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मज़ेदार अदला-बदली
07-19-2017, 09:50 AM,
#1
मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--1


रोमा: और कितनी देर लगेगी रवि, देखो मैं तुमसे पहले तैयार हो गई हूँ.
रवि: बस दो मिनट और, अभी आया.

दोनों की शादी को दो साल हो चुके थे. बहुत खुले विचारो वाले थे दोनों और वैसा ही उनका ग्रुप था. उस ग्रुप में दस कपल हो चुके थे अब तक. सभी के सभी बेहद अमीर और हाई-प्रोफाइल . आज उसी ग्रुप की आउटिंग, इंदौर से पच्चीस किलोमीटर दूर खंडवा रोड पर, ग्रुप के ही एक मेम्बर रोनी के चार एकड़ के फ़ार्म-हाउस पर रखी गई थी और रोमा को वहां पहुँचाने की रवि से भी ज्यादा जल्दी थी.

रोमा सोफे की पुश्त पर टिक कर आने वाले अगले दो दिनों के बारे में सोचने लगी. जबसे उसने उन दो दिनों में क्या क्या होने वाला है इसके बारे में सुना है, उसकी योनी में लगातार बाड़ बनी हुई है, अभी अभी उसने नई पेंटी पहनी थी और अब फिर वो पूरी गीली हो चुकी है. उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ रही थी. अचानक रवि की आवाज़ से उसका ध्यान भंग हुआ.

दोनों तैयार होकर अपनी होंडा अकॉर्ड से अपने गंतव्य की और प्रस्थान कर गए.
रोमा: रवि, मैं परेशान हो चुकी हूँ, मेरी चूत का झरना रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है, पिछले एक घंटे में तीन पेंटी बदल चुकी हूँ, और फिर से ये गीली हो गई है.
रवि: जानू, जरा सब्र से काम ले, अब दो दिन तेरी चूत इतनी झड़ने वाली है क़ि तेरा सारा पानी ख़तम हो जायेगा. मनोज का दिमाग, मानना पड़ेगा, कितनी जोरदार प्लानिंग की है इस बार. इस तरह की ओरजी तो कोई पोर्न मूवी में भी कभी नहीं देखी है. पता नहीं मेरे लंड का क्या हाल होने वाला है.

बस आने वाले वक़्त क़ि बातें करते करते वो फ़ार्म हाउस पर आ पहुंचे.
बड़ा सा मेन गेट. रोनी ने मोनिटर पे कार को रुकते ही पहचान लिया और रिमोट कंट्रोल से गेट को खोल दिया. रवि कार को बीचो बीच बने बड़े से बंगले के अहाते क़ि और चला कर ले आया जहाँ पर रोनी क़ि खूबसूरत पत्नी मेरी उनके स्वागत के लिए खड़ी थी. कार के रुकते ही रोमा बहार आई और बहुत ही जोर से मेरी के गले लग गई. दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थी. रवि रोमा सबसे पहले पहुंचे थे. कार को पार्क करके रवि भी बड़े से हाल में पहुँच गया.

अगले एक घंटे में सभी सदस्य उस बड़े से हाल मैं इकट्ठे हो गए. सभी कपल करीने से सजी कुर्सियों पर बैठ गए. मनोज और उसकी पत्नी alka इस बार की party के sanyojak थे. दोनों uth khade huwe.
मनोज: aap सभी का स्वागत है. aap सभी के chehre बता रहे हैं क़ि आप सब कितने उत्सुक है आने वाले समय को लुत्फ़ उठाने के लिए. और आपके उन पलों में हजार हजार चाँद लगाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. हम सभी आपस में पहले भी बहुत बार एकसाथ चुदाई कर चुके हैं परन्तु इस बार ये बहुत ही अलग सेशन होने वाला है जिसके बारे में आप सभी जानते ही हैं. ज्यादा वक़्त बर्बाद न करते हुवे हम अपने पहले दौर में प्रवेश करते हैं. और पहला दौर है क़ि "अपनी पत्नी के गालों को पहचानो". मनोज ने सभी नौ जेंट्स क़ि आँखों पर काली पट्टियाँ बाँध दी और कुर्सियों पर लाइन से बैठा दिया. अब सभी लेड़ीस बारी बारी से अपने गाल एक एक मर्द के होंटो से सटाएगी और मर्द उस पर जोरदार चुम्मा देगा और फिर कोनसे नंबर वाली लेडी उसकी बीवी है ये एक स्कोर शीट पर अंकित करेगा.

अब यहाँ से आगे की कहानी रवि अपनी जबानी सुनाएगा .............
मेरा नुम्बर दूसरा है.....तभी पहले चुम्मे की आवाज़ आती है, फिर कुछ पल बाद मुझे अपने होंटों पर एक बेहद मुलायम गाल की अनुभूति होती है, पता नहीं चल रहा रोमा का है या किसी और का. मैं उसे बड़े ही चाव से चूमने लगता हूँ. अपनी जीभ से थोडा सा चाट ता भी हूँ, मस्त मस्त खुशबू का अहसास हो रहा था. पहले चुम्मे में ही मेरा लंड अकड़ने लगा है. अभी तो ये शुरुवात है और मैंने अपने लंड को दिलासा दिलाया. तभी पहला गाल हटा और दूसरा गाल आकर मेरे होंटों से सट जाता है.... ये एकदम चिकना गाल है में उसे चूसना और चूमना चालू करता हूँ. ये तो रोमा का गाल नहीं हो सकता है इतना चिकना नहीं है. एक एक करके सभी महिलाएं गालों पर चुम्मा लेने आती है.......मैं अपने अंदाज़ से रोमा का नुम्बर अंकित करता हूँ. मनोज को ये बात पता है की सब अपने अपने साथी के शरीर की खुशबू से अच्छी तरेह से वाकिफ है इसलिए शुरुवात में सभी जोड़ो को एक ही खुशबू का बॉडी स्प्रे अप्प्लाई किया. अब सभी की खुशबू सामान होने से अंदाज़ लगाना बड़ा ही मुश्किल हो रहा था. आँखों पर पट्टी बंधी होने की वजह से अनजाने गालों पर चुम्मा देना बहुत ही रोमांच पैदा कर रहा था.
तभी मनोज की आवाज़ गूंजती है की अब लेडिस चुम्मा देंगी और अब पट्टियां महिलाओं को बाँध दी जाती है. मेरा नुम्बर आते ही मैं मेरी के होंटों पे अपने गाल ले जाता हूँ.......वो बड़े ही मादक अंदाज़ मैं मेरे गालों को चूसने लगती हैं.....फिर दूसरा चुम्मा फिर तीसरा और अब रोमा का चुम्मा. क्या पता रोमा पहचान पायेगी की नहीं..........गेम में पॉइंट्स स्कोर करना बड़ा जरूरी है. ऐसे ही एक एक करके चुम्मो को बारिश होने लगती है........कुछ चुम्मे एक गाल पे लिए तो कुछ दुसरे गाल पर. इस तरेह पहला राउण्ड समाप्त होता है........सभी शूरूआत से काफी उत्तेजित महसूस कर रहे थे लेकिन गेम के रुल के मुताबिक अपने आपको संयम में बंधे हुवे थे. अब हम सभी एक दुसरे से बातें करने लगे थे.......
मैं: यार सलीम, जब चुच्चे पहचानने की बारी आएगी तो बड़ा मज़ा आएगा....एक के बाद एक लगातार चुच्चे मसलने को मिलेंगे........हमारे यहाँ तो हर तरह की चुच्चे हैं........
सलीम: हाँ यार रवि, पर ये तो सोच जब हमारे लंड चुसे जायेंगे एक के बाद एक........सारी की सारी रंडियां चुसुक चुसुक करके हमारे लौड़े चूसेगी......यार मेरा कहीं माल ना निकल जाये......बड़ी किरकिरी हो जाएगी........
मैं: हां, खासतौर पे रोमा जब चुसे तब ख्याल रखना.....मादरचोद रोमा का तू बहुत बड़ा दीवाना है..........तेरा बस चले तो रोमा की छूट मैं लंड डाले पड़ा रहे जिंदगी भर.......चुदक्कड़ साला....
सलीम: हे हे, तू देख रोमा के साथ इस बार क्या क्या करता हूँ गेम के बाद................

और इसी के साथ दुसरे राउण्ड की घोषणा होती है................इस राउण्ड में......................
सभी की आँखों पर पट्टियाँ बांध दी जाती है.....ये फ्रेंच किस राउण्ड है.......मैं एकदम अपने आप को काबू से बाहर पता हूँ...........अगले पांच मिनट मैं अलग अलग सुंदरियों के लगातार होंठ चूसने को मिलेंगे....ऐसा पहले कभी अनुभव नहीं किया था.....इस राउण्ड में मनोज और अलका को बहुत ज्यादा मदद करनी पड़ेगी क्योंकि किस करते वक़्त कोई भी अपने पार्टनर को छू नहीं सकता है वरना पत्नी के होंठ कोनसे हैं ये आसानी से पता चल जायेगा...........तो हम सब मर्द लाइन में खड़े हो गए और शायद पहले मनोज एक भाभी को पकड़ के पहले मेम्बर के पास ले गया लिप टू लिप चुम्मे के लिए....दूसरी को अलका मदद कर रही थी.......अचानक मेरे सर पर किसी का हाथ आता है और वो सर को आगे की दिशा मैं धकेलता है.....और अचानक मेरे होंठ एक बेहद नाज़ुक होंठो से जुड़ जाते हैं .....मेरे दोनों हाथ पीछे हैं......मैं उन नर्म और मुलायम लबों को चुसना चालू करता हूँ.....बेहद उत्तेजना महसूस होने लगती है .....अब मेरी जीभ उसके मुंह में प्रवेश करती है तो वो भी अपनी जीभ को बाहर लाती है और फिर दोनों एक दुसरे की जीभ को बुरी तरह से चूसने लगते हैं........तभी सामने से मेरी पार्टनर को हटा दिया जाता है ......और फिर तुरंत ही एक नाज़ुक हाथ मेरे गालों को खींचता है और एक और नए लिप्स पर मेरे लिप्स टिक जाते हैं.......इस बार एक नयी और ताज़ा खुशबू का अहसास होता है.....मैं फिर पूरी तन्मयता से उन होंठो को चूमने लगता हूँ........बड़ा ही मज़ा आ रहा था..........ऐसे ही एक एक करके हर बार नए होंठो का रसपान ......जब लास्ट पार्टनर का नुम्बर आया तब तक मेरा लंड बहुत ही बेकाबू होने लगा था.......जेसे ही चूमा चाटी शुरू हुई मुझे एकदम लगा कि साली को कस के दबोच लूं और निचे पटक के ठोक दूं........और अपने आप ही मेरे दोनों हाथ उसकी तरफ पकड़ने को उध्यत होने लगे........परन्तु छूने से ठीक पहले किसी ने मेरे दोनों हाथो को पकड़ के जोर से बोला .............ऐ मिस्टर, गेम से आउट होना है क्या........अपने लंड को समझाओ कि आराम आराम से गेम खेले...........क्या तुम्हे पता नहीं कि कितने शानदार इनाम रखे गए हैं ............और अचानक मेरे हाथों को ब्रेक लगा और मैंने फिर से अपने हाथ पीछे खिंच लिए................. अलका के याद दिलाते ही मैंने मन को समझाया गेम में बने रहो.......और फिर उन अंतिम होंठो को चूसने में खो गया............जेसे ही चुम्बन ख़तम हुआ मैंने अलका के कान में संभावित नुम्बर बताया जो मेरी पत्नी के होंठ हो सकते थे.....उसने नुम्बर शीट में अंकित किया और मैंने अपनी पट्टी खोल दी.......रोमा इस वक़्त सलीम के होंठो को चूसने में तन्मय थी........मैं उनके नज़दीक आ गया और नज़ारा देखने लगा.........सलीम बड़ा ही उन्मत्त होकर मेरी बीवी के होंठो से रसपान कर रहा था.........शायद उसे रोमा के होंठो का अहसास हो गया था.......उसने करीब करीब अपना पूरा मुंह रोमा के मुंह मैं घुसा दिया था...लग रहा था कि रोमा को सांस लेने में कुछ तकलीफ होने लगी थी.....पर तभी मनोज ने रोमा के दोनों चुच्चों को पकड़ा और धकेल कर अगले सदस्य के होंठो से जोड़ दिए.......अच्छा.....ये मादरचोद मनोज इस तरह से सहायता कर रहा है..........मैंने देखा वो रोमा के ठीक पीछे एकदम चिपक के खड़ा है.....उसका लंड ठीक गांड के ऊपर टिका हुआ है और दोनों हाथ अभी भी रोमा के दोनों कबूतरों पर हौले हौले मचल रहे हैं........मैंने कुछ और चुम्बन रत जोड़ों पर निगाह डाली बड़ा ही शानदार नज़ारा था.............अनजान का चुम्बन ज्यादा उत्तेजना देता है और उसी के वशीभूत हमारे सभी दोस्तों कि हालत दुसरे दौर में ही ख़राब होने लगी..............मेरा लंड बहुत ज्यादा फट पड़ने की स्थिति में आ चूका था............मैंने देखा मेरी अब फ्री हो चुकी थी और अपनी पट्टी खोल रही थी........मैं भाग कर उसकी और पहुंचा और उसे दबोच लिया .......और उसके अंगो का मर्दन करने लगा.....चूँकि बोलने कि इज़ाज़त नहीं थी इसलिए वो मुझे धक्के देकर दूर हटाने लगी परन्तु मैंने उसे उठा लिया और थोड़ी दूर सजे दस शयन शैया वाले सेक्शन की ओर ले जाने लगा और फिर एक बिस्तर पर उसे पटक दिया और मैं भी उसके ऊपर लगभग कूद पड़ा.....अब मैंने अपने दोनों हाथों और पैरों से लगभग पूरा दबा दिया और अपने होंठों से उसके होंठ दबा दिए ....वो गूं गूं करके छटपटाने लगी..........मैं अपने शरीर को उसके शरीर पर बुरी तरह से मसलने लगा............तभी राउण्ड पूरा हो गया और कुछ दोस्तों का ध्यान हमारी तरफ गया...........जेसे ही उन्हें माज़रा समझ में आया कुछ लोग हमारी और आये और हमें अलग किया.........जेसे ही सबको देखा मुझे एकदम होश आया.........साडी महिलाएं मेरी बेसब्री को देख कर हंसने लगी और तरह तरह के कमेंट्स आने लगे.....अलका और मनोज मेरे पास आये कि क्या मैं गेम को छोड़ना चाहता हूँ तो फिर अभी सारी लेडिस मिलकर तुम्हारे लंड का कीमा बना देगी............बोलो क्या करना है...........रोमा मेरे पास आई .....रवि, हमें गेम के आखिर तक रहना है ........जरा अपने पर काबू करो............जेकपोट नहीं जीतना है क्या.................अब तक मैं काफी हद तक नोर्मल हो चूका था...........मैं वाटर कुलेर कि और बड़ा और ठंडा पानी पीकर एक कुर्सी पर बैठ गया.................मैंने देखा कि बाकि सभी मर्दों कि हालत भी मेरे जेसी ही हो रही थी.....परन्तु सभी जेसे तेरे अपने पर काबू किये हुवे थे.........अब में थोड़े तनाव में था कि यही हाल रहे तो आखिर तक टिके रहना बड़ा मुश्किल हो जायेगा........चलो देखते हैं क्या होता है.....ये सोचकर मैं फिर से सभी कि ओर बड़ चला.......


