज़ें बहुत ज़यादा उँची हो चुकी थी और पूरे बेडरूम मे गूँज रही थी. ऊत्तेजनापूर्वक अपने सिर को उपर नीचे करते हुए वो अपने बेटे के विकराल लंड को अपने मुँह से चोदना चालू कर देती है. उसकी उंगलियाँ उसके लौडे की जड़ पर कस जाती हैं. फिर वो तन्मयता के साथ सुपाडा चूस्ते हुए लंड को मुठियाने लग जाती है. 

कुकरमुत्ते जैसे सुपाडे पर उसकी जिव्हा गोल गोल घुमाते हुए उसे थूक से चिपर्ते हुए नमकीन रस को चाटती है जो उस विशाल आकड़े लंड के टपक रहा होता है. 

"मम्मी, मैं जल्द ही...आ..सखलित होने वाला हूँ" बॉब्बी कराहता है "उंगग्घ! मम्मी मुझे एहसास हो रहा है! मेरे टटटे भारी माल से पूरी तरह भर गये हैं, चूसो इसे, मेरे लंड को ज़ोर से चूसो मम्मी! तुम वाकई मे ग़ज़ब का लंड चुस्ती हो!"

बेटे की वो शर्मनाक, घृणित टिप्पंनी सुन कर दिव्या के कानो मे रस घुल जाता है. उसकी चेहरा लाल हो जाता है और वो जितनी कठोरता से उस लंड को चूस सकती थी चूसना चालू कर देती है. कामरस से भरे उस लंड के उसके मुँह मे होने के कारण उसके गाल शीघ्रता से फूलते और सिकुड़ते हैं. वो बेताबी थी एक बहुत भारी फुआरे के फूटने के लिए. उसके मन मे एक नयी इच्छा ने जनम लिया था कि उसका बेटा उसे उसका पूरा वीर्य निगलने के लिए बाधित कर दे.

"पी जाओ इसे मम्मी! मैं आ रहा हूँ, आ रहा हूँ!"

वो उचक कर उसका सिर पकड़ लेता है और धक्का मारकर चोदते हुए अपने लंड को एक इंच और उसके होंटो के अंदर पहुँचा देता है. धक्के के कारण वो बेड से नीचे उतर जाता है. दिव्या की साँस रुक जाती है मगर आख़िरकार उसकी इतनी जबरदस्त, कामुक लंड चुसाइ की मेहनत का फल उसे मिला था. 

लंड के सूजे हुए सुपाडे से वीर्य की एक असीम बौछार फूटी है जो उस कमरस की प्यासी उस माँ के गले की गहराई मे थरथराहट से चोट करती है.


"उम्म्मल्ल्लप्प्प्प" दिव्या के मुख से गलल गलल की आवाज़ आती है.

लंड उसके मुँह मे रस उगलने लगता है, उसके गले में रस की तेज़ तेज़ धाराएँ फूटती हैं जो गले मे नीचे की ओर बहने लगता है. उत्तेजनावश वो उस विशाल गाढ़ा रस फेंक रहे लंड से चिपक जाती है. उसे अपने नवयुवक बेटे के वीर्य का स्वाद अत्यधिक स्वादिष्ट लगता है. कामोत्तेजित माँ पूरी बेशरमी से लंड को चूसने का, मुठियाने का और उसका रस पीने का तीनो काम एक साथ सुरू कर देती है. वो अपने बच्चे के लौडे को तब तक छोड़ना नही चाहती थी जब तक कि वो उससे निकलने वाले नमकीन रस की आख़िरी बूँद तक ना पी जाए.

तकरीबन आधे मिनिट बाद वीर्य का विस्फोट रुक जाता है और पतली सी कमर की उस अत्यधिक सुंदर माँ को पेट लंडरस से पूरा भरा हुआ महसूस होता है जिसकी उसने मन ही मन मे लालसा पाल रखी थी. वो अपने सिर को अपने बेटे के लंड से उपर उठाती है. स्तब्ध और अप्र्त्याशित उत्तेजना मे वो अपनी जिव्हा को मुँह के चारों और घुमा कर बाकी की क्रीम भी चाट लेती है. दिव्या की साँसे बहुह्त भारी हो गयी थीं और उसकी चूत इतनी गीली थी कि उसकी कच्छि आमने से पूरी तरह गीली हो गयी थी.
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09-16-2018, 12:14 PM,
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RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
बॉब्बी का लंड अभी भी बहुत कड़ा था और उसकी मम्मी के मुख के आगे फडफडा रहा था. दिव्या ने जब कल्पना की कि उसके बेटे का विकराल, मोटा, चूत खुश कर देने वाला लौडा, उसकी चूत में गहराई तक घुस कर, अंदर बाहर होते हुए, कैसे उसकी चूत की खुदाई करेगा तो उसने अपनी चूत में ऐंठन महसूस की.

"वेल! मुझे उम्मीद है बेटा कि अब तुम पूरी तरह से संतुष्ट हो गये होगे" दिव्या हान्फते हुए बोलती है. "तुम वास्तव में मम्मी से अपना विशाल लंड चुसवाने में कामयाब हो गये. मेरा अनुमान है अब तुम अपनी मम्मी के साथ और गंदे काम करने की तम्मनाए भी कर रहे होगे' 



बॉब्बी दाँत निकालते हुए हां में सिर हिलाता है. दिव्या अपने पावं पे खड़ी होती है. उसके हाथ अपनी शर्ट के बटनों को बेढंग तरीके से टटोलते हैं क्योंकि उसकी आँखे तो अपने बेटे के विशालकाय लंड पे जमी हुई थी वो चाह कर भी उससे नज़रें नही हटा पा रही थी. 