मुझे अपनी ओर आता देख रोमा मेरे पास आती है और बड़े प्यार से मेरे दोनों गालों को अपने हाथों से सहलाने लगती है.
फिर मुझे अपने गले से लगा लेती है.
शायद वो मुझे थोडा प्यार देकर मेरी उत्तेजना को कम करने का प्रयास कर रही थी.
तभी मेरे कंधे पर मनोज ने थपथपाया.
मनोज: क्या हो गया था रवि.
मैं: कुछ नहीं यार, बस एकदम बहक गया था.
मनोज: समझ सकता हूँ.......बल्कि मुझे ख़ुशी है कि मेरी गेम प्लान इतनी तेजी से सभी के लौड़ो में आग लगा रही है.
मैं: यार इस तरह से कैसे आगे बढेंगे. उत्तेजना तो संभाले नहीं संभल रही है.
मनोज: कुछ सोचना पड़ेगा.....बाकि के भी यही हाल है.....
मैं: हाँ यार कुछ सोचो.....और जल्दी ही सोचो.....वरना अब तो हालात ऐसे हो रहे हैं कि माल अब निकला के तब निकला.
मनोज: अरे औरों का तो छोड़ो......मेरा ख़ुदका लंड बहुत बेकाबू हो रहा है...........
मैं: तो चलो सब मिलकर गेम के फॉर्मेट पर पुनर्विचार करते हैं............
मनोज: चलो आओ............

तभी मनोज सबका ध्यान आकर्षित करता है और सबसे पूछता है उनसब के लौड़ो के क्या हाल है........

कोई बोले उसके पहले सलीम की बीवी हिना बीच में बोल पड़ती है.......

हिना: मनोज तुमको सिर्फ लौड़ो की ही फिकर है...........चुंतों के बारे में कोई ख्याल है कि नहीं..........
मनोज: माफ़ करना.....देवियों आपसे भी पूछता हूँ कि आपकी चूतें किस हाल में हैं कृपया बताएं..
हिना: मनोज, साले.....भेन के लवडे......हमारी चूचियां किस कदर मसली है तूने.....और अब पूछ रहा है कि हमारी चूतों से पानी रिस रहा है कि नहीं...........

हिना की बात सुनकर सब ठहाका मार कर हंसने लगे................

मनोज थोडा खिसिया गया और फिर पूरी बेशर्मी से बोलने लगा......तो आप सब बताओ कि अभी क्या करें.......
सब एक दुसरे की तरफ देखने लगे............सबके मन मैं बस एक ही ख्याल था कि एक राउण्ड चुदाई हो जाये........

रवि: मनोज, एक बार चोद लेने दे यार.........फिर इत्मीनान से गेम को आगे बढाएंगे........

और फिर क्या था.........जैसे सभी के मन की बात बोल दी हो रवि ने.............सब चिल्ला उठे कि हाँ एक राउण्ड चुदाई हो जाये..........

और इस चिल्लाहट में सबसे ज्यादा जोश महिलाओं को था.........मनोज ने चूचियां मसल मसल कर उन्हें पागल जो कर दिया था.......

और इधर अभी मनोज ने अपना अंतिम निर्णय दिया भी नहीं था कि मैंने देखा सलीम ने रोमा को दबोच लिया है और उसे उठा कर वो बिस्तर की और प्रवत्त होने लगा....

क्रमशः........................
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07-19-2017, 09:52 AM,
#2
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--2

गतांक से आगे..........................
सभी जोर जोर से हंसने लगे.........अलका दौड़ कर सलीम के पास गई और कहा - वाह रे वाह......साले अपनी मर्ज़ी का माल खायेगा......चल छोड़ उसे........कौन किसे चोदेगा...ये फैसला भी हम करेंगे...

सलीम रोमा को छोड़ देता है और अपना लंड पकड़ के वहीँ बैठ जाता है और बड़ी ललचाई नज़रों से रोमा को देखने लगता है............रोमा उसके पास ही खड़ी-खड़ी मुस्कुराने लगती है.......

अचानक रोमा को मस्ती सूझती है और वो अपनी चूत को बिलकुल सलीम के मुंह के पास ले जाती है और झुक कर झटके से अपनी साड़ी पेटीकोट समेत ऊपर कर देती है..........फिर एक हाथ से अपनी पेंटी को थोडा साइड में कर देती है............

सलीम के हाथ अपने लंड पे रहते हैं..........रोमा की गोरी और गुदाज चूत सामने देख कर वो सन्न हो जाता है.......जैसे ही वो रोमा की चूत पर झपटने कि उपक्रम करता है उसके पूर्व रोमा झट से साड़ी नीचे करके भाग जाती है.

सलीम उसके पीछे भागता है......रोमा आगे और सलीम पीछे......रोमा सभी के बीच में घुस घुस कर दौड़ लगाती है और सलीम उसके पीछे.........
रोमा हिना के पीछे छिप जाती है और जैसे ही सलीम आता है वो हिना को सलीम की और धक्का दे देती है........हिना कस के सलीम को पकड़ लेती है.......

हिना: अरे मेरे चोदू शौहर.......रोमा भी मिलेगी खाने को ....इतना बावला क्यों हो रखा है अपने को..........
ये कहकर अपने होंठ सलीम के होंठो पर टिका देती है और कस के पकड़ लेती है.............सलीम भी हिना में खो जाता है...............
सभी लोग हिना के लिए तालियाँ बजाते हैं...............
अलका: हिना बस तू ही अपने शौहर को संभल सकती है......वरना तो ये गेम के सरे रुल तोड़ देगा.......

अब मनोज और अलका दोनों थोडा अलग हो जाते हैं और विचार विमर्श करने लगते हैं..................

कुछ देर बाद मनोज अपना निर्णय सुनाता है........
मनोज: सभी के लौड़ो और चूतों के हालातों को देखते हुवे अभी एक राउण्ड चुदाई करवाए जाने का निर्णय लिया है........लेकिन वो चुदाई सेशन हम अभी आपको प्लान करके बताते हैं..............

और फिर सभी हलके नाश्ते के लिए पास ही सजी खाने कि मेज कि और बढ जाते हैं...


जब तक नाश्ते का दौर चलता है अलका और मनोज दिमाग लड़ा रहे हैं कि आपस में केसे चुदवाया जाय सबको......
अलग अलग विकल्पों पर विचार कर रहे थे.......
अंत मैं वो उठ कर सभी के पास आये....

अलका: तो तय यह हुआ है कि एक मर्द और एक लेडी का नाम लौटरी से निकला जायेगा और फिर उस मर्द को बाकी की ९ लेडिस झड्वाएगी और इसी तरेह से लेडी को बाकि सब मर्द मर्दन करेंगे....

ये सुनते है सब तालियाँ बजने लगते हैं................

लौटरी का पहला नाम पुकारा जाता है...............सागर.....
और दूसरा................अलका....

सब आश्चर्य से एक दुसरे की तरफ देखने लगते हैं...............ये तो खेल खिलाने वाले हैं...........अलका का नाम कैसे आ गया..............

अलका: क्या क्या खुसुर पुसुर हो रही है.........

और झट से अपना छोटा सा स्कर्ट ऊपर करके अपनी चड्डी सबको दिखाती है.............

अलका: ये देखो मेरी पेंटी.......पूरी कि पूरी गीली हो गई है.............लगता है जैसे अभी स्विम्मिंग पूल से निकल कर आ रही हूँ.............हमारा भी तो सोचो यार.......

प्रेम: लाओ ....लाओ... दिखा तो अलका .......
और ये कहकर प्रेम अलका कि गीली चड्डी पे झपट्टा मरता है.............
प्रेम: चलो चलो निकालो इसको..........गीली चड्डी पहनी रहोगी तो रेशेस हो जायेंगे...........
और इतना कहकर चड्डी उतरने लगता है..........
परन्तु गीली होने कि वजेह से उतरने में आसानी नहीं हो रही थी.........
प्रेम: तेरी माँ की चूत साली..............ले..........
और ये कहकर प्रेम अलका की चड्डी फाड़ देता है..........
मनोज: गांडू मेरी बीवी की चूत के सबको दर्शन करा दिए......अब देख बेटा.....
ये कहकर वो श्वेता पर झपटता है........
श्वेता को कुछ समझ आये इसके पहले ही वो टॉप को खींच कर फाड़ देता है....
श्वेता उईईईईई कहकर भागती है......
तभी कई जोड़ी मरदाना हाथ उसे थाम लेते हैं और मनोज के लिए उसे हाज़िर कर देते हैं.......
श्वेता कसमसाने लगती है............
श्वेता: नहीं मनोज..........प्लीज .....फाड़ना मत...लो मैं खुद ही नंगी हो जाती हूँ........
मनोज: नहीं दोस्तों.....इस रांड को छोडना मत........
और यह कहकर वो श्वेता को दबोच लेता है.........
और जोर से उसकी ब्रा को खींच कर अलग कर देता है..........
श्वेता: प्लीज़ ...... मेरी जींस मत फाड़ना......
मनोज इस बार जींस खोल कर उसे जोर से खींच कर निकालता है..........
और फिर उसका अन्डरवियर भी पलक झपकते ही हवा में लहराता नज़र आता है............

ये सब इतनी तेज़ी से हुआ और संयोजक ही इसमें शामिल था तो बस फिर क्या था सबके सब्र के बाँध टूट गए......
सभी एक दुसरे को नंगा करने में जुट गए............
जिसका हाथ जहाँ पहुंचा वो ही खींच खींच कर हवा में उडाया जाने लगा........
चारो और शोर मचा हुआ था........
कोई बचने के लिए उधर भागी जा रही थी तो पता चला दुसरे मर्द ने पकड़ लिया और वोही उसे नंगा करने में भिड़ गया .....
मेरी नज़रें शाहीन पर जा लगी ......
राज अभी तक शाहीन के एक भी कपड़े खींच कर निकल नहीं पाया था........
तभी राज़ ने गुस्से में शाहीन को उठाया और अपने कंधे पर लटका लिया....
अब वो बिस्तर कि और बड़ चला...........
मैं भी उसके पीछे लग गया........
राज़ ने उसे बिस्तर पर पटक दिया और लगा सलवार का नाडा खींचने......
शाहीन जोर से नाड़े कि गाँठ को दोनों हाथों से पकड़े हुई थी.............
राज़ बहुत जोर लगा रहा था और गन्दी गन्दी गलियां भी बकते जा रहा था...........
अचानक मैंने शाहीन के कुरते को फाड़ना चालू कर दिया..............
उसने मुझसे अपना कुरता बचने के चक्कर में सलवार पर से अपनी पकड़ ढीली की......
मुझसे अपना कुरता तो बचा नहीं पाई .....उधर सलवार से भी हाथ धो बैठी...........
राज़ ने सलवार का नाड़ा खीन्चा और फिर........
नीचे से चड्डी सहित सलवार हवा में ..............
ऊपर मेरे हाथों से कुरता दो खंडो में परिवर्तित ........
जैसे ही मुझे उसकी ब्रा में कैद कबूतर कि झलक मिली.......मेरे हाथ कबूतरों को आज़ादी दिलवाने में लिप्त हो गए.......
राज़ भी नीचे का वेंटी-लेशन शुरू करवा कर ऊपर कबूतरों पर झपटा.......
अब चार जोड़ी हाथ..............पलक झपकते ही शाहीन मादरजात नंगी......
अब तक लगभग सभी चूतें सार्वजनिक हो चुकी थी............
लौड़े वालों ने अभी जरा सांस ली ही थी कि सारी नंगियों से एक एक करके लौड़ो पर हमला बोल दिया......
एक एक लंड को रोशनी में लेन के लिए दस दस जोड़े हाथ काम पर लगे हुवे थे............
अंत में जब सब वस्त्र-विहीन हो गए तब सब निचे बैठ गए............
मनोज: सागर, आप अपने लंड महाशय को सभालें और शयन शैया कि और प्रस्थान करें........
आपकी सेवा में इस महफ़िल की सारी योवनाएँ तुरंत प्रस्तुत कि जा रही है......

सागर उठ कर एक बड़े से बेड कि और भागा.....
इसी तरह का निर्देश अलका को भी दिया गया..........
वो भी तुरंत एक रुमाल से अपनी चूत से निकलते हुवे पानी को एक बार फिर से पूछ कर बेड कि और चलीं........
सारे मर्द अलका के बेड के इर्द गिर्द और सारी नंगी परियां सागर को घेरे...............
अब दोनों ही एक बहुत ही वाइल्ड और अति उत्तेजक आर्गाज्म से ज्यादा दूर नहीं थे........

मैं अलका के एक बोबे पर हमला करने की तैयारी करते हुवे सोच रहा था कि इतने मर्द एक यौवना के अंग प्रत्यंग का मर्दन करेंगे तो चुदाई कि नौबत ही नहीं आएगी....
ये तो अभी खल्लास होती है..............
और तभी पांच लंड एकसाथ अलका के चेहरे, गालों और होंठो पर रगड़ खाने लगे...........
अलका मदहोशी के साथ उन सभी लंडों से चुहल करने लगी.......
किसी को चुम्मी दे रही थी....किसी को पुचकार रही थी...........
किसी को मसल रही थी...............
समझ नहीं आ रहा था एक साथ इतने सरे हथियारों के साथ क्या किया जाय.......
पागल सी होने लगी...............
तभी उसके एक बोबे पर मेरे होंठो ने हमला किया..............
और साथ ही उसका दूसरा बोबा भी एक जोड़ी होंठो के कब्ज़े में आ गया............
मैंने उसके कड़क परन्तु बहुत ही रसीले कलामी आम को बेतरतीबी से चूसा चालू कर दिया........दुसरे आम को भी बुरी तरह से खाया जा रहा था.............
क्रमशः........................
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07-19-2017, 09:52 AM,
#3
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--3
गतांक से आगे..........................
अलका के शरीर मैं २२० वाट का करंट दौड़ने लगा.......
उसके शरीर में रह रह कर ऐंठन पड़ रही थी.......
वो अपने कूल्हों को बुरी तरह से पटक रही थी..............
तभी दिलीप ने, जो अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था, बुरी तरह से मचल रहे विचलित कूल्हों को अपने दो मज़बूत हाथों से थाम लिया.........
अब अलका एकदम जकड़ ली गई..................
उसके मुंह से आन्हे निकालने लगी..............
तभी दिलीप के हाथ कूल्हों से फिसलकर जांघो की ओर बढाने लगे.............
और फिर एक झटके से दोनों जांघो को यथा-संभव दूर फैला दिया............
अब चिकनी और सपाट चूत जो कि योनी-रस से सराबोर थी मनोज के ठीक मुंह के सामने थी...........
अलका के साथ ऊपर जो सात लोग कृत्य कर रहे थे उसके घोर प्रभाव से अलका कि चूत एक झरने में तब्दील हो गई............
रह रह कर अमृत कलश छलक रहा था..............
मनोज से ये दिलकश नज़ारा और नहीं देखा गया और वो बस उस अमृत कलश से छलक रहे जाम का रसास्वादन करने के लिए आगे बड़ा..........
ऊपर हमारे भाई लोग अपने हाथों को अलका की कंचन काया पर अविरल फिसला रहे थे.............
शायद ही कोई अंग बचा होगा जो मर्दों कि ज़द से बाहर हो............
हर जगह मरदाना छाप छोड़ी जा रही थी...............
अलका को लग रहा था की बस कोई उसके शरीर को बुरी तरह से तोड़ डाले...........
इतनी तरंगे उठा रही थी उसमे.................और तभी................
दिलीप ने अब अपनी अंतिम छाप छोड़ने का फैसला किया...............
वो तुरंत अलका के योनी-फलकों को अपने हाथों से फैलाते हुवे........
झुका और अपने होंठो से उसके दाने पर जोरदार आक्रमण कर दिया..............बस यही वह क्षण था जब.............
अलका की एक जोरदार चीख उस विशाल कक्ष में गूंजी.............
ये चुदास से भरपूर प्री-आर्गाज्म चीख़ थी............
अलका अपनी मंजिल से जरा दूर थी.....................
ये महसूस होते ही सारे के सारे मर्द तेज़ी से अपने काम को अंजाम देने लगे.............
दिलीप कि चुसी और चटाई बुरी तरह से जारी थी....
जितना दिलीप का मुंह अलका की चूत में घुसता...........
उतना ही अलका चीख़ रही थी...............
और फिर अलका जोर से दहाड़ कर ढेर हो गई..............
पूर्ण रूप से संतुष्ट और निढाल............
एक लाश की भांति पड़ी थी जिसकी सांसे अस्त व्यस्त अंदाज़ में चल रही थी............
सभी मर्द उसे छोड़ कर हटे........................

(उधर दुसरे बिस्तर पर...................)
सागर अपने आस पास ८ नग्न सौंदर्य को एकसाथ पाकर उत्तेजना के शिखर पर था.................
इस पल की तो कभी कल्पना भी नहीं की थी उसने ................
और ये प्रत्यक्ष घटित होने जा रहा था....................
उसका लंड रह रह कर उछाले खा रहा था..............
वो अपने हाथ और पैर फैला कर पीठ के बल लेट गया..............
लंड अपनी पूर्ण कठोरता के साथ.............ऊपर नीचे हो रहा था............
सभी सुंदरियों ने आसपास घेरा बना लिया और ....................
फिर घुटनों के बल.........पलंग के ऊपर सागर के समीप आने लगी...............

समीप आते आते वो धीरे धीरे झुकने लगी.......
अब चारो तरफ से सागर को अपने शरीर की तरफ बढते हुवे सिर्फ चूचियां ही चूचियां नज़र आ रही थी..............
और फिर एक एक करके सभी ने अपने अपने चुचचे उसके शरीर पर सटा दिए............
एक साथ नौ जोड़े चुच्चे जैसे ही उसके शरीर के संपर्क में आये................
उसे लगा.... अठारह बिजली के नंगे तार चारों ओर से उसे चुभो दिए गयें हों..............
एक दम जोर का झटका बहुत जोरों से लगा उसे.......
और फिर सभी ने एक लय में उन चुच्चों को सागर के शरीर से रगड़ना शुरू कर दिया.........
२ चूचियां उसके मुंह में, चार चेस्ट पर, चार पेट पर और दो उसके लंड और जांघो पर........
कोई दो मिनट तक उसकी ऐसी ही रगड़ाई होती रही..............
सागर के मुंह से गूं गू कि आवाजें आ रही थी............
अचानक उसके हाथ हरकत में आये.....................
उसके दोनों हाथ दो नंगे शरीरों के निचे दबे हुवे थे................
उसने अपनी दोनों हथेलियों से कुछ ढूँढना शुरू किया..............
तुरंत ही उसे दो जोड़ी रसीली चूंते मिल गई............
उसने अपनी हथेलियों से चूतों को मसलना चालू कर दिया............
जिन जिन गोरियों कि चूतें मसली जा रही थी उन्होंने भी साथ देते हुवे अपने कुल्हे थोड़े हवा में ऊपर उठा लिए.........
अब सागर आसानी से बिना झांट वाली एक दम चिकनी चूतों को जोर जोर से मसलने लगा.............
मीनू जिसे अभी तक सागर के पास आने कि जगह नहीं मिल पाई थी.................
उसने सबको पकड़ पकड़ कर हटाया और फिर सागर के ऊपर लेटकर उसे दबोच लिया..........
अब अपने शरीर को उसपर जोर जोर से रगड़ने लगी............
श्वेता जो सागर को अपने बोबे चूसा रही थी वो उठी और घूमकर लंड वाले स्थान पर आई........
मेरी ने अभी अभी लंड से अपने बोबे हटाये थे..............
उसे हटाकर...................झट से लंड पे कब्ज़ा कर लिया............
दोनों हाथों से लंड को कस के पकड़ के मसलने लगी............
मीनू सागर के ऊपर अपना पूरा शरीर जोर जोर से रगड़ रही थी............
श्वेता के लंड पकड़ लिए जाने से वो अब ज्यादा मूवेमेंट नहीं कर पा रही थी...........
इसलिए उसने अपने शरीर को थोडा ऊपर सरकाया और फिर रगड़ना चालू कर दिया.............
इस बीच.......बाकि सभी को जहाँ जगह मिली वहीँ से सागर को छूने, मसलने और रगड़ने लगीं......
दो ने तो अपने अपने बोबे सागर को पकड़ा दिए ..............
वो जोर जोर से उन बोबों से खिलवाड़ करने लगा.............
सागर की बीवी शाहीन ने एकदम से अपना हाथ सागर कि गांड की और बढाया.........
और गांड का छेद महसूस होते ही उसमे एक उंगली घुसेड दी...............
सागर की उन्माद मिश्रित दर्द कि एक कराह सुनाई दी...............
सागर अब जोर जोर से छटपटा रहा था.................
मीनू को जैसे ही लगा कि सागर का किनारा नज़दीक आने वाला है..............
उसने लंड को मसलते मसलते उसे अपने होंठो से लगा लिया........
और फिर एक ही झटके में उसे मुश्टंड लंड को निगल गई............
और फिर अपने सर को जोर जोर से ऊपर निचे करके लंड कि जोरदार चुसाई शुरू कर दी...........
सागर काँप रहा था साथ ही जोर जोर से आह आह भी कर रहा था...............
सभी ने अपनी अपनी स्पीड बड़ा दी...............
शाहीन ने जैसे ही सागर को झड़ने के नज़दीक पाया ...............
उसने अपनी पूरी उंगली उसकी गांड में घचोड़ दी.................
सागर के लंड ने तुरंत भरभरा के मीनू के मुंह में पिचकारियाँ छोडनी शुरू कर दी.............
दोनों हाथों में जो बोबे थे उन्हें कस दे भींच लिए.............
और फिर एक जोर कि डकार लेते हुवे ढेर हो गया...............
मीनू अभी भी लंड को हौले हौले अन्दर बाहर कर रही थी..........
लंड के सहारे सहारे उसका माल रिस रिस कर मीनू के मुंह से बाहर आ रहा था..........
मीनू यथा संभव माल गटक चुकी थी..............
सारी लेडिस अब सागर के पलंग से उठने लगी...............
और फिर मीनू ने लंड बाहर निकला और अपने हाथों पर चिपटे माल को फिर से चाट चाट कर हज़म करने लगी................
अंत में शाहीन ने भी अपनी उंगली उसकी गांड से बाहर निकली........
और फिर अपने शौहर पर एक बहुत ही प्यार भरी निगाह डाली.............
सागर आँख बंद करे अभी अभी गुज़रे तूफ़ान के बाद सुस्ता रहा था...........
फिर वो वहां से उठा खड़ी हुई .................क्योंकि सागर को किनारा मिल चूका था...
एक जोर कि चीख से मेरी झपकी टूटती है. सब चीख कि दिशा कि और देखते हैं. मेरी दोनों हाथ मुंह पर रखे अलका के पलंग के पास दहशत के भाव लिए जड़ हो गई.

सभी लोग दौड़ कर वहां पहुंचे. अलका बेहोश पड़ी थी और उसकी गांड से बहुत खून बह रहा था...................सब सन्न रह गए.

शिल्पा जो कि एक गायनिक सर्जन थी वो तुरंत चेक करने लगी.

एकदम माहौल बदल गया...........सबके सर से सेक्स का भूत काफूर हो गया.

शिल्पा: इसे तुरंत मेरी क्लिनिक ले चलना होगा, कहीं खून ज्यादा न बह जाये......................

और फिर अगले ३-४ मिनट में सब अपने कपड़ो में बाहर.

तय यह हुआ कि ३-४ कपल अलका के साथ जायेंगे..................

और अगले चंद मिनटों में अलका को ले गए................

अब सभी बचे हुवे कपल एक एक करके रोनी और मेरी से बिदा लेने लगे...................

सबके सब एकदम चुप थे और सदमे कि हालत में थे.................किसी ने किसी से कोई बात नहीं की................

मैंने कार में रोमा कि बैठाया और गेट से बाहर आया.........................

मैं: कहाँ चले.................घर जाकर क्या करेंगे.........

रोमा: चलो भोपाल चलतें है पिंकी के घर......... कम से कम छुट्टियाँ को ख़राब नहीं होगी.................

मुझे आईडिया पसंद आता है और मैं मुस्कुराते हुवे कार को भोपाल की और बड़ा देता हूँ.........................

(अब आगे कि कहानी.............रोमा कि जबानी.............)

मुझे बड़ी थकान महसूस हो रही थी तो मैं पीछे कि सीट पर सोने चली गई........................

जैसे ही आँख बंद की, अलका वाला सीन आँखों के सामने आने लगा..............

बार बार उस से बचने कि कोशिश करने लगी परन्तु वो घटना पीछा ही नहीं छोड़ रही थी..................

फिर मैंने सोचा इस से पीछा छुड़ाने का एक ही रास्ता है कि मैं अपनी ज़िन्दगी के अच्छे फ्लैशबैक में जाऊं ................

और मेरा मन अतीत के पन्ने पलटने लगा......................

कॉलेज के समय में मैं बहुत ज्यादा शर्मीली लड़की थी...........परन्तु दिखने में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत
थी.......जवानी भी समय से पहले ही मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गई थी...........

पिंकी मेरे से सिर्फ सवा साल छोटी थी और मेरे एकदम विपरीत उसका स्वाभाव था........चंचल, शोख और बिंदास............

पापा मम्मी दोनों इंग्लैंड में डॉक्टर थे और हम दोनों बहने हॉस्टल में साथ-साथ रहते थे....................

एक दिन मेरे चचेरे भाई का फ़ोन पिंकी के पास आया और फिर पिंकी ने मुझसे उसके साथ घूमने जाने की इज़ाज़त मांगी..............

मुझे पता था कि मेरे मना करने पर भी उसे करना तो अपने मन की ही है.............सो मैंने उसे हाँ कह दी.....

पिछले कई दिनों से ये दोनों ऐसे ही लगातार घुमने जा रहे थे..............पूछने पर पिंकी हर बार असंतोषजनक जवाब देती थी..............

आज मुझे लगा कि ये कहाँ जाते हैं......क्या करते हैं इसका पता लगाना चाहिए और मैंने उसकी जासूसी करने का निश्चय किया...............

मैं: चल मैं भी अपनी कोचिंग में जारही हूँ.................

और फिर हम साथ ही नीचे आये...............मिंटू, मेरा कज़न, जैसे ही अपनी बाईक पर पिंकी को बैठा कर जाने लगा मैंने भी अपनी एक्टिवा उसके पीछे लगा दी और बड़ी ही सावधानी से पीछा करने लगी............

शहर के बाहर की सड़क पर आते ही मुझे मिंटू के पापा का गोदाम नज़र आया जो काम न आने वाली कपडे कि गठान को रखने के काम आता था. वहां अक्सर ताला ही लगा रहता था.

आसपास एकदम सुनसान था.

मिंटू ने गेट के बाहर बाईक रोकी. वहां पर दो लड़के उनका इंतज़ार कर रहे थे....... सबने मिंटू से हाथ मिलाया

और फिर वो सब अन्दर चले गए..........

मैंने काफी दूर अपनी एक्टिव पार्क की और गोदाम के गेट पर आई................

मेरी आशा के विपरीत बाहर का लोहे की ग्रिल वाला छोटा सा गेट सिर्फ अन्दर से बिना ताले के लगा हुआ था........

मैं वहां कई बार आ चुकी थी तो मुझे पता था कि वो कैसे खोला जाता है.................

मैंने बिना आवाज़ किये वो खोला और फिर चुपचाप गोदाम के मैं हाल की और बढ़ चली..................

काफी अँधेरा था वहां..............मैंने मोबाइल कि रौशनी में सामान से बचाते बचाते हाल में पहुंची...............

उन सब कि आवाज़ हॉल के कोने की तरफ से आ रही थी......................

वहां पर बहुत सारी कपडे से भरे बड़े बड़े बोरे पड़े थे................

मुझे छुपाने के लिए जगह की कोई कमी नहीं थी......................

में कुछ बोरो के ऊपर चढ़ कर ऐसी जगह पहुँच गई जहाँ से जरा ही गर्दन ऊपर करके उस कोने वाली जगह को देखा जा सकता था...............

वहां बोरियां हटा कर जगह बना ली गई थी.................

और बहुत सारे कपड़ो का ढेर बना कर उस पर बड़ी बड़ी चादरें बिछी. वो उनके लिए मिनी बिस्तर का काम कर रहा था....और बिस्तर भी एकदम मुलायम जैसे डनलप का बेड हो..........

वहां पर काफी लोगों के बैठने की जगह थी..................

वहां पर हलकी सी रौशनी आ रही थी.................

लेकिन ऐन उनके सर पर बोरियों के बड़े से ढेर के ऊपर जहाँ में छिप बैठी थी वहां ना के बराबर रौशनी थी.....................

फिर भी मैं लगातार झाँक कर देखने के बजाय उनकी आवाज़ सुन ने का प्रयास कर रही थी.........और बीच बीच में सावधानी से उन लोगों कि हलकी सी झलक भी लेती जा रही थी.............

वो चारों उस बिस्तर नुमा जगह पर बैठ गए...............

मिंटू: वो दोनों कितनी देर में आयेंगे............

एक: बस आते ही होंगे..............

वे दोनों लडके थोड़े सहमे से बैठे थे..............मिंटू का व्यक्तिव ऐसा था कि उससे सब डरते थे.....

कुछ देर में बाकी दोनों लड़के भी आ जाते हैं......................

मिंटू: जा.... ये लाक मार दे गेट पर.........

मुझे गेट खुला मिलने का कारण अब समझ आया.......मेरी किस्मत अच्छी थी जो मुझे बालकनी कि सीट मिल गई...........सीट भी क्या पूरी बर्थ ही मिल गई.............मैं पेट के बल आराम से नरम और मुलायम कपड़ों के ढेर पर लेटी हुई थी................और आने वाली आवाजों से निचे चल रही गतिविधियों को समझने का प्रयास कर रही थी.................

चूँकि अब नीचे ६ लोग हैं..............झांक कर देखने की रिस्क कम से कम ले रही थी...............

एक नज़र डाली नीचे तो देखा पाचों लड़के एक घेरा बना कर बैठ गए हैं..............

पिंकी जरा दूर एक कुर्सी पर बैठ गई है........................

पिंकी बहुत खुश नज़र आ रही थी.............

तभी मिंटू अपने बैग से कुछ निकालता है..................और सबके बीच में रखता है...............समझ में आये कि क्या है उससे पहले ही पिंकी जोर से कुर्सी आवाज़ के साथ खिसकाती है .........सबकी नज़रें उधर उठती है और
मैं डर के एकदम फिर दुबक जाती हूँ.......................

और फिर सुन सुन कर जायजा लेने का प्रयास करती हूँ...........................
....
क्रमशः................................
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07-19-2017, 09:52 AM,
#4
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--4

गतांक से आगे..........................
मिंटू: चलो बे .........ये मैंने बीच में फैला दिया है ........इसके पहले कि हम शुरू करें..........सब निकालो तो.................

मैं जिस तरह से डर के दुबकी थी उससे वहां हलकी सी सरसराहट की आवाज़ हुई थी......जो एक लड़के ने नोटिस कर ली थी.............

वो मिंटू से कहता है- मिंटू, यार ऊपर कुछ सरसराहट सी हुई थी अभी.........यार देख तो यार कहीं कुछ सांप वगैरह तो नहीं..........

सभी कि निगाहें शायद मेरे छुपने कि जगह कि और उठी होगी क्योंकि अभी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी................
मुझे लगा कि अब ये मुझे देख लेंगे................क्या जवाब दूँगी कि मैं यहाँ क्यों आई और इस तरह चुप कर जासूसी करने का क्या मतलब है...............

मिंटू: कुछ नहीं बे............होगा कोई चूहा.............तू डर मत...............चल चल निकाल पहले.................