"तो फिर मेरे ख़याल से अच्छा होगा अगर तुम अपने बाकी के कपड़े भी उतार दो. बॉब्बी अब जब हम ने सुरुआत कर ही ली है तो यही अच्छा होगा कि तुम्हारे दिमाग़ से यह घृणित हसरतें हमेशा हमेशा के लिए निकाल दी जाएँ.

बॉब्बी बेशर्मी से हंसता है और अपने शूस उतार कर, अपनी पैंट भी उतार देता है जो उसके घुटनो में इतनी देर से फँसी हुई थी. अब उसके जिस्म पर केवल एक कमीज़ बची थी. उसकी नज़र में मम्मी की जोरदार ठुकाई करने के लिए उसे अपनी कमीज़ उतारने की कोई ज़रूरत नही थी, एसी ठुकाई जिसकी शायद उसकी मम्मी तलबगार थी. वो नीचे फर्श पर बैठ जाता है और अपनी मम्मी को कपड़े उतारते हुए देखता है. दिव्या के गाल शरम से लाल हो जाते हैं जब वो अपनी कमीज़ उतार कर उपने उन मोटे मोटे गोल मटोल मम्मों को नंगा कर देती है. वो मम्मे जिन पर उसे हमेशा गुमान था और हो भी क्यों ना, इस उमर में भी उसके मम्मे किसी नवयुवती की तरह पूरे कसावट लिए हुए थे. पूरी तरह तने हुए मम्मे जो बाहर से जितने मुलायम और कोमल महसूस होते थे दबाकर मसलने पर उतने ही कठोर लगते थे. दूधिया रंगत लिए हुए मम्मों का शृंगार थे गहरे लाल रंग के चुचक जो इस वक़्त तन कर पूरी तरह से उभरे हुए थे. मम्मी की पतली और नाज़ुक कमर के उपर झूलते हुए वो विशालकाय मम्मे किसी अखंड ब्रह्मचारी का ब्रह्म्चर्य भंग करने के लिए काफ़ी थे. 

"तुम्हारे चेहरे के हावभाव को देखकर लगता है तुम्हे अपनी मम्मी के मोटे मम्मे भा गये हैं, बॉब्बी मैं सच कह रही हूँ ना? दिव्या बेशरमी से अपने बेटे को छेड़ती है. उसके हाथ अपनी पतली कमर पे थिरकते हुए उपर की ओर बढ़ते हैं और वो अपने विशाल, गद्देदार मम्मों को हाथों में क़ैद करते हुए उन्हे कामुकतापूर्वक मसल्ति है. दिव्या अपने पावं को हिलाते हुए अपनी उँची ऐडी की सॅंडेल्ज़ निकाल देती है. फिर उसकी जीन्स का नंबर आता है. काम-लोलुप मम्मी अपने काँपते हाथों से जीन्स का बटन खोलती है और फिर उसे भी अपने जिस्म से अलग कर देती है. एक काले रंग की कच्छि के अलावा पूरी नग्न माँ अपने बेटे के पास बेड पर बैठ जाती है

"बॉब्बी आगे बढ़ो, अब तुम अपनी मम्मी के मम्मों को चूस सकते हो. मेरा अनुमान है तुम मूठ मारते हुए इन्हे चूसने की कल्पना ज़रूर करते होगे."

अपनी मम्मी की बात के जवाब में बॉब्बी सहमति के अंदाज़ में सिर हिलाता है. फिर वो अपनी मम्मी के सामने घुटनो के बल होते हुए उसके विशाल और कड़े मम्मों को हाथों में भर लेता है. चुचकों पर अंगूठे रगड़ते हुए वो किसी भूखे की तरह उन जबरदस्त मम्मों को निचोड़ने और गुंथने लग जाता है. मम्मों के मसलवाने का आनंद सीधा दिव्या की चूत पर असर करता है और उसके जिस्म मे एक कंपकपि सी दौड़ जाती है. 

"तुम _ तुम चाहो तो उनको चूस सकते हो, अगर तुम्हारा मन करता है तो..." दिव्या काँपते हुए लहज़े मे बोलती है.

बॉब्बी अपनी मम्मी के जिस्म पर पसरते हुए मुँह खोल कर एक तने हुए चुचक को अपने होंठो मे भर लेता है. कामुकतापूर्वक वो अपने गालों को सिकोडता हुआ अपनी मम्मी के विशाल मम्मे को सडॅक सुड़ाक कर चूस्ता है. ठीक उसी प्रकार जैसे कभी वो बचपन में मम्मी का दूध पीते हुए करता था. दिव्या ऋण ऋण करती है., उसकी चूत की प्यास हर बीतते पल के साथ बढ़ती जा रही थी. वो अपने प्यारे बेटे के सिर को कोमलता से सहलाते हुए उसे अपने मम्मे चूसने के लिए उकसाती है जो उसके बेटे को पसंद भी था.

"तुम _ तुम मेरी चूत को अब छू सकते हो." दिव्या फुसफुसाते हुए बोलती है. "मेरा ख़याल है तुम वो भी ज़रूर करना चाहते हो"

बॉब्बी अपना हाथ नीचे सरकाता हुआ अपनी मम्मी जाँघो के दरम्यान ले जाता है और अपनी उंगली उसकी चूत पर कच्छि के उपर से दबाता है. वो अचानक मम्मे को चूसना बंद कर देता है, चेहरे पर विजयी भाव लिए हुए वो उसकी आँखो में झाँकता है. 

"हाए मम्मी! तुम्हारी चूत तो एकदम गीली हो गयी है"

दिव्या लज्ज्जातरन हो जाती है. वो यह तो जानती थी कि उसकी फुददी गीली है, मगर यह नही जानती थी कि इतनी गीली है कि उसकी जांघे भीतर से, उसकी चूत से रिसने वाले तैल के कारण पूरी तरह चिकनी हो गयी थी और सामने से कच्छि उसकी गीली चूत से बुरी तरह से चिपकी हुई थी. उसका बेटा कच्छि को पकड़ता है और उसे खींच कर उसके जिस्म से अलग कर देता है. अब उसकी मम्मी उसके सामने पूरी तरह से नंगी पड़ी थी. बॉब्बी माँ की जाँघो को फैलाते हुए उसकी गीली और फडफडा रही स्पन्दन्शील चूत को निहारता है.