मैंने राहत की सांस ली.............

मैं अभी तक कुछ भी नहीं समझ पा रही थी..............इस तरह से इस गोदाम में पांच लड़के और
पिंकी............क्यों ये सुनसान जगह चुनी इन लोगों ने............

पिंकी चार अनजान लड़कों के साथ क्यों और वो भी इतनी खुश............कोई मजबूरी सी महसूस नहीं हुई उसके व्यवहार से.................

क्या पता ये सेक्स का खेल खेलें आपस में............परन्तु मिंटू है तो ये संभव लगता नहीं है क्योंकि वो चचेरा भाई है हमारा............

लेकिन बाकि सारे हालात इशारा तो यही कर रहे थे कि ये मामला साधारण से हट कर है जो चुप चाप किया जा रहा है................

मिंटू: हाँ....ला दे......तू भी.......चलो ठीक है............ये ले पिंकी.......ये २०० रुपये रख तो अपने पर्स में......५०-५० चारों के..............

पिंकी: ठीक है मिंटू...........
बड़ी ही लरज़ती हुई आवाज़ में वो मिंटू को बोली.......

तो चलो अब अब अपना सांप-सीड़ी का खेल शुरू करते हैं....................

ओह, तो ये ये खेल खेल रहे हैं.................परन्तु शायद पैसे से खेल रहे हैं, तभी यहाँ सुनसान में हैं.............और पिंकी पैसे संभालने के लिए है..........

अचानक मुझे सारा माज़रा समझ आने लगा............हलकी सी ग्लानी भी हुई कि मैंने पिंकी को लेकर गलत सोचा.........मन कि चंचल और बिंदास है............परन्तु चालू नहीं है.............

मुझे ख़ुशी हुई और गुस्सा भी आया कि फालतू टाइम ख़राब करने आ गई.................अब रुकने का कोई मतलब नहीं था परन्तु अब तो बाहर ताला लगा है............

बिना मिंटू के पता लगे जाना असंभव है...........

अभी इनके सामने आ जाती हूँ तो अपने आने और चुप कर देखने का कारण क्या बताउंगी................

चलो आराम से पड़े रहो ऐसे ही.................वैसे भी सोये सोये बहुत आराम मिल रहा था मुझे.................
और नीचे खेल शुरू हुआ..................

बोर्ड पर एक पांसा फेंकने कि आवाज़ आई ............"टक्क"

"एक" ...............एकसाथ दो तीन आवाजें उभरी.................

मिंटू: मुहूर्त सही नहीं है .............क्या एक से खाता खोला..............चल पहले बढ़ा अपनी गोटी और पांसा अगले को दे.

और फिर खेल शुरू हो जाता है और मैं आराम से लेटे लेटे उनका खेल सुनने लगी.

"तीन"........."पांच"..........
..........."दो"......इस तरह से गेम आगे बढने लगा.

"छ:"........"अरे वाह इसने तो छक्का मार दिया "... एक आवाज़ उभरी.

मिंटू: चल बे, इनाम की चिट निकाल.

.........

"चल जा"...........

..........

.........

कुछ देर की चुप्पी के बाद फिर खेल शुरू हो जाता है.

फिर किसी का छ: आता है.

फिर वो कोई इनाम की चिट निकालता है और कुछ देर की फिर चुप्पी.

हर बार ६ निकलने पर इसी तरह से होने लगता है.

मेरी उत्सुकता जागती है......ये ६ नुम्बर का क्या चक्कर है.

चलो अब जब भी किसी को ६ आएगा मैं धीरे से झाँक कर देखूँगी.

और जैसे ही ६ की आवाज़ आती है मैं झाँकने के लिए तैयार होती हूँ.

एक लड़का मिंटू के हाथ में रखे एक बॉक्स में से एक चिट निकालता है.

खोल के पड़ते ही उसका चेहरा खिल जाता है लेकिन शायद मिंटू के डर की वजह से वो खुल के ख़ुशी जाहिर नहीं कर पाता है.

मिंटू रूखे स्वर में उससे कहता है......."चल जा"

वो उठ खड़ा होता है और मैं उसकी दृष्टि की परिधि में आ जाती हूँ..................

मैं तुरंत अपना सर नीचे कर के उसकी सीधी नज़र से बच जाती हूँ.

फिर कुछ देर की चुप्पी.

अभी मुझे रिस्क लेने में थोडा डर लगने लगता है.

चलो सुन सुन कर ही इनका खेल समझाने का प्रयास करती हूँ.

अभी कुछ देर में कई लोगों को ६ आ चुके थे परन्तु सुनकर खेल कुछ समझ नहीं आ रहा था.

चिट क्यों निकल रहे हैं.......उसमे क्या इनाम निकल रहा है..........कुछ देर की चुप्पी क्यों छा जाती है......इन सब सवालों में उलझ रही थी.

अब मेरी जिज्ञासा बढती जा रही थी.

फिर एक ६ आता है ....चिट निकालने का निर्देश...और फिर कुछ समय की चुप्पी.

हिम्मत करके जैसे ही फिर झाँकने की सोचती हूँ......

पहली बार पिंकी की आवाज़ आती है......मिंटू, इसने फाउल कर दिया है..येल्लो कार्ड दिखाओ इसे.

मिंटू: क्यों बे गांडू, खेल के नियम पता है फिर भी उन्हें तोड़ने से बाज़ नहीं आता है. अभी आगे से जिसने नियम तोडा उसे जोर से गांड पे लात पड़ेगी, समझ गए ना सब.....

"हां भाई" ...... सम स्वर में आवाजें उभरी...

मिंटू: चल अब किसकी चाल है............खेलो जल्दी जल्दी...

मेरी बुद्धि चकरा रही थी....खेल का कुछ भी सर पैर पल्ले नहीं पड़ रहा था...

और इसी तरह खेल बढता रहा और फिर...........

"ये १००, मैं जीत गया, मैं जीत गया" ......एक जोरदार आवाज़ आई..

मिंटू: अबे हाँ, हमें भी दिखाई दे रहा है कि तू जीत गया, इतना चिल्ला क्यों रहा है.....

"भाई, जेकपोट लगा है, पहली बार जीता हूँ पुरे हफ्ते में." ......जीतने वाले की आवाज़ आई...

मिंटू: चल ठीक है......चलो रे बाकी सब फूटो तो अब यहाँ से.....कल कौनसा वाला गेम खेलना है ५० वाला या १०० वाला......२५० वाले गेम की तो तुम्हारी औकात नहीं है......

एक बोला- भाई कोशिश करेंगे कि १०० इकट्ठे जो जाएँ.....अभी तक १०० वाला गेम खेला नहीं है तो एक बार तो खेलना ही है.....

मिंटू: चल ठीक है......ये ले चाबी....ताला खोल के धीरे से निकल लो......ताला वहीँ रख देना....

फिर अगले तीन चार मिनट, मिंटू शांति से बैठा सिगरेट पी रहा था.....बाकी कुछ हलचल भी महसूस नहीं हो रही थी.....

फिर बहुत ही धीमी, पिंकी की कुछ घुटी घुटी सी आवाज़ आई..........
क्रमशः................................
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07-19-2017, 09:53 AM,
#5
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--5
गतांक से आगे..........................
मिंटू: चल बे आज के विजेता......अब तू भी निकल ले.......

और फिर उसके भी जाने की आवाज़ आती है..............

मिंटू: चल पिंकी तू भी बाहर आ जा, हम भी चलते हैं......

मैं फिर झांकती हूँ......मिंटू, ठीक जहाँ से मैं झांक रही थी, उसके नीचे खड़ा होकर बोरियों के ढेर के अन्दर झांक रहा था....

और वहीँ से पिंकी बाहर आती है.............

शायद इन बोरियों के नीचे गुफा जैसी बना रखी होगी इन्होने तभी पिंकी अन्दर से बाहर की ओर निकल रही है.

मैंने देखा पिंकी अपने अस्त व्यस्त से कपड़ो को ठीक करने लगी.

पिंकी: साला कुत्ता, मैंने तो उसके दोनों हाथ ही पकड़ रखे थे पुरे टाइम, वरना......खेल पचास का खेलेगा और तमन्ना.......साला भड़वा.

मिंटू ये सुन कर हंसने लगा.....

मिंटू: थोडा बहुत इधर उधर चलता है यार पिंकी, तभी तो ये १०० और २५० वाला गेम खेलेंगे.

पिंकी: अब तू कहता है तो ठीक है......

मिंटू: मज़ा आया की नहीं आज के गेम में.

पिंकी: मज़ा आता है तभी तो तेरे इस खेल में शामिल होती हूँ.

मिंटू: अरे तेरे कारण ही तो ये गेम चल रहा है.

पिंकी: चल यार अब चलते हैं.....बहुत देर हो गई है.....

मेरे समझ में कुछ कुछ आने लगा था.......कुछ गड़बड़ तो चल रही थी...........मुझे गुस्सा आने लगा था..... और तभी....

पिंकी की नज़र मुझपे पड़ती है............वो जोर से चीख कर मिंटू को पकड़ लेती है.............."दीदी".....

मिंटू को भी समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले, परन्तु वो मेरे नज़रों का सीधा सीधा सामना कर रहा था .......

तभी मैं एक गुस्से भरी तेज़ आवाज़ में चिल्लाती हूँ- "ये सब क्या हो रहा था"

मिंटू: रोमा दीदी, आप यहाँ कैसे..........

मैं: कैसे के बच्चे...ये पिंकी के साथ तू क्या खेल खिलवा रहा था......

वो चुप रहा है..............

मैं: और तू...........तुझे इतनी आज़ादी दी तो ये गुल खिला रही है.......

दोनों हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगने लगे......दीदी गलती हो गई.....इस बार माफ़ कर दो......

मैं: इस गलती के लिए माफ़ी............तुम रुको तुम्हारे अभी होश ठिकाने लगाती हूँ.................

और मैंने अपना मोबाइल निकाला और चाचा का नंबर फ़ोन लिस्ट में सर्च करने लगी..............

जैसे ही मिंटू ने देखा उसने तेज़ी से मेरा मोबाइल छीना और फिर से गिडगिडा कर माफ़ी मांगने लगा....

मैं बहुत गुस्से में थी.......मैंने अपना मोबाइल वापिस छीनने का प्रयास किया लेकिन उसने पीछे कर लिया...

बहुत कोशिशो के बाद भी वो हाथ नहीं आया.........

इस बीच पिंकी लगातार मुझसे माफ़ करने कि मिन्नतें कर रही थी.....

हार कर मैंने कहा.....चल मैं सीधे चाचा के घर जाकर वहीँ सब बातें बताती हूँ....

और मैं तेज़ी से हाल से बाहर जाने लगी.........

मिंटू ने तेज़ी से आकर मेरा हाथ पकड़ लिया....नहीं दीदी...तुम प्लीज़ ऐसा मत करो आगे से कोई शिकायत नहीं
होगी आपको....

परन्तु गुस्से में मेरी सोचने समझने को शक्ति काम नहीं कर रही थी....

नहीं तुमको तो सबक सिखाना ही पड़ेगा........

जब मैं उसके रोके से नहीं रुकी तो अचानक उसने पीछे से मुझे पकड़ लिया....

उसके दोनों हाथ मेरे पेट को कसे हुवे थे और चेहरा मेरे कंधो को छू रहा था...

मिंटू: नहीं दीदी आपको जाने नहीं दूंगा....आप हमें माफ़ करदो.....

मैं: साले हरामी, मेरी बहन को बहका के ऐसे गंदे काम करवा रहा था.....तुझे तो नहीं छोडूंगी मैं....

और ये सुन कर मिंटू का सब्र टूट गया.............

उसने मुझे कस के जकड लिया और खीच कर वापिस पीछे ले गया.....साली मुझे गाली दे रही है, जबसे माफ़ी मांग रहा हूँ समझ में नहीं आता क्या, अब मैं देखता हूँ तू कैसे जाती है.

मैं छटपटाने लगती हूँ, वो अपनी जकड और मज़बूत कर लेता है, और अचानक वो मेरे मम्मो पर से अपने हाथो की जकड मज़बूत कर लेता है......

मैं जोर से चिल्लाने लगती हूँ.............वो अपना एक हाथ मेरे मुंह पर रख देता है............

मिंटू: पिंकी, इसका मुंह कपडे से बंद करना होगा वरना हम गए......

पिंकी: नहीं मिंटू, वो हमारी रोमा दीदी है.....

मिंटू: पागल हो गई है क्या, ये तो हमें बर्बाद करने पर तुली है.....जा जल्दी से कुछ लेकर आ....

पिंकी फिर भी ऐसे ही कड़ी रही, मिंटू चिल्ला कर बोला, कुतिया तू भी मरेगी और मुझे भी मरवाएगी.....जा लेकर आ..

पिंकी इस बार पीछे कुछ बोरो में से ढून्ढ कर एक लम्बा कपडा लेकर आती है......

मिंटू: चल इसे फाड़ कर इसकी पट्टी बना......

इधर मैं उनके इरादे समझ गई थी.......इससे मेरा गुस्सा और बढने लगा......जितना मैं छटपटा रही थी उतना उसका एक हाथ की कसावट मेरे मम्मो पर मज़बूत होती जा रही थी ...

छटपटाने से मेरा पिछवाडा उसके लंड को बुरी तरह से मसल रहा था और अचानक वो खड़ा हो गया.....

मुझे वो अपनी गांड पर बुरी तरह से चुभने लगा....तभी मिंटू के कहने पर पिंकी ने उस पट्टी से अछे से मेरा मुंह बाँध दिया.....

हाँ ये जरूर चेक किया कि कहीं मुझे सांस लेने मैं दिक्कत न हो..............

अब उसने अपना दूसरा हाथ भी मेरे मम्मो पर रख दिया......

मैं फिर छूटने का प्रयास करने लगी उसने मुझे पीछे से पकड़ कर उठा लिया और सीधा उस बिस्तरनुमा जगह पर पीठ के बल पटक दिया.....

मैं उठने की कोशीश करती इसके पहले ही वो मेरे ऊपर चढ़ गया .....अपने दोनों हाथो से मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और दोनों पैरों से मेरे पैर दबा दिया........

अब उसका खड़ा लंड सीधे मेरी छूट पर था.........पुरे दबाव के साथ.......

मैं जितना हिलती छूटने के लिए उतना उसका लंड मेरी छूट को घीस रहा था....

पिंकी को यही दिख रहा था कि वो मुझे काबू में करने का प्रयास कर रहा है....

मैं थक गई थी तो थोडा सा ढीला पड़ गई........

वो अभी भी ऐसा ही लेटा था और शायद इस स्थिति का मज़ा उठाने लगा था....
क्रमशः........................
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07-19-2017, 09:53 AM,
#6
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--6

गतांक से आगे..........................
पिंकी: अब क्या करें......

मिंटू: इस रांड से पूछ के ये मानती है कि नहीं......

पिंकी: मिंटू ऐसे मत बोल यार, दीदी है ये......

मिंटू: तू पूछती है कि नहीं वरना मेरा गुस्सा और मत बड़ा तू भी...

पिंकी: दीदी प्लीज़ माफ़ करदो और ये सब भूल जाओ....

मैं उन्हें बख्शने के मूड में नहीं थी सो मैंने साफ ना में सर हिलाया......

मिंटू: ये ऐसे नहीं मानेगी........पिंकी अब तू साफ साफ बता....तू मेरे साथ है कि अपनी दीदी के साथ है....

पिंकी: मैंने तो दोनों के ही साथ हूँ.......

मिंटू: इस वक़्त किसी एक का साथ देना होगा...दीदी का साथ देगी तो ये मुझे बदनाम कर देगी और मैं ऐसा होने नहीं दूंगा...मेरा देगी तो हम दोनों बच जायेंगे...

पिंकी: तो फिर दीदी का क्या होगा.....

मिंटू थोडा मुस्कुरा कर बोलता है.....इसका भी अच्छा ही होगा.....

पिंकी थोडा सोच कर कहती है ठीक है तेरा साथ दूँगी....

मेरा गुस्सा फिर भड़क जाता है.....मेरी बहन मेरे खिलाफ उसका साथ दे रही है....

मिंटू: देख अब जो मैं बोलूं तुझे उस पर कोई भी आपत्ति नहीं होना चाहिए...

पिंकी: ठीक है....बोल क्या करना है....

मिंटू: फिलहाल तो इसका मुंह बंद करना है....

पिंकी: अरे वो तो अच्छे से बंद कर ही दिया था न मैंने......

मिंटू: ये पट्टी खुलने के बाद भी ये मुंह ना खोले .....वो वाला बंद....

अब मैंने महसूस किया कि मिंटू का लंड मेरी चूत पर रगड़ लगा रहा है....

मुझे अब उसके मंसूबों का आभास होने लगा था......

मैं फिर छूटने के लिए जोर लगाने लगी परन्तु लगभग थक चुकी थी सो बहुत ही हल्का जोर लगा....

वही अब मिंटू बड़ी ही बेशर्मी से अपने लंड से मेरी चूत पर धक्के से मरने लगा था.....

मिंटू: पिंकी, बस एक ही रास्ता बचा है, कि मैं रोमा को चोद दूं, तब ये कहीं अपना मुंह नहीं खोलेगी....बोल साथ देगी मेरा..हाँ या ना....

पिंकी: नहीं.......वो बहन है तेरी ...

मिंटू: भड्वी, तू भी तो मेरी बहन है, फिर मेरे ही साथ यहाँ आकर अनजान लडको के साथ, अभी मुंह खोलूं क्या अपना ..... .....

पिंकी कुछ नहीं बोली.....मुझे पता चलता जा रहा था कि यहाँ क्या खेल चल रहा था.....

मिंटू: अभी अगर तू मेरा साथ नहीं देगी तो इसे तो छोड़ दूंगा पर तुझे बदनाम कर दूंगा और वो सब लड़के सबूत रहेंगे तेरे रंडी जैसी करतूत के....सोच ले..

पिंकी: चल ठीक है......परन्तु दीदी के साथ ठीक से पेश आना....चल क्या करने का है......

मिंटू: सबसे पहले तो मेरा जींस खोल.....

वो मिंटू पीछे आकर दोनों हाथ इर्द गिर्द डालकर जींस का बटन ढूँढती है.......

मिंटू: क्या करती है.....मेरे लंड से खेलने लग गई.........चल जल्दी से बटन खोल.....

पिंकी की चोरी पकड़ा गई थी और मुझे भी पता लग गई थी......वो झेंप कर जींस का बटन खोल कर जींस नीचे खिसका देती है......

मिंटू: ये चड्डी भी निकाल...

और फिर पिंकी के कोमल हाथ मिंटू की कमर की ओर बढते हैं...वो अपनी उंगलियाँ उसकी चड्डी की एलास्टिक में घुसाती है और धीरे धीरे चड्डी नीचे खिसकाती है..थोड़ी नीचे आकर आगे से वो मिंटू के लंड में फँस जाती है.....अब पिंकी जोर लगाती है चड्डी नीचे करने के लिए परन्तु वो आगे से लंड में फँसी रहती है......

मिंटू: अरी भेन की लवड़ी, पहले मेरे लंड में से तो इसको निकाल.

अब पिंकी बिस्तर पर कोहनी के बल लेट कर मिंटू को ऊपर उठने का इशारा करती है....वो पिंकी की तरफ देखता है और जरा ऊपर उठता है......

पिंकी अब एक हाथ डालकर हमारे बीच चड्डी में फंसे उसके लंड की और अपना हाथ बढाती है..

मिंटू: अरे क्या फिर से खेलने लगी मेरे लौड़े से, इतनी देर लगती है लंड को आज़ाद करने में...

पिंकी: लो बस हो गया...

अब पिंकी फिर से उसके पीछे जाकर चड्डी निकालने लगती है....

जब चड्डी निकलती है तो मिंटू को थोडा इधर उधर होना पड़ता है.....तब उसका लंड बिलकुल मेरी चूत की दीवार पर सेट हो जाता है और अब वो उसके हिलने पर खिसकता नहीं है बल्कि चूत पर रोल होने लगता है......मेरे अन्दर कुछ लहर दौड़ने लगती है...........पर उसे मैं एकदम से झटकती हूँ........

अब मिंटू मुझे पूरा बाँहों में भर कर पलती मारता है...........मैं ऊपर से तो उसकी जकड में थी परन्तु नीचे से मैं अपनी चूत को उसके लंड से दूर रखने का प्रयास कर रही थी...और ऐसा करने पर उसका लंड एकदम से खुला हो जाता है और पिंकी कि नज़र उसपर जाकर अटक जाती है.........

मिंटू: चल पिंकी, अब मेरा शर्त निकल.........

परन्तु पिंकी तो उसके लंड में एकदम से खो गई थी.......

मिंटू: क्या देख रही है जल्दी से मेरा शर्त निकाल.....

वो तुरंत हरकत में आती है......अब मिंटू मुझे अपनी एक बांह में भरता है और अपनी दूसरी तंग से मुझे नीचे से पूरा जकड लेता है .........

पिंकी जल्दी जल्दी उसके शर्ट के बटन खोलने लगती है...........उसने मुझे बुरी तरह से दबोच रखा था......मेरे दोनों मम्मे उसकी साइड की छाती और हाथ में धंसे हुवे थे........

शर्ट निकालते निकालते उसने मुझे कई बार मुझे इधर उधर पलटाया तब जाकर उसकी शर्ट निकली......मैं तो जैसे उसके शरीर पर कुचली जा रही थी........

मैं उसके एकदम ऊपर थी......उसने दोनों पैरों से मेरे चूतड दबोच रखे थे...........उसका लंड मेरी चूत पर दबाव डाल रहा था....

फिर पिंकी ने हम दोनों के बीच हाथ डाल कर जेसे तेसे उसका बनियान निकल कर उसको पूरा नंगा कर दिया...........

अब उसने मेरे कुरते को ऊपर उठाना चालू किया.......उसकी पकड़ ढीली होते ही मैं छूटने का प्रयास करने लगी.....उसने फिर अपने हाथों और पैरों से मुझे जकड लिया....मेरा मुंह उसके कंधे पर था और उसकी गर्म सांसे अब मेरे कान पर महसूस हो रही थी.........

मिंटू: पिंकी तुझे ही तेरी दीदी को नंगा करना पड़ेगा....ये साली अभी भी फनफना रही है.......

पिंकी ने मेरा कुरता ऊपर करना शुरू किया....मिंटू ने हाथ डाल कर आगे से मेरा कुरता ऊपर किया....धीरे धीरे दोनों ने उसे निकाल दिया......

अब मिंटू ने एक झटके से मेरी ब्रा के हूक खोल दिए.........

मिंटू: पिंकी चल इसका नाड़ा खोल.....

उसके हाथ मेरे नाड़े को तलाश रहे थे......ऊपर मिंटू ने खींच कर मेरी ब्रा भी अलग कर दी.....अब मिंटू मेरी नंगी और अनछुई चिकनी पीठ का जायजा ले रहा था.....

पिंकी ने नाडा खोल कर मेरी सलवार को निचे खिसकाया....मिंटू ने अपने पैरों की जकड हटा कर अपने पैर खोल दिए.....जैसे ही उसने अपने दोनों पैर जमीन पर रखे उसका लंड वाला हिस्सा एकदम ऊपर की और उठा और मेरे चूत-प्रदेश पर जोर का दबाव डाला......मेरे अन्दर से आह निकल गई.......

पिंकी ने मेरी सलवार खींच खींच कर निकल दी........
अब मेरी जवानी को ढंकने वाला अंतिम कड़ी मेरे तन पर थी जो मुझे पता था कि किसी भी क्षण मेरा साथ छोड़ने वाली थी...............

और फिर पिंकी के हाथ मुझे पूर्ण नग्न करने के लिए आगे बड़ा........

उसने खींच कर मेरी चड्डी नीचे खिसका दी...........जैसे ही मेरी आखरी ढाल मेरी शरीर से हटी.....मिंटू ने फिर से मुझे जोर का भींच लिया........

अब उसका केले जैसा लम्बा लंड बिना किसी बाधा के मेरे चूत कि दरार पर फँस सा गया.........

अब वो मेरे शरीर से खेलने लगा.........कभी पीठ पर मालिश करता ...कभी चूतड भींचता....और उसके लंड का टोपा ठीक मेरे दाने के ऊपर चूत के होंठ के उपरी खांचे में फंसा हुआ था.......हिलने डुलने पर वो लगातार मेरे दाने की मालिश कर रहा था........

अब उसने मुझे पलटा दिया और अपने दोनों घुटने मोड़ के मेरे दोनों जांघो पर दबा दिए और अपने दोनों हाथों से मेरे हाथो को आधी कोहनी मोड़ के पकड़ लिया और फिर मुझे स्थिर करके वो मेरी जवानी को नज़दीक से देखने लगा.......मेरे बड़े बड़े मम्मे उसको ललचा रहे थे.............

ना चाहते हुवे भी मेरी नज़र एकबारगी उसके तने लंड की और गई.......... मुझे तो वो केले जैसा महसूस हुआ था......परन्तु ये तो एकदम भुट्टे जैसा था.......बहुत मोटा...

पिंकी अब मेरे सर के ऊपर की तरफ आ गई....वो तो बस उस भुट्टे को एकटक निहार रही थी.......अब तक उसका एक हाथ उनकी चड्डी में पहुँच चूका था.....और वहां आप समझ जाओ क्या कर रहा होगा...

मिंटू, जैसे अब सब कुछ उसके कण्ट्रोल में था......वो बड़े आराम से मेरे मम्मो को आँखों से पी कर पिंकी कि और मुखातिब हुआ......

मिंटू: हे पिंकी, तुने मेरा सबकुछ देख लिया......अपना भी सबकुछ दिखा ना......फिर मैं तेरे को एक जोरदार चुदाई दिखता हूँ................

पिंकी तो जैसे तैयार ही थी.........झट से उसने अपना स्किर्ट ढीला किया......सर्र से वो निचे....एक झटके में चड्डी भी जमीन पर........

और उससे भी ज्यादा तेज़ी से टॉप हवा में उड़ा दिया और फिर ब्रा भी ......

उसके लंड ने एक जोरदार झटका लिया......

अब वो दोनों के बदन बारी बारी से देख रहा था............

मिंटू: वाह रे पिंकी, तू तो अन्दर से बहुत खूबसूरत है रे....तुने कभी बताया नहीं मुझे पहले.

पिंकी: (थोडा शर्माते हुवे) नहीं देख दीदी तो मुझसे भी ज्यादा सुन्दर है.....मम्मे कितने बड़े और कसे हुवे हैं..

मिंटू: चल इधर आ मेरी थोड़ी मदद कर ताकि तेरी दीदी कि खूबसूरती को महसूस कर सकूं......ले इसके दोनों हाथ पकड़ ले.

और वो मेरे सर के इर्द अपने घुटने मोड़ कर बैठ गई और झुक कर मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए.....

उसकी छूट मेरे सर को छू रही थी....मिंटू के दोनों हाथ अब आज़ाद हो चुके थे ....तुरंत उसके हाथ मेरे मम्मो पर आ गए...
अब वो मेरे दोनों मम्मों को मसलने लगा.....पिंकी थोडा और ऊपर खिसकी तो उसकी छूट मेरी पर जा टिकी....उसकी चूत की गर्मी महसूस हो रही थी...उसकी चूत गीली हो चुकी थी और उसकी खुशबू मेरे नासारंध्र में घुलने लगी........

अचानक मिंटू झुका और मेरे एक मम्मे को अपने मुंह में भरकर चूसने लगा....अपने पैर उसने लम्बे कर लिए तो उसका लंड फिर मेरी चूत पर सेट हो गया.....

अब वो बेतहाशा मेरे मम्मो को चूस रहा था .....उसकी ये चुसाई ने मेरे प्रतिरोध को काफी ढीला कर दिया और मेरे अन्दर भी न चाहते हुवे भी काम उर्जा भरने लगी.....फलस्वरूप मेरी चूत में रसस्राव शुरू होगया.

मिंटू अब अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगा.......मेरे चिकने रस ने उसका काम थोडा आसान कर दिया....

अब लंड को अन्दर डालने के लिए उसने मेरे बोबे छोड़े और जैसे ही सर ऊपर किया अपने ठीक सामने पिंकी का मुंह पाया......बिना देर किये उसने अपने होंठ से पिंकी के होंठ भींच लिए

और फिर एक जबरदस्त चुम्बन....पिंकी और मिंटू के होंठ मिले....मिंटू ने अपने दोनों हाथों से पिंकी का मुंह पकड़ा और पूरा मुंह उसके मुंह में घुसेड दिया....पिंकी ने भी आवेश में आकर कब मेरे हाथ छोड़ कर मिंटू का सर पकड़ लिया उसे पता ही नहीं चला.........मैं अब तक काफी गरम हो चुकी थी और लगभग भूल सी गई थी कि मैं इस चुदाई से अपने को बचा रही थी....मेरे हाथ आज़ाद होते ही मैंने अपना मुंह का कपड़ा खोला....जान में जान आई.....उधर वो दोनों अपने घुटनों पर एक आगे और एक मेरे पीछे....तल्लीनता से चूमा चाटी में लगे हुवे थे.....मेरे ठीक सामने मिंटू का भुट्टा लहरा रहा था......पता नहीं क्या हुआ मैंने अपने दोनों हाथों से उस झूलते भुट्टे को थम लिया.........जैसे ही मिंटू को महसूस हुआ उसने पिंकी को छोड़कर नीचे देखा.....मेरे हाथ उस भुट्टे की खाल को मसल रहे थे......उसने पिंकी को इशारा किया कि देख नीचे का नज़ारा.....पिंकी ख़ुशी से चिल्लाई .....ओ दीदी....हाँ तुम भी मज़े लो, देखो मिंटू का कितना मस्त है....और फिर पिंकी ने जोश में मिंटू का सर खींच कर अपने मम्मों पर भींच लिया....अब मिंटू एक जोड़ी नए कलमी आमों की चुसाई का आनंद लेने लगा और पिंकी की तेज़ आहें और कराहें फिजां में गूंजने लगी.......पिंकी की चूत से निकलने वाली मादक खुशबू मेरे अन्दर वासना का ज्वार उठा रही थी...मैंने मिंटू के लंड को छोड़ा और पिंकी के दोनों कुलहो पर हाथ रख कर उसे थोडा नीचे खींच और अपना मुंह थोडा सा उठा कर पिंकी कि चूत में घुसेड दिया......वो रस से सराबोर थी.....मैं अपनी जीभ से उसे चाटने लगी....पिंकी के थोडा नीचे होने से उसके बोबे मिंटू के मुंह से निकल गए....उसने देखा कि मैंने पिंकी की चूत पर आक्रमण कर दिया है तो वो भी तमतमा गया और नीचे की और खिसक कर अपना लंड मेरी चूत के छेद पर टिका दिया.......अब वो मेरी फिसलन भरी चूत में लंड घुसाने लगा.......दर्द से मेरे मुंह से आह निकली तो वो पिंकी से बोला कि मेरे होंठो को अपने होंठो से कस के दबा ले ताकि चिल्लाने कि आवाज़ बाहर न जाने पाए.....पिंकी ने थोडा पीछे खिसक के अपने होंठो से मेरे होंठो को जकड लिया...मैंने अपने दोनों हाथों से पिंकी के मम्मों को थाम लिया और उनसे अठखेलियाँ करने लगी.....