बॉब्बी प्रत्याशित रूप से अपनी माँ की मलाईदर चूत देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है.

"बेटा तुम मेरी ओर इस तरह किस लिए देख रहे हो?" दिव्या हाँफती हुए बोलती है. "तुम अपने इस मूसल लंड को सीधे मेरी चूत में क्यों नही घुसेड देते? मैं जानती हूँ तुम्हारे मन की यही लालसा है भले ही मैं तुम्हारी सग़ी माँ हूँ?"

"नही मैं पहले इसे चाटना चाहता हूँ." बॉब्बी बुदबुदाता है.

बॉब्बी अपनी मम्मी की लंबी टाँगो के बीच में पसरते हुए उसकी जाँघो को उपर उठाता है ताकि उसका मुँह माँ की फूली हुई गीली और धढकती हुई चूत तक आसानी से पहुँच जाए. दिव्या को एक मिनिट के बाद जाकर कहीं समझ में आता है कि उसका अपना बेटा उसकी चूत चूसना चाहता है. और जब उसके बेटे की जिव्हा कमरस से लबालब भरी हुई उसकी चूत की सुगंधित परतों पर पहला दबाव देती है तो उसका जिस्म थर्रा उठता है. उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं और वो मदहोशी में अपने होन्ट काटती है. 


"उंगघ! ही....बॉब्बी! तुम _ तुम ये क्या कर रहे हो बेटा? उंगघ! उंगघ!"

मगर बॉब्बी चूत चूसने में इतना व्यसत था कि उसने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया. स्पष्ट था कि उसे अपनी मम्मी की चूत का ज़ायक़ा बहुत स्वादिष्ट लगा था, अपनी जिव्हा को रस से चमक रही गुलाबी चूत में उपर नीचे करने में उसे बड़ा मज़ा आ रहा था. दिव्या ने तुरंत ही अपने मन में एक डर महसूस किया कि मालूम नही वो अपने बेटे के सामने अब कैसे वर्ताव करेगी. वो अपने बेटे द्वारा चूत चूसे जाने से पहले ही बहुत ज़यादा कामोत्तेजित थी. और जब उसके बेटे ने मात्र अपनी जिव्हा के इस्तेमाल से ही उसकी कुलबुला रही चूत को और भी गीला कर दिया था, उसकी खुजली में और भी इज़ाफ़ा कर दिया था तो आगे चलकर उसकी क्या हालत होगी? उसे यह बात सोचते हुए भी डर लग रहा था कि कहीं वो मदहोशी में अपनी सूदबुध ना खो बैठे और बेटे के सामने एक रांड़ की तरह वार्ताव ना करने लग जाए.

"नही, बेटा! तुम्हे __उंगघ__ तुम्हे मम्मी की चूत चूसने की कोई ज़रूरत नही है. उंगघ! बस अपनी मम्मी को चोद डालो, बेटा. में जानती हूँ तुम सिर्फ़ यही चाहते हो!"
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09-16-2018, 12:15 PM,
#7
RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
बॉब्बी कोई जवाब नही देता है. उसकी उंगलियाँ चूत के होंठो को फैलाए रखती हैं ताके वो अपनी जिव्हा अपनी माँ के गीले और सुंगंधित छेद में पूरी गहराई तक ठेल सके. चूत की गहराई से गाढ़े मलाईदर रस का बहना लगातार जारी था, और चूत का दाना सूज़ कर और भी मोटा हो गया था जो रोयेन्दार चूत की लकीर के उपर उभरा हुआ दिखाई दे रहा था.

बॉब्बी अपनी जिव्हा को चूत के उपर की ओर घुमाता है. वो चूत चूसने के कौशल मे अपनी प्रवीनता उस समय साबित कर देता है जब वो अपनी जीभ अपनी मम्मी की चूत के दाने पर एक तरफ़ से दूरी तरफ तक कोमलता से रगड़ता है. निर्वस्त्र माँ सीत्कार करते हुए बेटे के सिर को दोनो हाथों में थाम लेती है. और फिर वो अविलंब अपने नितंब बेड से उपर हवा में उच्छलते हुए अति शीघ्रता से अपने बेटे का मुँह अपनी गीली फुददी से छोड़ने लगती है. 

"हाई, बेटा!!" दिव्या भर्राए गले से बोलती है. "उंगघ! मम्मी को चूसो बेटा! मम्मी को बुरी तरह से चूस डालो! उंगघ! मम्मी के दाने को चाटो! चूसो इसे! अच्छे से चूसो! अपनी मम्मी को सखलित कर दो मेरे लाल."


बॉब्बी चूत को चूमते हुए उसकी चुसाइ चालू रखता है, केवल तभी विराम लगाता है जब वो अपना चेहरा मम्मी की घनी, सुनेहरी रंग की घुँगराली झान्टो पर रगड़ता है. अब वो अपनी उंगलियाँ सीधी करता है और उन्हे अपनी माँ की चूत के संकिरण और बुरी तरह से चिपके अन्द्रुनि मार्ग पर धकेल्ता है. दिव्या के जिस्म में कंपकंपी दौड़ जाती है जब उसका बेटा उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को मुँह में भरकर चूस्ता है. 

"हाई...हाई...बॉब्बी! चूस इसे! ही..मेरी मिन्नत है बेटा..!" 