इधर नीचे मिंटू ने अपना आधा लंड जैसे ही मेरे अन्दर किया मैं जोर से चिल्लाई परन्तु चीख पिंकी के होंठो से घुट गई....अगले दो मिनट मेरे लिए बहुत दर्दनाक थे ....मिंटू पुर लंड पेल कर घस्से मरने लग था....कुछ ही देर में मेरा दर्द आनंद में बदलने लगा......और फिर मैं भी चुदाई का आनंद लेने लगी......और १० मिनट की चुदाई के बाद मुझे अपने पहले चरमोत्कर्ष की झलक मिली......वो मेरी ज़िन्दगी का सबसे आनंददायी क्षण था......इधर मिंटू भी मेरे अन्दर ही झड गया.....

मैं झडने के बाद एकदम लुस्त पड़ गई.....अब जैसे जैसे चरमानंद के आगोश से बाहर आ रही थी वैसे वैसे मेरी चूत में तेज़ जलन और दर्द महसूस होने लगा......फिर थकान की वजह से तुरंत ही निद्रा में लीं हो गई.......

अचानक ऐसा लगा कि कोई मुझे झिंझोड़कर उठा रहा है.......आँख खुली तो देखा मिंटू कपडे पहन रहा है और पिंकी एक गहरी मुस्कान के साथ मुझे उठा रही थी......

मैं: क्या हुआ.......

पिंकी: तुम तो एकदम घोड़े बेच कर सो गई थी....हमारी उठापटक में तुम्हारी नींद जरा भी नहीं खुली क्या दीदी...

मैं: क्या उठापटक........

पिंकी (शरारती लहजे में): वैसी ही जैसी कुछ देर पहले आपके और मिंटू के बीच चल रही थी........

मेरे चेहरे पास एक मुस्कान तैर गई......ये देख कर पिंकी मुझसे लिपट गई और बेतहाशा चूमने लगी.....मुझे भी उसपर बहुत प्यार आया और मैंने भी उसको अपने ऊपर खींच कर होंठो पर चूमने लगी......

मिंटू: अरे चलो यार बहुत देर हो गई.......अब ये काम तो तुम अपने रूम पर चाहे जब कर सकते हो......पर हाँ मुझे भूल मत जाना.......

हम दोनों उसकी इस बात पर हंसने लगी और फिर फटाफट कपडे पहन कर अपने होस्टल की और चल पड़ी................

"पी पीप पी "......कार के हार्न की लगातार तेज़ आवाज़ से मैं अतीत से वर्तमान में लौट आई.......सामने पिंकी का घर आ चूका था और रवि सामने कार पार्क करने के लिए वहां खड़ी कुछ गायों को हटाने के लिए होर्न मार रहा था...............

मैं: अरे........आ गए पिंकी के घर.............

रवि: अरे तुम उठ गई...........कितनी गहरी नींद में सो रही थी.................

मैं मुस्कुरा उठी ......अब मैं नोर्मल फील कर रही थी, मेरे पहले आर्गौस्म की स्मृति में खो कर.......हम उतरे और पिंकी के घर के अन्दर चले गए....

पिंकी के घर की घंटी बजा कर हम दरवाज़ा खुलने का वेट करने लगे........

रवि पिंकी को देखने के लिए मरा जा रहा था कि शादी के तीन महीनो में चुद चुद कर क्या वो और सेक्सी हो गई होगी, पता नहीं रवि को पिंकी की चुदाई का मौका मिल भी पता है कि नहीं, फिर भी वो बहुत रोमांचित था..... मेरी शादी के एक महीने बाद से ही रवि ने पिंकी की चुदाई शुरू कर दी थी... रवि पिंकी का दीवाना था और एक रात में चार चार बार चोद कर भी नहीं थकता था..... पिंकी भी रवि से खूब मज़े ले ले कर चुद्वाती थी...........हम अक्सर तीनो मिल कर रात रात भर सेक्स करते थे....और जब भी मौका मिलता, मिंटू भोपाल से इंदौर हमारी पार्टी में शामिल होने पहुँच जाता था.....

जब कुछ समय दरवाज़ा नहीं खुला तो मैंने रवि को आँखों ही आँखों में जरा सब्र करने का इशारा किया क्योंकि वो बहुत हडबडा रह था........दरवाज़ा खुला और रवि का मुंह पिंकी को देख कर खुला का खुला रह गया......पिंकी भी हमारी इस सरप्राइज़ विज़िट पर हैरान रह गई.....दोनों जीजा साली बस एकदूसरे को एकटक देखे ही जा रहे थे.....पिंकी शादी के बाद बहुत ही ज्यादा सेक्सी हो गई थी...मैं मुस्कुरा कर उसे हग करने आगे बड़ी.....तब उसका ध्यान मेरी ओर गया......मैंने रवि को कोहनी मारी कि इस तरह से पिंकी को ना देखो.....कहीं उसका पति अमित ने देख लिया तो........मैं इधर उधर देख कर अमित को ढून्ढ रही थी......परन्तु ये क्या...... पिंकी ने दरवाज़ा बंद किया और एकदम लपक के रवि के ऊपर छलांग लगाकर उसको दबोच लिया और अपने दोनों पैर उसकी कमर पर लिपटा लिए.....रवि हडबडा कर अपना बैलेंस बनाने लगा कि कहीं गिर न पड़े......लेकिन संभालते संभालते भी वो पीछे दो तीन कदम हुआ और फिर वहां रखा दीवान उसके पैर के पीछे लगा और वो पिंकी को साथ लिए बिस्तर पर पीठ के बल गिर पड़ा....मैं दौड़ कर उनके पास गई और पिंकी के कान में धीरे से बोला....ऐ अमित ऐसे देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी.......पर वो हटने के बजे रवि को खिसका कर पलंग पर सीधा करने लगी और जब वो एकदम ठीक से पलंग पर लेट गया तो फिर उस पर कूद पड़ी और ऐसे दबोच लिया कि कहीं वो उसे छोड़ कर कहीं चला ना जाये.....और उसके मुंह पर अनगिनत किस करने लगी....अपने पुरे शरीर को उसके शरीर पर रगड़ रही थी....मैं डर के मरे इधर उधर देख रही थी कि कहीं अमित बैठक में ना आ जाये......मैं बहुत डर रही थी.........

उधर अमित भी डर की वजह से पिंकी की हरकतों का कोई जवाब नहीं दे पा रहा था और अवाक् सा बस पड़ा हुआ था...............कुछ देर बाद पिंकी ने हम दोनों कि हालत देखि तो जोर से हंस पड़ी....मैं बोली- तू अपने जीजू को देख कर शायद पागल हो गई है वरना तुझे अमित का कोई डर नहीं.......तो वो बोली- दीदी अमित से डर तो तब लगेगा ना जब वो घर पर होगा........आज उसकी नाईट शिफ्ट है तो वो अब सुबह ५ बजे ही वापिस आएगा.......और फिर वो हंसने लगी..........
क्रमशः........................
........
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Reply
07-19-2017, 09:53 AM,
#7
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--7

गतांक से आगे..........................
रवि को जैसे ही सारा माज़रा समझ में आया उसने पिंकी को जोर से अपनी और खींचा बोला साली, पहले नहीं बता सकती थी, डराना जरूरी था क्या, अब देख इसकी कैसी सजा मिलती है तुझे........... और फिर उसे कस के अपने आलिंगन में लिया और फिर इसी अवस्था में वो पलट गया.....अब पिंकी नीचे और रवि ऊपर....अपना मुंह पूरा पिंकी के मुंह में घुसा दिया और दोनों हाथों से उसके दोनों बोबे बुरी तरह से कुचलने लगा.......मैंने राहत की साँस ली....और रवि को उस पर से हटाते हुव़े बोली.....अरे, तुम्हारी तो आज लोटरी लग गई है, इतनी हड़बड़ी भी क्या है, अब तो सारी रात पड़ी है जीजा-साली के पास.......वो एक दुसरे को छोड़ने को तैयार ही नहीं हो रहे थे........

जब मैंने डपट कर बोला तब बड़े अनमने मन से रवि उठा और मेरी गांड पर एक जोर से चपत लगा कर बोला-
साली, कवाब में हड्डी......,
फाड़ डालूँ तेरी चड्डी........,
इस खता का बस यही है दंड.....,
कि चोदे तुझे कोई गधे का लंड........

उसकी इस बेहूदी तुकबंदी पर मैं उसे मारने दौड़ी और वो फिर पिंकी से पलंग पर लिपट गया और उसे अपने ऊपर करके मुझसे बचने कि कोशिश करने लगा.....

थोड़ी देर की इन छेड़छाड़ के बाद मैं और रवि जल्दी जल्दी फ्रेश हुवे और पिंकी ने भी जल्दी से हमारे लिए खाना बना दिया.....सब डायनिंग टेबल पर रखे खाने पर टूट पड़े....बहुत भूखे थे हम सभी.......खाते खाते ही आगे की प्लानिंग बनी कि चूँकि रवि और पिंकी बहुत दिनों के बाद मिल रहे हैं और अब फिर पता नहीं कब चांस हाथ लगे तो मैंने ही ये तय करवाया कि मैं वाकई कवाब में हड्डी न बनू और दोनों को भरपूर चुदाई करने दूं....मैंने आज रात आराम करने की सोची......मेरा दिमाग बहुत तेज़ी के साथ एक योजना पर काम कर रहा था और इसलिए भी थोडा एकांत चाहिए ही था............

मैं दुसरे कमरे में आकर लेट गई और अपनी योजना के बारे में सोचने लगी. कुछ ही देर में पिंकी के बेडरूम उन दोनों की छेड़छाड़ की आवाजें आने लगीं. पिंकी बहुत ही सेक्सी आवाजें निकल रही थी. फिर कुछ देर के बाद पिंकी जैसे रवि से गिडगिडा कर उसे छोड़ने के लिए मन रही थी और शायद रवि उसे तडपा रहा था. मुझे उन दोनों की आवाजें सुनने में बहुत मज़ा आने लगा तो मैंने थोड़ी देर उधर ध्यान लगाया. वे बिना किसी डर के जोर जोर से बातें करते करते काम क्रीडा में लिप्त थे.

" तेरे ये मम्मे इन्हें मसलने और चूसने में मुझे बहुत मज़ा आता है रे मेरी साली"

" जीजू, आज ३ महीने बाद तुम्हारा लंड मिलेगा मुझे, चूत में बहुत सनसनाहट हो रही है मेरे राजा"

फिर कुछ देर पिंकी के बोबे चूसने की आवाज़ और साथ ही साथ पिंकी की जोर जोर से कराहने की आवाजें.

"जीजू, ये दूसरी वाली चूची भी चूसो ना, हाय आज तो क्या जान ही ले लेगा राजा"

"ऐ पिंकी, यार तेरी चूचियां तो और मोटी मोटी हो गई है, और ये टिप के नीचे का काला घेरा और भी बड़ा और कितना फूला फूला लग रहा है, लगता है किसी ने तेरे बोबों पर इन्हें ऊपर से चिपका दिया हो, इनको उँगलियों से छेड़ने में ही कितना मज़ा आरहा है, हालांकि चूस चूस कर तो मैं पागल हुआ ही जा रहा हूँ"

"जीजू, अमित इन चूचियों का बहुत दीवाना है, वो जब तक आधे घंटे इनसे खिलवाड़ न करले वो अपना लंड मेरी चूत में घुसता ही नहीं हैं. पिछले तीन महीनो की उसकी चुसाई और मसलाई से देखो ये कितनी फूली फूली लगने लगी है, अब तो मुझे भी इन्हें छूने और मसलने में बहुत मज़ा आने लगा है."

फिर कुछ देर बोबों के जोर जोर से चूसने की आवाजें. पिंकी इस तरह से कराह रही थी जैसे एकसाथ कई लोग उसके शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहे हों.
"आआ आआआआआअअ"

"क्या हुआ पिंकी, इतनी जोर से चीखी"

"वो जीजू, तुमने एकदम से मेरी नाभि में अपनी जीभ घुसेड दी न, मैं समझी थी कि तुम नीचे की तरफ मेरी पेंटी उतारने गए हो"

अभी भी वो आह आह की आवाजें निकल रही थी.

"जीजू, कब डालोगे अन्दर, मेरी चूत बहे जा रही है बहुत दिनों के बाद बदले हुवे लंड का स्वाद चखने के लिए, क्या यार जीजू मेरी तो सुन ही नहीं रहा है, क्या छक्का हो गया है क्या मेरा जीजा, लंड खड़ा नहीं होता क्या तेरा रे भड़वे. क्या मेरी रंडी बहन ने चूस चूस के तेरा सारा पानी सुखा दिया है रे मादरचोद." पिंकी अब पूरी बहक चुकी थी और गालियाँ ही निकल रही थी उसके मुंह से.

"भेन की लवड़ी, खानदान की सबसे बड़ी लूज़ करेक्टर, चुदक्कड़ रांड...... मेरे को नामर्द बोलती है, ले मेरा लवड़ा चूस के देख पता चलेगा की कितना तगड़ा मूसल है, अरे तेरे जैसी दसियों बाजारू रांडो को एक लाइन से सुला कर चोद सकता हूँ, मेरे को छक्का बोली, ये ले चूस, भर ले अपने मुंह में.....हाँ ले पूरा का पूरा घुसेड दूंगा, तेरे गले को फाड़ डालेगा ये"

"गूं गूं गूं ................"

कुछ देर बाद............"अरे क्या मार डालेगा मुझे, नीचे वाले छेद में क्यों नहीं पेलता है इसे, ऊपर तो मेरी सांस ही रोक दी थी तुने भड़वे."

"जा नहीं डालता तेरी चूत में इसे"

"अरे मेरे राजा, नखरे क्यों करता है, देख कैसा तड़प रहा है मेरी चूत में जाने के लिए."

और ऐसे मौके पर पिंकी ने एक बहुत ही मौजूं वीर रस में चार लाइने सुना मारी जिसे सुन कर मुझे भी जोर से हंसी आगे.........वो कुछ इस तरह से थी.....

"पकड़ के टांग खीच दो"
"पकड़ के टांग खींच दो"
"के चूं हो ना चंड हो"
"भूसंड लंड ठूंस दो "
"कि चूत खंड खंड हो"

रवि कि भी सुन कर हंसी छूट गई, और कुछ देर कि शान्ति के बाद पिंकी की एक जोर की कराह सुनाई आई, ये निश्चित रूप से लंड को चूत में घुसाए जाने की प्रतिक्रिया स्वरुप उपजी होगी. और फिर धप्प धप्प धप्प धप्प की आवाजें आने लगी, हर धप्प के साथ एक नारी स्वर "आई" भी जुगलबंदी कर रहा था. पिंकी की तेज़ी से बदती चुदास को देखते हुवे रवि ने प्रथम चक्र की चुदाई शायद जल्दी से शुरू कर दी थी, इतने दिनों के बाद दोनों जीजा-साली को अपने पुराने भरचक चुदाई वाले दिनों की याद ताज़ा करने का मौका मिला था, वो भी यकायक, तो वे बहुत ही कम प्राथमिक गरमाऊ प्रक्रिया किये ही चुदाई में उतर गये थे. एक दुसरे को देखते ही तो एक का नल और दुसरे की नदियाँ बहने लगी थी, क्या खाक गरम करने कराने की जरूरत थी दोनों को.

"गपागप...गपागप....गपागप......
गपागप" पिंकी की चूत रवि का लंड खाए जा रही थी, कुछ ही देर में इन आवाजों के अंतराल कम होते चले गए और दोनों के कराहने की आवाजें तेज़ होने लगी थी............और फिर दोनों की एकसाथ जोर से चीखने की आवाज़ आई और फिर पिंकी हचक हचक के कांपते हुवे कराह रही थी, चुदाई के चरम को फतह कर लेने के बाद ढलान से उतरते हुवे रह रह कर हलके हलके झटके लिए कंपकंपाहट और तड़पन, शायद रवि अभी भी हौले हौले लंड अन्दर बाहर कर रहा है, हर घस्से पर उछाला और आह, में समझ सकती हूँ ये स्थिथि......मैं दम साधे उधर हुई चुदाई के माहौल में खो गई थी............

बहरहाल, उधर चुदाई का तूफान गुज़र चूका था तो मैंने उधर से अपना ध्यान हटाया.एक गहरी सांस ली और करवट बदल कर अपनी योजना पर विचार करना शुरू किया...

अगले एक घंटे मैंने अपनी योजना पर काम किया, तब तक पिंकी और रवि की चुदाई का एक और दौर ख़तम हो चूका था. मैं उठी और उनके कमरे की ओर बढ चली. कमरे की लाईटें जली हुई थी. पलंग पर पिंकी पीठ के बल लेटी हुई थी, उसका एक हाथ अपने सर के नीचे था और दूसरा पास में करवट लेकर सो रहे रवि की पीठ पर था, एक टांग लम्बी कर रखी थी और दुसरी मोड़ कर रवि के पैरों पर टिकाई हुई थी कुछ इस तरह से की उसकी चूत पूरी तरह से खुली हुई थी और चूत से रवि का वीर्य उसके खुद के रस के साथ हौले हौले रिस रहा था. रवि ने अपना एक हाथ पिंकी के बोबे पर रखा हुआ था और उसका लंड पिंकी के पैर की ओट में छुपा हुआ था, दोनों की आँखे बंद थी और चेहरे पर अपार संतोष के भाव थे.

मेरी नज़र यकायक ही पिंकी के उन निप्पल की और पड़ी जिनकी रवि अभी थोड़ी देर पहले चूसने के समय तारीफ करते नहीं थक रहा था. मैं उसके बेड पर झुकी और पेट के बल लेट गई. अब उसकी चूचिन ठीक मेरी आँखों के सामने थी. सच में रवि ने कुछ गलत नहीं कहा था. उसकी चूंची ठीक काले घेरे की जगह से काफी फूली फूली लग रही थी जैसे कि वो एरोला ही अपने आप में एक मोटी चूंची हो और उस पर एक काली और कड़क निप्पल अलग से जड़ दी गई हो बहुत ही सुन्दर दृश्य था. मेरी उंगलियाँ उनसे खेलने के लिए बढ चली और जैसे ही मैंने उसे अपनी उँगलियों से हलके हलके कुरेदना चालू किया उसकी आँख खुल गई. उसने मुझे देखा और फिर बिना हिले वो मुस्कुराई और फिर शांति से आँख बंद कर ली. मैंने अपनी ठोड़ी हौले से उसके बड़े उभार के किनारे पर टिका दी कोहनी उसके पेट पर टिका कर उँगलियों से निप्पल से खेलने लगी. मेरी सांसे ठीक उसकी चूचियों पर पड़ रही थी. कुछ देर के बाद मैं थोडा सा आगे हुई और उसकी गदराई और सूजी हुई चूची अपने मुंह में भर ली और चूसने लगी. उत्तेजना के कारण उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी. उसके हिलने डुलने के कारण रवि की नींद में बाधा आई और उसने अपना मुंह उठा कर चल रहे कार्यक्रम का जायजा लिया. फिर वो कोहनी के बल थोडा उठा और झुक कर दूसरा चुच्चा अपने मुंह में भर लिया और फिर हम दोनों उसको भचक भचक चूसने लगे. कुछ ही देर में पिंकी के मुंह से आन्हे निकलने लगी और उसने एक हाथ मेरे सर से हटा कर रवि के सर पर चिपका लिया.

जैसे जैसे हम कड़क चुसाई करते जा रहे थे वैसे वैसे पिंकी के हाथों की पकड़ हमारे सरों पर मज़बूत होती जा रही थी और वो उन्हें अपने बोबों पर खिंच रही थी.........

"चूसो और जोर से चूसो, काट डालो सालियों को बहुत परेशान करती है, खा जाओ इन्हें कच्चा ही, चबा डालो..... हाँ ऐसे ही.... जोर से..... और जोर से" उत्तेजीत होकर वो बडबडाने लगी.
हमें भी वो फूली फूली चून्चिया चूसने में इतना मज़ा आ रहा था कि हम बस उन्हें चूसे ही जा रहे थे और वो हम दोनों के सरो को अपनी ओर ठेलते हुए मसले जा रही थी....पांच सात मिनट तक कोई हटने हटाने को तैयार ही नहीं था.

तभी पिंकी चीखी - अरे मेरा कुछ करो यारों, मैं तो बस झड़ने के करीब पहुँच चुकी हूँ....हम रुके तो उसने हमें झिंझोड़ा और कहा- रुको मत, रुको मत चूसते चूसते ही कुछ करो. हमने फिर चुसाई चालू कर दी. रवि चूसते चूसते ही थोडा ऊपर उठा और अपने शरीर को पिंकी के ऊपर खिसकाने लगा और बिना उसका निप्पल छोड़े वो उसके पुरे शरीर पर आ गया. पिंकी ने अपने पैर दूर दूर फैला दिए और रवि का लौड़ा पिंकी की चूत पर आ गया. मैंने भी बिना निप्पल छोड़े थोडा सा खिसक कर रवि के लिए थोड़ी जगह बना दी. अब उसने अपने लौड़े से पिंकी कि चूत में घस्से मरने चालू कर दिए. पिंकी उछल उछल कर रवि के लंड को और अन्दर खाने का प्रयास कर रही थी.

"तेज़...और तेज़....जोर से .....हाँ ऐसे ही ....और अन्दर .....पूरा घुसेड दे.....मार मार और जोर से मार .....आआआआआ......मैं गई ईईईईईईईईईई" निप्पल की अबाधित दोनों ओर की चुसाई और रवि की फटाफट चुदाई के चलते पिंकी भड-भड़ा के बुरी तरह से झड गई. एकदम लुस्त हो गई. हम दोनों ने उसके बोबे छोड़े. उसने अपना लंड बाहर निकाला और अपने हाथ से मुठियाने लगा क्योंकि वो भी आधे रास्ते तक पहुँच चूका था और अब रुकना मुश्किल था.
क्रमशः................................
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07-19-2017, 09:53 AM,
#8
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--8
गतांक से आगे..........................
मैंने पिंकी को छोड़ा और रवि के लंड की ओर लपकी. उसे धक्का देकर गिराया और उसकी टाँगे चौड़ी करके अपने हाथों से उसका लौड़ा थाम लिया और उसे अपने मुंह में गप्प से गायब कर दिया. अब मैं बड़े ही कड़क तरीके से उसका लंड चूसने लगी. रवि ने अपना एक हाथ पिंकी के थूक से सने बोबे पर रख दिया और उनसे खेलने लगा और मैंने उसको अगले दो मिनट में ही झडा दिया. उसका माल मेरे मुंह से रिस रिस कर पुनह: उसके लंड के सहारे बहने लगा. मैंने अब अपना सर उसकी जांघ पर टिका दिया और अगले दो तीन मिनट उसके लंड को चूसती ही रही.....रवि का लंड थोडा ढीला हो गया था और मैंने सारा का सारा माल चट कर डाला.

कुछ देर के आराम के बाद रवि उठा....साथ ही साथ पिंकी भी उठ गई. रवि ने मेरे पीठ पर हाथ फिराने चालू किये और पूछा कि तू तो रह गई. चल हम दोनों मिल कर तेरी चूत का पानी निकाल देते है तो मैं बोली अभी थोड़ी देर बाद देखते हैं, परन्तु पहले मेरी बात सुनो. एक बहुत ही जरूरी बात करनी है.

और फिर मेरी बात सुनते सुनते दोनों की आँखे फैलती चली गई..

सुबह मेरी ९ बजे आँख खुली. रवि मेरी बगल में सोया पड़ा था. रात में जब उन दोनों को अपनी योजना बताई तब वे दोनों एकदम रोमांचित हो उठे थे. फिर हमने मिलकर सब कुछ तय किया और फिर मैं अपने कमरे में सोने आ गई. रवि ने कहा कि पिंकी के साथ एक और राउण्ड निपटाकर तुम्हारे कमरे में सोने आ रहा हूँ.

बाहर से पिंकी और अमित की आवाजें आ रही थी. मैं तुरंत बाथरूम में घुस गई. तैयार होकर मैंने रवि को उठाया और बाहर चली गई.

दोपहर में खाने की टेबल पर-

अमित: तो रवि, खाने के बाद का क्या प्रोग्राम है.

रवि: यार अमित, यहाँ आये हैं तो मिंटू का नया फर्म हाउस भी देख आयें, उसे पता चला तो बहुत नाराज़ होगा. रोमा को साथ ले जा रहा हूँ, वो एक बार जा चुकी है वहां.

अमित: ठीक है यार पर वहां ज्यादा रुकना मत, शाम को कहीं चलेंगे साथ.

खाने के बाद सब वाश बेसिन हाथ धोने चले जाते हैं. मैं पास ही बाथरूम की तरफ हाथ धोने बढ जाती हूँ और गिले फर्श पर पैर रखते ही में पेट के बल गिरने का नाटक करते हुए एक जोरदार चीख मारती हूँ. रवि मुझे उठा कर बाहर बेड पर लिटा देते हैं. थोड़ी देर बाद मैं बताती हूँ कि अब मैं काफी ठीक हूँ. रवि बोलता है कि चलो मैं अकेला ही मिंटू से मिलकर आ जाता हूँ परन्तु तभी पिंकी बोलती है कि वो रवि के साथ चली जाती है दीदी तब तक आराम कर लेगी. अगले पंद्रह मिनट में दोनों जल्दी ही लौट कर आने का बोल कर निकल जाते हैं.

अभी तक सब कुछ हमारी योजनानुसार ठीक चल रहा था.

अब मैं अमित को बोलती हूँ कि मैं कमरे में जाकर आराम करना चाहती हूँ और उठ कर जैसे ही कमरे की तरफ चलने लगती हूँ, उईईइ की आवाज़ के साथ पैर पकड़ लेती हूँ. अमित कहता है कि मेरे कंधे का सहारा ले लो और फिर एक हाथ उसके कंधे पर रख कर धीरे धीरे रूम में जाकर लेट जाती हूँ. अमित परदे लगाकर बोलता है कि दीदी आप आराम करो मैं हॉल में टी वी देख रहा हूँ, कुछ काम हो तो आवाज़ लगा देना.

अब योजना के दुसरे चरण के लिए मुझे एक घंटे इंतज़ार करना था.

एक घंटे बाद मैं कराहते हुए अमित को आवाज़ लगाती हूँ. वो आकर पूछता है क्या हुआ.

मैं: लगता है गिरने के कारण नाभि फिर सरक गई है, बड़ा तेज़ पेट में दर्द हो रहा है.

अमित: डॉक्टर को लेकर आता हूँ अभी.

मैं: नहीं ये डॉक्टर वाली प्रॉब्लम नहीं है, मुझे अक्सर ऐसा होता है और रवि ये देसी तरीके से ठीक कर देता है.

और फिर मैं जोर जोर से कराहने लगती हूँ. और अमित की कोई बात नहीं सुनती हूँ बस पेट पकड़ कर कराहने लगती हूँ.

अमित घबरा कर रवि को फ़ोन लगा कर उसे सब बताता है. कुछ देर बात करके आखिर में वो बोलता है....... ओके मैं देखता हूँ ........

फिर फ़ोन कट करके बाहर चला जाता है......२ मिनट बाद वापिस आता है. मैं कराहते हुवे पूछती हूँ क्या हुआ.

अमित मेरे पास आकर मेरी सर पर हाथ फेर कर चिंतित स्वर में कहता है कि रवि को तो वापिस आने में बहुत वक़्त लगेगा क्योंकि वो होशंगाबाद रोड पर जाम में फंस गए हैं तो पिंकी ने सुझाव दिया कि पास वाली निधि भाभी को बुला लाओ उन्हें फ़ोन पर समझा कर बता देंगे कि क्या और कैसे करना है.

मैं: तो फिर?

अमित: निधि भाभी के यहाँ तो ताला लगा है.

पिंकी तो पता था कि भाभी आज बाहर गई हुई है तो वहां अमित को ताला ही तो मिलना था.

मैं: तो और कोई भाभी या आंटी को बुला दो.

अमित: और तो कोई नहीं रहता आस पास.

मैं फिर से थोडा तड़पने का नाटक करती हूँ. अमित बेचारा डर के फिर रवि को फ़ोन लगता है. इस बार वो स्पीकर चालू कर देता है. उधर से पिंकी की हेल्लो की आवाज़ आती है और वो पूछती है कि निधि भाभी को फ़ोन दो मैं समझाती हूँ क्या करना है.

अमित: पिंकी, निधि के यहाँ तो ताला लगा है.

पिंकी: मर गए, अमित तुम्हे पता है दीदी का दर्द बढ गया तो बहुत तकलीफ होती है उन्हें. हमें तो अभी भी २ घंटे से काम नहीं लगेंगे बहुत लम्बा जाम लगा है.

फिर वो रवि से पूछती है कि अब क्या करें. रवि उससे पूछता है कि तुम्हे और अमित को एतराज़ ना हो तो अमित ही हेल्प कर दे रोमा की.

पिंकी: पर जीजू उसमे तो.........मुझे पता है आप दीदी का कैसे इलाज़ करते हैं........कैसे कर पाएंगे अमित वो सब......और शायद दीदी तो राज़ी ही न हो उस सब के लिए..........हाँ, हालात को देखते हुए, मुझे कोई एतराज़ नहीं है.........मैं दीदी की ऐसी हालत बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूँ.

रवि: तो जल्दी जल्दी बताओ अमित को कि क्या करना है, रोमा बेचारी तड़प रही होगी......हे भगवान् हमें भी अभी जाम में फँसना था.

पिंकी: अमित, जरा फ़ोन को स्पीकर पे तो करना दीदी की रजामंदी लेनी हैं.

अमित: फ़ोन स्पीकर पे ही है और दीदी तुम्हारी बात सुन रही है......तो जल्दी बताओ क्या करना है. दीदी बहुत दर्द में है.

पिंकी: अमित, ये इतना आसान नहीं होगा तुम्हारे लिए और दीदी के लिए तो जरा भी नहीं, इसलिए पहले उनसे तो पूछ लूं ......दीदी, अमित कर देगा तुम्हारा इलाज़, तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं.

दीदी.............दीदी.........
...सुन रही हो क्या.........

अमित: पिंकी, शायद दर्द बहुत ज्यादा है वो सुन तो रही है पर बोल नहीं पा रही है.

पिंकी: अमित ............बस तुम सुनो और समझ कर ठीक तरह से करना............अब वक़्त गंवाने का कोई फायदा नहीं.......तुम बस ये सोचना कि तुम डॉक्टर हो और तुम्हारे सामने जो है वो तुम्हारी मरीज़ है और तुम्हे उसे ठीक करना है. जरा भी मत शर्माना.

अमित: ऐसा क्या करना है मुझे.

पिंकी: अभी बताती हूँ............

तभी मैं बोलती हूँ................अमित, दर्द बर्दाश्त नहीं होता अब तो........... आआआआआआ ..............समझ लो पिंकी से कैसे करना है........आआआआआआआआ.......

मेरी हरी झंडी देख कर अमित तेज़ी से फ़ोन पर क्या करना है वो पिंकी के मुंह से सुनता है.............सुनते सुनते उसे इतनी शर्म आने लगती है कि वो स्पीकर ऑफ करके कान में लगाकर सुनने लगता है. उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ती साफ़ नज़र आ रही थी और पसीना पसीना हो रहा था........मैं बेसुध सी होने का नाटक करते हुए कनखियों से उसे देखती जा रही थी...........हमारी योजना एकदम सही जा रही थी.