बॉब्बी दाने को होंठो में दबाए हुए उसे कोमलता से चूस्ता है मगर जिव्हा को उस पर कठोरता से रगड़ते हुए, और साथ ही साथ शीघ्रता से उसकी फुददी में अपनी उंगलियाँ अंदर धकेल्ता है. दिव्या अपने भीतर गहराई में रस उमड़ता हुआ महसूस करती है जिसके कारण उसके चुचकों और गुदाद्वार में सिहरन सी दौड़ जाती है और सखलनपूर्व होने वाले एहसास से उसके जिस्म में आनंदमयी खलबली मच जाती है. और फिर वो जिस्म ऐंठते हुए अनियंत्रित ढंग से सखलित होने लगती है जब उसका अपना सगा बेटा उसकी चूत को चूस रहा होता है.

"चूस इसे बेटा ज़ोर से चूस! उंगघ! चाट इसको, अपनी मम्मी की चूत चाट! में झड रही हूँ बेटा, मैं झड रही हूँ!"

दिव्या की तड़पति चूत संकुचित होते हुए इतना रस उगलती है कि उसका लाड़ला दिल खोल कर चूतरस को चूस और चाट सकता था. बॉब्बी मम्मी के दाने को लगातार चूस्ते हुए और उसकी चूत में उंगली करते हुए उसे सखलन के शिखर तक ले जाता है. लगभग एक मिनिट बीत जाने पर चूत का संकुचित होना कम होता है. तब तक दिव्या को अपनी फुद्दि के भीतर गहराई में एक एसी तडपा देने वाली कमी महसूस होने लग जाती है जैसी उसने आज तक महसूस नही की थी. वो चाहती थी कि उसका बेटा जितना जल्दी हो सके उसकी चूत में अपना लंड घुसेड दे, वो अपने बेटे के मोटे मांसल लौडे से अपनी चूत ठुकवाने के लिए मरी जा रही थी. 

"तुम _ तुम अब अपनी मम्मी को चोद सकते हो बेटा. में जानती हूँ असलियत में तुम यही चाहते हो, है ना? आगे बढ़ो, बेटा. इसे मेरी चूत मे घुसेड डालो! जल्दी बेटा जल्दी!"


बॉब्बी अपनी मम्मी की जाँघो के बीच रेंगते हुए उस के उपर चढ़ जाता है. उसका विकराल लंड रस टपकाते हुए उसके पेट पर ठोकर मार रहा था. दिव्या अधिरता पूर्वक अपना हाथ नीचे लाती है और अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसके सुपाडे को अपनी चूत के द्वार से भिड़ा देती है. दिव्या अपना निचला होंठ दांतो में दबाए हुए रीरियाती जब उसे अपने बेटे का मांसल लौडा उसकी चूत को भेदते हुए अंदर दाखिल होता महसूस होता है. उसकी चूत के मोटे होंठ बेटे के आक्रमणकारी लंड की मोटाई के कारण बुरी तरह से फैल कर उसको कसकर जकड लेते हैं. 

"उबगघ! हाई,बॉब्बी तेरा वाकई में बहुत बड़ा है! तुम इसे वाकई में मेरे अंदर ठूँसने जा रहे हो, है ना? उंगघ! आगे बढ़ो मेरे लाल और ठूंस दो इसे अपनी मम्मी की चूत मे! जल्दी, जल्दी!"

बॉब्बी अपनी जांघे चौड़ी कर लेता है ताकि उसके कूल्हे चूत में लौडा ठोकने के लिए सबसे बढ़िया स्थिति में हो. और फिर वो अपने लौडे को धीरे धीरे आगे पीछे करते हुए धक्के लगाना चालू कर देता है. हर धक्के के साथ वो अपना लंड अपनी माँ की चूत में गहरा और गहरा करता जाता है. दिव्या अपना सिर उपर उठाते हुए नीचे की ओर देखती है कि कैसे उसके बेटे का लंड जिस पर नसे उभर आई थीं, उसकी संकरी चूत में आगे पीछे हो रहा था. चूत लंड के मिलन का यह नज़ारा देखने में बड़ा ख़तनाक मगर साथ ही साथ बेहद रोमांचित कर देने वाला भी था. दिव्या गान्ड हवा में उछालते हुए अपनी तड़पति चूत अपने बेटे के मोटे लौडे पर धकेल्ति है. 

"बॉब्बी तुम _ तुम मुझे गहराई तक चोद सकते हो." वो हाँफते हुए बोलती है "आगे बढ़ो बेटा और अपनी मम्मी की चूत जितना गहराई तक हो सके चोदो!"


बॉब्बी और भी कठोरता से धक्के लगाना चालू कर देता है. वो वाकई में अपना विशाल लंड माँ की संकीर्ण, काँपति चूत में इतने बल पूर्वक ठोकता है कि दिव्या का जिस्म कांप उठता है. आख़िरकार वो अपना संपूर्ण लंड अपनी मम्मी की चूत में डालने में सफल हो जाता है. दिव्या ने पूरी जिंदगी में, खुद को किसी कठोर लौडे द्वारा इतना भरा हुआ कभी महसूस नही किया था.

उसकी चूत बुरी तरह ऐंठने लगती है और उस विशाल लंड को, जो उसकी बच्चेदानी के अंदर ठोकर मार रहा था, को चारों और से भींचते हुए चूस्ति है. मम्मी की चूत में अपना पूरा लंड ठोक कर बॉब्बी कुछ पलों के लिए स्थिर हो जाता है. वो अपनी कोहनियों को मोडते हुए अपनी माँ के जिस्म पर पसर जाता है. दिव्या के मोटे स्तन अपने बेटे की चौड़ी छाती के नीचे दब जाते हैं. 

"चोद अपनी माँ को, बॉब्बी! माँ की चूत ठोक दे!"
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09-16-2018, 12:15 PM,
#8
RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
अनैतिक वयाभिचार की उसकी कामना और भी प्रबलता से स्पष्ट हो जाती है, दिव्या ने अपनी टांगे उपर की और जितना उठा सकती है, उठाती है और फिर अपनी पिंदलियाँ अपने बेटे की पीठ पर बाँध देती है. और फिर वो व्यग्रता से अपने कूल्हे हिलाते हुए अपनी गीली और कसी चूत से अपने बेटे के लंड को किसी कामोत्तेजित रंडी की तरह चोदना चालू कर देती है.

"मैने कहा चोद मुझे! मम्मी अब बहुत चुदासी है बेटा! मुझे अब बस चोद डाल, ठोक दे मेरी!" 

बॉब्बी लंड बाहर निकालता है, तब तक बाहर खींचता है जब तक सिर्फ़ लंड का गीला और फूला हुआ सुपाडा उसकी माँ की फुददी के होंठो के बीच रह जाता है. वो पूरे ज़ोर से अपने कूल्हे नीचे की ओर लाते हुए एक जोरदार घस्सा मारता है और उसका विकराल लंड उसकी माँ की चूत में जड़ तक घुस जाता है. अपनी माँ की चूत में लगाया ये पहला घस्सा उसे ऐसा आनंद देता है कि उसका पूरा जिस्म काँप जाता है. तब तक दिव्या किसी बरसों की प्यासी, अतिकामुक औरत की तरह अपनी गान्ड उछालते हुए चुदवाने लगती है. जब वो अपनी चूत अपने बेटे के लंड पर मारती है तो उसके मोटे स्तन कंपन करते हुए बुरी तरह से उछलते हैं. बॉब्बी अपनी मम्मी की ताल से ताल मिलाते हुए अपना लौडा उसकी मखमली चिकनी चूत में पूरी गहराई तक पेलता है. 

"ऐसे ही, हाँ ऐसे ही चोद माँ को मेरे लाल! हाई मे मारियीयियी! उंगघ, और ज़ोर लगा बेटा, मम्मी की चूत जितने ज़ोर से चोद सकता है, चोद!" दिव्या अपनी बाहें उसके कंधो के गिर्द लपेटते हुए उसे ज़ोर से गले लगा लेती है. गहरी साँसे लेते हुए उसका कराहना अब चीखने में बदल जाता है, जब वो अपनी चूत से उसके लंड को ज़ोर से भींचती है "चोद बेटा, चोद अपनी मम्मी को" 

बॉब्बी अपनी माँ के कंधे पर सिर रखकर एक गहरी साँस लेता है, और फिर अपने जिस्म की पूरी ताक़त लगाते हुए अपनी माँ की चुदाई करने लगता है. उसके कूल्हे अति व्यग्रता से अपनी माँ की जाँघो में उपर नीचे होते हैं, वो हुंकार भरते हुए अपने भाले नुमा लौडे को मम्मी की मलाईदार चूत में पेलता है. आतिशीघ्र दिव्या को अपने अंदर फिर से रस उमड़ता महसूस होता है और लौडे से पूरी भारी पड़ी उसकी प्यारी चूत बुरी तरह संकुचित होते हुए बेटे के लंड को और भी कस लेती है.

"में फिर से झड़ने वाली हूँ बेटा! चोद माँ को! मार मेरी चूत! उंगघ! है में आ रही हूँ बेटा!"

उसकी चूत मंत्रमुग्ध कर देने वाले सखलन के सुखद अहसास से फॅट पड़ती है और उससे चुदाई का गाढ़ा रस बहकर बाहर आने लगता है. चूत की सन्करि गुलाबी दीवारें बेटे के उस भयंकर लंड को कसते हुए उसे भींचती हैं. बॉब्बी अपना पूरा लंड मम्मी की चूत में जड़ तक पेलते हुए उसपर ढेर हो जाता है. और उसके लंड से दूसरी बार गाढ़ा रस फुट पड़ता है. दिव्या अपनी चूत की गहराई में वीर्य की भारी बौछार गिरती हुई महसूस करती है और उसकी चूत गरम और गाढ़े रस से लबालब भर जाती है. 

कामोत्तेजित माँ अपनी चूत की मांसपेशियों को बेटे के लंड पर ढीला छोड़ते हुए, उसे अपने टट्टों में भरे हुए रस का भंडार अपनी फुददी में खाली करने में मदद करती है.लेकिन वो अपने मन में अभी से अपराध बोध, शर्म और घृणा लौटते हुए महसूस कर रही थी कि उसने खुद पर नियंत्रण की बजाए अपने बेटे से अपनी चूत मारने की उत्कट इच्छा के आगे घुटने टेक दिए थे. 'यह पहली और आख़िरी बार था' वो अपने मन में सोचती है. वो इस तरह खुद के साथ जिंदगी नही जी सकती थी कि जब भी उसके बेटे का लंड खड़ा होगा तो वो उसे चूस कर या अपनी चूत मे लेकर शांत करेगी. 'नही में दोबारा एसा हरगिज़ नही होने दूँगी' वो सोचती है

दोपहर की उस जोरदार चुदाई के बाद उस दिन दिव्या ने अपने बेटे को दोबारा चुदाई से सॉफ तोर पर मना कर दिया, हालाँकि बॉब्बी ने पूरी कोशिश की कि वो हमेशा सख़्त रहने वाले अपने लंड को अपनी माँ की चूत की गहराइयों मे फिर से उतार सके. दिव्या के लिए भी उसे मना करना आसान नही था. उसने रात का ज़्यादातर वक्त अपनी चूत में उंगली करते हुए गुज़रा. बंद दरवाजे के पीछे वो अपनी गीली चूत को बुरी तरह रगड़ते हुए उस दोपहर के जबरदस्त मज़े के बारे में सोच रही थी जो उसे उसके बेटे के मोटे लंड से चुदकर मिला था.

अगली सुबह बॉब्बी नाश्ता करने के लिए जब नीचे आता है तो उसके तन पर एक भी कपड़ा नही होता है. उसका लंड पूरा अकड़ा हुआ था और उसकी टिप से रस बाहर आ रहा था. बॉब्बी पूरी कोशिश करता है फिर से अपनी माँ को चोदने की, जब दिव्या उसे खाना परोसती है तो वो उसके जिस्म से छेड़छाड़ करता है. उसके मम्मे और उसकी गान्ड दबाता है, कुर्सी पर अपनी टांगे चौड़ी करके वो दिव्या को अपने उस भयंकर लंड के दर्शन करवाता है, मगर उसकी कोशिश सफल नही हो पाती और दिव्या चुदवाने से पूरी तरह मना कर देती है.


मगर बॉब्बी की उस छेड़छाड़ और उस मोटे तगडे लंड को देख कर उसकी काम वासना फिर से भड़क उठती है और वो फिर से अपने कमरे में जाकर एक घंटे तक अपनी चूत रगड़ती है. वो जानती है कि उसकी इतनी मेहनत उसके खुद और उसके बेटे के लिए अच्छी है. पिछली दोपहर को अपने सगे बेटे के साथ उसने जो चुसाइ और चुदाई का जबरदस्त कार्यक्रम किया था वो किसी भी हालत में दोहराया नही जा सकता था. भला एसी कोन्सि माँ होगी जो अपनी कोख से जन्मे बेटे के लिए अपनी टांगे चौड़ी कर अपनी चूत उसके सामने खोल देगी. 


बूबी के कॉलेज चले जाने के बाद वो घर का बाकी का काम काज निपटाती है और फिर तय्यार होकर घरेलू खरीददारी के लिए बाज़ार चली जाती है. जब वो खरीददारी करके घर लौटती है तो घर में घुसते ही उसे बेहद उत्तेजित सिसकियों और चीखने की की आवाज़ें सुनाई पड़ती है. दिव्या को अपने कानो पर विस्वास नही होता मगर उसकी चूत उन आवाज़ों को सुन कर गीली होने लगती है. तब उसे अपने बेटे की बात याद आती है जो उसने पिछली दोपेहर को उससे बोली थी. वो अपनी बात का पक्का निकला था. वो वाकई में किसी युवती को चोदने के लिए घर ले आया था. 


"हाई, चोद मुझे बॉब्बी!" युवती की आनंदमई सिसकारी गूँजती है. आवाज़ से वो बेहद जवान जान पड़ती है. "उंघघ! बॉब्बी ज़ोर से! और ज़ोर लगा! अपने मोटे लौडे से मेरी चूत फाड़ दे!"
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09-16-2018, 12:15 PM,
#9
RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
दिव्या समान को रसोई के काउंटर पर रख देती है. उसके जिस्म में कंपकंपी हो रही होती है. वो सीढ़ियाँ चढ़ कर उपर जाती है और दिमाग़ में कल्पना करती है कैसे उसके बेटे का मोटा लंड किसी जवान रंडी चूत ठोक रहा होगा. 


जैसे जैसे वो सीढ़ियाँ चढ़ती हैं सिसकियों की आवाज़ उँची होने लगती है. उसके बेटे के शयनकक्ष का दरवाजा पूरा खुला था. दिव्या खुद को अंदर झाँकने से मना करती है, कि अगर उसने अंदर झाँक लिया तो उसके बेटे और उस लड़की की चुदाई का दृश्य उसे फिर कामुकता के शिखर पर पहुँचा देगा यहाँ पर उसको खुद पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा. मगर दिव्या खुद पर काबू नही रख पाती. वो दरवाजे के सामने खड़ी होकर अंदर झाँकति है.

लड़की वाकई में बेहद जवान थी. वो बॉब्बी के उपर चढ़ि हुई थी जो कि उस समय अपने हाथ सर के पीछे बाँधे हुए उस लड़की की ओर देख कर मुस्करा रहा था. लड़की की छोटी सी गोल गान्ड थी जिसे वो आगे पीछे घूमते हुए अपनी गीली चूत से बॉब्बी का लंड चोद रही थी.

"हाई! बॉब्बी में छूटने वाली हूँ" लड़की कराहती है. वो बॉब्बी के कंधो को कस कर पकड़ लेती है और अपनी चूत पूरे ज़ोर से बॉब्बी के लौडे पर पटकती है. "चोद बॉब्बी, चोद मुझे. हाई तुम्हारा लौडा कितना मोटा है. ज़ोर से मार मेरी चूत, फाड दे आज इसको!"


"अभी इसी वक़्त मेरे घर से निकल जाओ, फॉरन!" दिव्या फुफ्कार्ती है.

"ओह, शिट!" लड़की का घबराया हुआ स्वर सुनाई देता है जब वो दिव्या को वहाँ पर खड़ा देखती है. 

लड़की बेड से कूद कर नीचे उतर जाती है. लंड के चूत से एक झटके में बाहर आने के कारण 'फ़च्छ' की एक जोरदार आवाज़ सुनाई पड़ती है. दिव्या उसकी और कहर भारी निगाहों से देखती है. तीस सेकेंड के वर्ल्ड रेकॉर्ड में वो लड़की कपड़े पहन कर घर से बाहर भाग जाती है. 

दिव्या अब अपने बेटे के साथ उस घर में फिर से अकेली थी. वो बेड के किनारे खड़ी होकर गहरी साँसे लेते हुए उसके लंड को घुरती है.

"इस सब का क्या मतलब है" 

"मेरा लंड कल रात से खड़ा था, और में बहुत ज़यादा उत्तेजित था. मुझसे नियंत्रण नही हुआ" बॉब्बी दाँत निकालते हुए कंधे उचकाता है. "मेने तुम्हे बताया था में किसी लड़की को घर ला सकता हूँ चोदने के लिए. अब जब तुमने चुदवाने से मना कर दिया है तो में किसी ना किसी को तो चोदुन्गा ही"

"तुम बेहद बेशर्म और घटिया हो!" दिव्या फुफ्कार्ती है. "वो इतनी कम उमर की लड़की और तुम उसे इस तरह अपने रूम का दरवाजा खुला छोड़ कर चोद रहे थे. तुममे ज़रा भी शरम नही बची. तुम अपने इस मोटे लंड के सिवाय और कुछ भी नही सोच सकते" 

"नही! और असलियत में अभी इसी वक़्त अपने लंड के बारे में ही सोच रहा हूँ. मम्मी तुम मुझे फिर से अपनी कसी चूत क्यों नही मरवाती. उस लड़की की बजाय मुझे तुम्हारी चूत मारने में ज़यादा मज़ा आता है."

"तुम बेहद घटिया हो"

"अर्रे मम्मी अब छोड़ो भी ना."

वो बेड से उठता है और अपनी माँ की ओर बढ़ता है जो मन ही मन में चुदवाने के लिए बेहद उतावली थी. उसका लंड पूरी बेशर्मी से झटके खा रहा होता है. दिव्या बिना हीले डुले चुपचाप वहीं खड़ी रहती है. वो चाहती तो वहाँ से जा सकती थी और या उस पर चिल्ला सकती थी. मगर बॉब्बी के उस तगडे लौडे को उस लड़की की चूत ठोकते हुए देखकर उसकी चूत बुरी तरह से फडफडा रही थी. वो आती उत्तेजना की अवस्था में थी और उसकी चूत से रस निकाल कर उसकी कच्छि को भिगो रहा था. दिव्या को वाकई में एक जबरदस्त चुदाई की आवश्यकता थी.

'अपने हाथ हटाओ" वो धीरे से फुसफुसाती है
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09-16-2018, 12:15 PM,
#10
RE: Desi Chudai Kahani मेरी बीबी और जिम ट्रेनर
मगर वो चाहती नही थी कि बॉब्बी वाकई में अपने हाथ उसके जिस्म से हटा ले और ये बात दोनो समझते थे. बॉब्बी उसे बेड पर ले आता है और उसे पीठ के बल लिटा देता है. अपनी माँ को लिटाकर वो उसके कपड़े उतारना चालू कर देता है. जब वो अपनी माँ की अंगिया खींच कर निकालता है तो दिव्या के मोटे मम्मे उछल कर सामने आ जाते हैं. उसके निपल उत्तेजना के कारण कड़े हो गये थे, नज़ारा वाकई में ललचा देने वाला था.बॉब्बी अपना मुँह नीचे कर मम्मी के उन गुलाबी निपल्स को मुँह में भर लेता है और उन पर अपनी खुरदरी जीभ रगड़ते हुए उन्हे ज़ोर से चूस्ता है. 

उसके बाद वो अपनी माँ की सॅंडल निकाल देता है और उसके बाद पेटिकोट और फिर अंत उसकी काम रस से भीगी हुई कच्छि. अब कामोत्तेजित माँ अपने बेटे के सामने पूरी नंगी पड़ी थी. बॉब्बी अपनी मम्मी की टाँगो के बीच आ जाता है.

मम्मी अपनी टाँगे उपर उठाओ"

"नही बेटा! तुम जानते हो यह पाप है. मैं तुमसे नही चुदवा सकती"

"मेने कहा अपनी टाँगे उपर उठाओ" 

"ओह ...बॉब्बी.."

उसके बाद काम वासना में जल रही वो माँ वैसा ही करती गई जैसा उसके बेटे ने उसे बोला था. वो अपने घुटनो को पकड़ कर अपने कंधो से उँचा उठा देती है और फिर उन्हे विपरीत दिशाओं में फैलाते हुए अपनी गीली चूत अपने बेटे के हमले के लिए पूरी तरह खोल देती है. बॉब्बी मुस्कराता हुआ अपनी मम्मी के उपर चढ़ जाता है. वो अपने लंड का सुपाडा माँ की चूत के होंटो में लगा देता है

`"मेरे टटटे वीर्य से भरे पड़े हैं. मेरा बस छूटने ही वाला था जब तुमने आकर चुदाई रोक दी.हाए मम्मी आज तो तुम्हारी चूत में पूरी तरह से भर दूँगा"

दिव्या कोई जवाब नही देती है. वो तो अपना सिर उठाए नीचे देखने में व्यस्त थी कि कैसे उसके बेटे का विकराल लंड उसकी चूत में धंसता जा रहा था. अति कठोर लंड उसकी चूत को बुरी तरह से फैला रहा था और चूत की भीतरी दीवारें लंड के चारों और कस्ति जा रही थीं.

"हाई में मरी! कितना मोटा है तेरा! लगता है मेरी चूत चीर ही देगा"

वो पूरे दिन इसी की कल्पना में खोई रही थी, केसे उसके बेटे का लंड उसकी चूत, उसकी अपनी सग़ी माँ की चूत में ठुकाई करेगा, वो चूत जिसने उसे जनम दिया था. और अब वो फिर से पूरी तरह उसकी चूत की गहराई में उतार चुका था. पूरी बेशर्मी से वो मादरजात नंगी माँ अपने कूल्हे उछालते हुए अपनी गीली चूत अपने बेटे के लौडे पर पटकती है. 

"हाई मेरे लाल घुसेड दे पूरा!" वो सिसकारी लेते हुए बोलती है "हाई बहुत अच्छा लग रहा है. हां बेटा मम्मी को फिर से चोदने का समय आ गया है. उंगूंघ! चोद मुझे मेरे लाल! चोद दे अपनी मम्मी को."

दिव्या अपनी टांगे और उपर उठाते हुए अपने टखने उसके कंधो पर लपेट देती है जिस कारण उसकी चूत और भी खुल कर अपने बेटे के लंड की उस असीमित लंबाई को लीलने लग जाती है. बॉब्बी अपने घुटने बेड पर टिकाता है और अपनी माँ के उपर झूलते हुए अपना पूरा वजन अपनी बाहों पर डाल देता है. उसके बाद वो पूरे ज़ोर से अपना लंड माँ की कसी हुई चूत के अंदर बाहर करते हुए उसकी ठुकाई चालू कर देता है.

चोद मुझे! मार मेरी चूत!" दिव्या कराहती है. वो अपने बेटे की ताल से ताल मिलाते हुए अपनी गान्ड उछालती है. उसके हर धक्के के साथ दिव्या के मोटे स्तन उछलने लग जाते हैं. "उंगूंघ! हाई भगवान.... बस ऐसे ही... ऐसे ही चोद मुझे. हाई बेटा तेरा लंड वाकई में बहुत बड़ा है. कितना मज़ा है तेरे मोटे लंड से चुदवाने में. तेरी मम्मी को जबरदस्त चुदाई की ज़रूरत है. और ज़ोर लगा...और ज़ोर से धक्का मार मेरे लाल! मम्मी की चूत मार मार कर मेरी एसी हालत कर दे कि चलने के काबिल भी ना रहूं"

बॉब्बी अति उत्तेजना मे बस कराहता है. एक तो उसकी माँ पूरी बेशर्मी से अश्लील भाषा का उपयोग करते हुए उसे उकसा रही थी और उपर से उसकी सिल्क जैसी मुलायम चूत उसके लौडे को बुरी तरह से कस कर निचोड़ रही थी. ऐसा नामुमकिन जान पड़ता था कि उसने कभी किसी बच्चे को जनम भी दिया होगा. उसकी माँ की चूत उस लड़की की चूत से कहीं अधिक संकरी थी जिसे वो अभी कुछ देर पहले चोद रहा था. 

अब उसका लंड माँ की मलाईदार चूत की जड तक घुस रहा था. दिव्या भी अपने बेटे के लंड की लंबाई, मोटाई से अभिभूत थी जो उसकी चूत की परतें खोलते हुए बच्चेदानि की जड तक पहुँच रहा था. अपनी गान्ड हवा में उछालते हुए वो पूरा बल प्रयोग करते हुए अपने भाले नुमा लंड से अपनी मम्मी की चूत भेद रहा था. 

"मम्मी तुम्हे मज़ा आ रहा है जैसे मैं तुम्हे चोद रहा हूँ? जैसे मेरा लौडा तेरी टाइट फुद्दि को फाड़ रहा है. बोलो माँ? तुम चाहती हो मैं और बलपूर्वक तुम्हे चोदु?"

"हां, बेटा हन्न!" दिव्या चिल्लाती है! वो वासना के उन्माद में अपने कूल्हे व्यग्रता से उच्छालती है ताकि अपने बेटे के उस विकराल लंड को पूरी गहराई तक अंदर ले सके. "चोद अपनी माँ को बेटा! और ज़ोर लगा... आयार ज़ोर लगा! पूरे ज़ोर से मार अपनी मम्मी की रसीली चूत. हाए मैं जल्द ही स्खलित होने वाली हूँ"

बॉब्बी अपनी मम्मी के उपर लेट जाता है जिस से उसके मोटे स्तन उसकी छाती के नीचे दब जाते हैं. फिर वो उसके कंधे थाम कर पूरी तेज़ी से उसे चोदता है. वो विशालकाय लंड अंदर बाहर होते हुए चूत की खुदाई करता है. दिव्या अपने हाथों को बेटे की गर्दन पर लपेट कर उसे ज़ोर से भींचती है और नीचे से अपनी गान्ड घुमा घुमा कर लंड को चूत में घोंटति है. उसके होंठ खुले हुए थे और चेहरा पैशाचनिक वासना के कारण चमक रहा था, वो अपना सिर एक तरफ से दूरी तरफ पटकती है.. अपनी कोख से जन्मे बेटे का लंड अपनी चूत मे डलवाकर उसे ऐसा आनंद मिल रहा था कि वो उन्माद में पागल हुए जा रही थी.


"मैं छूटने वाली हूँ!" वो सिसकरती है और फिर लगभग चिल्ला पड़ती है "ज़ोर से, बॉब्बी! उंगूंघ! और ज़ोर से चोद अपनी माँ को. मार मेरी चूत मेरे लाल! हाई मैं गयी! अहह!" 

उसकी चूत तेज़ी से ऐंठने लग जाती है, संकुचित होते हुए लंड को चुस्ती है, भींचती है और उसका काम रस बॉब्बी के लंड को भिगोनो लग जाता है. बॉब्बी पूरे ज़ोर से धक्के लगाना चालू रखता है पूरी निर्दयता से अपने लंड को मम्मी की चूत में ठोकता है. 

आख़िरकार एक मिनिट तक चलने वाले उस जबरदस्त स्खलन के बाद दिव्या शांत हो जाती है. मगर बॉब्बी अभी भी उसकी चूत में अपना लौडा पूरे ज़ोर से ठोक रहा था. वो अभी स्खलित नही हुआ था, उसने खुद पर नियंत्रण करते हुए अभी तक खुद को माँ की चूत को अपने वीर्य से भरने से रोका हुआ था. फिर चार पाँच धक्को के बाद बॉब्बी भी अपना वीर्य अपनी माँ की चूत में छोड़ देता है . बंधुओ इस तरह दोनो माँ बेटे कामवासना के सागर में गोते लगाते हुए अपने हाथ पैर चलाते हुए कामरूपी सागर में डूबते चले जाते है और अब उनका ये संबंध नियमित और दैनिक रूप से चल रहा है तो बंधुओ इस रचना को यहीं विराम देता हूँ . अगर समय मिला तो आपके लिए और एक रचना लेकर उपस्थित हो जाउन्गा तब तक के लिए अलविदा 


समाप्त
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