अमित: (धीरे से), ये सब मैं कैसे कर पाउँगा, तुम एक बार और सोच लो कोई और रास्ता है क्या...........

अरे मेरे भोंदू महाराज और कोई रास्ता नहीं है, आज तुझे मुझसे कोई नहीं बचा पायेगा..........मुझे ये सोचते हुए मुस्कराहट सी आने लगती है पर मैं दबा जाती हूँ. अभी तो मुझे बहुत कुछ दबाना है, पुरे इलाज़ के दौरान कंट्रोल रखना है और मैं कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार थी.

अमित: ठीक है पिंकी, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता हूँ, दीदी ठीक हो जाये बस.....................ओके, बाय.

फ़ोन बंद करके वो एक मिनट मुझे देखता है और जैसे ये निश्चय करने का प्रयास कर रहा था कि वो करे या न करे...........पर और कोई रास्ता नहीं था उसके पास, उसकी प्यारी और पतिव्रता बीवी ने उसे ऐसा करने का बोला है. वो जल्द ही अपने अपराध बोध को झटक कर मेरे पास आया और सर पे हाथ फेरा कर बोला दीदी धीरज रखो मैं जल्दी ही कुछ करता हूँ. और फिर वो पिंकी के बताये अनुसार गरम तेल और घिसा चन्दन लाने के लिये किचन में घुस गया.

मेरी योनी ने अभी से पनियाना शुरू कर दिया. देखती हूँ ये भोंदू महाराज आज मेरे से कैसे बचेगा.

जब से पिंकी की सुहागरात हुई है पिंकी ने अपने इस भोंदू की चुदाई के ऐसे गुण गान किये कि मैं पिंकी से जलने लगी थी. दीदी ऐसे चोदता है, वैसे चोदता है. गोद में उठा के चोदता है, हवा में निचे लटका के चोदता है, गर्दन में उल्टा लटका कर चूसता चुसवाता है, इतनी ताक़त है मेरे दारा सिंग में. और जब मैंने पिंकी से पूछा कि यार मेरी चूत का भी भुरता बनवा ना अपने पहलवान से तो पिंकी गंभीरता से बोली थी कि ये हनुमान भक्त भोंदू महाराज बहुत स्ट्रोंग केरेक्टर वाले हैं, मेरे अलावा किसी और को चोदना तो बहुत दूर, हाथ तक नहीं लगायेंगे किसी को. मैं अमित से चुदने के लिए बहुत आतुर हो उठी. और उसपे तुर्रा ये कि हर रोज़ दोपहर फ़ोन पर पिंकी, पिछली रात की चुदाई के किस्से सुना सुना कर, सुना सुना कर, पागल करती रही. अमित बॉडी बिल्डिंग और कराटे का चेम्पियन था और देखने में बहुत ही आकर्षक. उसकी सेक्स पॉवर से पिंकी बहुत ज्यादा संतुष्ट थी और कभी कभी तो उसे ही खुद अमित के हाथ जोड़ने पड़ते थे कि मेरे बाप अब तो सोने दे, कितना चोदेगा, थकता ही नहीं है, रुकता ही नहीं है, सांड जैसी पॉवर और खिलोने जैसा उठा कर हर तरह के पोज़ में बेहतरीन चुदाई. लंड भी उसका सांड जैसा . जब पिंकी ने इस मामले में मेरी कोई भी मदद करने में अपनी लाचारी जताई थी तभी से मैंने ठान लिया था कि मैं पिंकी के पिंकू का धर्म भ्रष्ट करके ही रहूंगी चाहे जो हो और आज वो मौका हाथ लग गया था . कल रात जब मैंने रवि और पिंकी को ये योजना सुनाई तो वो दोनों फटाक से तैयार हो गए.
क्रमशः................................
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07-19-2017, 09:53 AM,
#9
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--9
गतांक से आगे..........................
तभी अमित कमरे में प्रवेश करता है

अमित: लो दीदी मैं तेल गरम कर लाया हूँ.

मैं बस बेसुध होने का नाटक कर के पेट को पकड़ के आँखे बंद किये धीमे धीमे कराह रही थी जैसे दर्द ने मेरे कराहने की भी शक्ति ख़तम कर दी हो. मेरी कोई प्रतिक्रिया न होते देख वो थोडा सहज हुआ कि उसे जल्दी ही अपना काम निपटाना है.......अब मैं भी देखना चाहती थी कि जेसा बताया गया होगा इसे सिर्फ उतना उतना ही करेगा या मुझे बेसुध सा देख कर कुछ कमीनापन भी सूझेगा इसे.

सबसे पहले तो उसने मेरे दोनों पैरों के अंगूठों पर रबर-बेन्ड चढ़ा दिए. अब उसने मेरी नाभि से मेरा हाथ हटाया और पूछा दीदी, बहुत दर्द है, तो मैंने बस हूँ कहा, फिर उसने बहुत कुछ पूछा तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया.......कुछ कुछ देर में बस कराह रही थी........

वो बेचारा अब बहुत परेशान हो रहा था क्योंकि मैंने नाइटी पहन रखी थी और अब उसे मेरी नाभि को बेपर्दा करना था. कांपते हाथों से उसने मेरो नाइटी ऊपर करनी शुरू की, घुटनों के ऊपर लाकर वो रुक गया, फिर उसने ऊपर की परन्तु नीचे से फँसी होने कि वजह से वो जांघो से ऊपर नहीं हो पा रही थी. मैं आँखों में थोड़ी सी झिरी बना कर उसके चेहरे की रंगत देख रही थी. उसने अपना एक हाथ मेर पुट्ठे के नीचे फसांया और फिर दुसरे हाथ से जांघ ऊँची करके वो नाइटी ऊपर खींचने लगा. उसकी पूरी हथेली मेरी जांघो और पुट्ठों से रगड़ खा रही थी. इसी तरह से उसने दूसरी तरफ से भी मेरे पुट्ठो से नीचे फँसी नाइटी को ऊपर किया.

और जैसे ही आगे से ऊपर सरकाई वो शाक्ड रह गया. मैंने पेंटी नहीं पहन रखी थी और मेरी खुली चूत उसकी आँखों के सामने थी, उसने मेरी तरफ देखा, मैंने आँखों की झिरी में से उसे देखा, उसने चूत से परे मुंह घुमा कर नाभि को खोला. अब तेल की आठ दस बुँदे नाभि पर गिराई और बड़ी हिम्मत करके अपने होंठ का अंदरूनी भाग पेट पर रखा और हलके से मालिश देने लगा. बेचारा.....मान गया की हाथ से मालिश मत करना वो कड़क होते हैं....शरीर के सबसे मुलायम अंग से हलकी मालिश देना.

उसने दोनों हाथ दूसरी और टिकाये और झुक कर मेरी नाभि की अंदरूनी होंठो से मालिश करने लगा. इतनी मुलायम मालिश से मेरी उत्तेजना बड़ने लगी परन्तु जाहिर नहीं कर सकती थी सो मैंने फिर कराहना चालू कर दिया. वो रुका फिर जब मैं चुप हुई तो उसने फिर शुरू कर दी.....वो मालिश क्या...एकदम चटाई थी होंठो से..... थोड़ी ही देर में वो कामुक मालिश में तब्दील हो गई और मैं अपने को जज़्ब किये इस स्थिति का घोर आनंद लेने लगी. ५ मिनट बाद अमित हटा वहां से.

अब वो मेरी ओर पीठ करके खड़ा हो गया. मुझे पता था कि अब उसे अपना लंड निकाल कर घोट घोट के खड़ा करना है ताकि वो मेरी नाभि को अपनी उर्जा दे सके. इस रामबाण रेकी की विधि का आविष्कार कल रात इसी कमरे में हुआ था. काफी देर लगा रहा था, शायद उसके संस्कार उसके आड़े आ रहे थे, पर मेरे जाल में फँस कर वो फडफडा तो सकता है परन्तु बच नहीं सकता.

फिर उसके हाथ हिलते देखे मैंने, हाँ लंड की घुटाई शुरू कर दी थी उसने, मैं उसके पहलवानी लंड के प्रथम दर्शन की प्रतीक्षा में रोमांचित हुई जा रही थी. लंड तो बहुतेरे देखे जीवन में परन्तु, मेरे से भी ज्यादा चुदक्कड़ मेरी रांड बहन को जिस लंड ने अस्थाई तौर पर पतिव्रता नारी बना दिया उस लंड में कुछ ना कुछ तो बात होगी ही.

कुछ देर की लंड घुटाई के बाद वो जैसे ही पलटा, मेरी नज़र एक श्वेत-वर्ण, झांट विहीन, काफी उभरे मुख वाले, स्वस्थ, तेजस्वी और विशालकाय दंड रूपी स्त्री-चुदाई यंत्र पर पड़ी तो मेरी फुद्दी के कोने कोने में मौजूद सनसनी मचने वाले हर एक पाइंट में जोरो से खुजली मचने लगी. चूत का हर एक तंतु इस मूसल से अपने आप को रगड़वाने को होड़ में पसीना पसीना हो रहा था और वो सारा पानी मेरी बुर की झिरी में से तेज़ बहाव के साथ बाहर आने लगा.

अब उसे अपने खड़े लंड को नाभि के छेद से सटा कर अपनी उर्जा देते हुवे होले होले मालिश करना थी.....वो मेरी चूत के ठीक ऊपर बैठ गया और अपने भीमकाय अस्त्र को अपनी दोनों हथेलियों से थमा और आगे से निचे झुकाते हुवे अग्र भाग को नाभि के छेद पर टिका दिया और आँख बंद करके वो उर्जा हस्तांतरण करने लगा. फिर वो मेरी नाभि को घोटने लगा, फिर नाभि के चारो और सुपाड़े से मसलने लगा. उसकी इस लंड घिसी से जहाँ में सातवे आसमान पर पहुँच गई थी तो काम से काम पांचवे आसमान तक तो वो भी पहुँच गया होगा क्योंकि उसे भी काम ज्वर चड़ने लगा था.

साले ने बहुत नाभि चुदाई कर डाली. जैसे तैसे वो वहां से हटा और फिर उसने एक प्याली उठाई जिसमें वो चन्दन घिस कर लाया था. अब थोडा चन्दन अपनी जीभ पर लिया और उसे सीधा नाभि में घुसेड दिया .... मैं सिहर उठी.........कुछ देर जीभ छेद के अन्दर घुमाई और फिर चन्दन में डूबी जीभ पुन: मेरे छेद में आ गली. ऐसा उसने बराबर ९ बार किया. थोडा रुका वो. शायद अपनी उत्तेजना को काबू में करने का प्रयत्न कर रहा था.

घडी भर के विश्राम के बाद अब वो मेरे उभारों कि ओर आया. फिर उसने मेरी नाईटी ऊपर सरकाना चालू की और थोड़ी जद्दोजहद के बाद पूरी निकाल दी. मैंने ब्रा नहीं पहनी थी.....उसकी नज़र दो मोटे मोटे मम्मो पर पड़ी. उसका लंड जो अभी थोडा मुरझा गया था वो पुन: स्पंदित होकर तरंगित होने लगा और झटके से लहू-गुंजीत होकर उर्ध्व-अधोगति करने लगा. पिंकी के बताये अनुसार उसने फिर चन्दन जीभ पर लिया और अबकी बार मेरे एक निप्पल पर लथेड दिया. फिर ऐसे ही दुसरे पर भी लगाया. फिर पहले पर. .........और हाँ लगाते समय वो जीभ को घुंडी की परिधि पर पूरा राउण्ड राउण्ड घुमा रहा था. ऐसा उसने दोनों दानो पर ९-९ बार किया. मेरी घुन्डिया एकदम कड़क हो गई.

उसने चन्दन की प्याली निचे रख दी. अब जो वो करने जा रहा था, बेचारा उसे भी इलाज़ का हिस्सा ही समझ रहा था जबकि मेरी तो उसके बाद जान ही निकल जानी थी.

अब उसने अपने दोनों हाथों में मेरे एक कबूतर को कस के भरा, भींच कर ऊपर कि और उभारा और कंचनजंगा की चोटी सद्रश्य आसमान की और मुंह ताकते मेरे नुकीले छोर को अपने मुंह में गहराई तक भर लिया. अब उसे चूचीं पर लगे चन्दन को चूस चूस कर अपने मुंह में इकट्ठा करना था. पिंकी ने बताया होगा कि चन्दन और मुख-लार, स्तन के संपर्क में आकर दर्दनिवारक अमृत बन जाती है सो वो भी कुछ देर तक अपनी लार को चन्दन लिपटी घुंडी को चूस चूस कर अपने मुख में अमृत इकट्ठा करता रहा.....

फिर उसे पूरा नाभि में भर दिया. गरमा गरम द्रव की अनुभूति अपनी नाभि में पाकर मेरी चूत में एक बार फिर बिजली कौंध गई....................... फिर इसी तरह से वो दूसरी चूचीं को चूसने लगा ....और फिर चूसता ही चला गया....कोई पांच मिनट हो गए वो भोंदू हटा ही नहीं............. और इधर मैं उसके बेलगाम दुग्ध-पान से उपजे अवर्णनीय आनंद में लिपटी मदहोश सी हुई जा रही थी............ पर किसी भी तरह से, अपने को प्रतिक्रिया विहीन बनाये रखना, मेरी प्लानिंग का अहम् हिस्सा था........ वो मग्न हो कर चुसाई के मज़े लेने लगा .....और देखो तो..... वो, मेरे दूध्दू का भुक्कड़....... मदहोशी के आलम में, भूलवश सारा चन्दन ही गटक गया. ............ उसे जब इस बात का अहसास हुआ तो उसने अपना माथा ठोका......... क्या करा मैंने? परन्तु.....लेकिन.....but ......मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना होता देख, उसने थोड़ी राहत महसूस की.......वो क्या था कि, अब डाक्टर बाबु को भी इलाज करने में मज़ा आने लगा था और ये उसके बात चेहरे से साफ पता चल रही थी.

अब उसने मुझे धीरे से पेट के बल लिटाया. दोनों अंगूठो में तेल लगा कर एक साइड बैठ गया और गर्दन के नीचे रीड की हड्डी के दोनों और अंगूठे टिकाये और हलके हाथ से नीचे की ओर मालिश करते हुए सरकाने लगा. जैसे ही नाभि के पिछले भाग के एक खास पॉइंट पर दबाव पड़ा, मैं जोर से चीख कर झटके से उछली और पीठ के बल दूर जा गिरी और फिर बेहोश हो गई. योजना आयोग की प्रवक्ता पिंकी रानी से उसे हिदायत मिली ही हुई थी कि, अगर मैं इस तरह से जोर का झटका खा कर बेहोश हो जाती हूँ, इसका मतलब......... मतलब......यानि कि नाभि ठीक जगह बैठ गई है और उसका इलाज़ सफल.

मेरे शरीर का अब नज़ारा कुछ इस तरह था कि मेरे दोनों पैर चौड़े थे........ चूत, पहलवान के लंड की आस में एकदम मुंह खोले हुई थी. मेरा मुंह, कन्धा, एक ओर का चुच्चा और एक हाथ बिस्तर के छोर से नीचे की ओर ढुलके हुवे थे............... अब वो उठा, मेरी तरफ आया और अपने कटी-प्रदेश के मध्य स्थित झुला झूलते मुलायम चर्म से आच्छादित मांस के सख्त दंड को एक हाथ में थामा और दुसरे हाथ से मेरे ढुलके पड़े यौवन-उभार को नोंचते हुवे, कुछ जल्दी जल्दी घस्से मारे........ कुछ देर पश्चात् उसने मेरे लटके शरीर को उठाया......एकदम फूल जैसे...... क्या मज़बूत पकड़ थी.........वाह........ और फिर आराम से बिस्तर के बीचो बीच रख दिया.

अब उसे आधा घंटा इंतज़ार करना था मेरे होश में आने का. वो मेरे पास बैठ गया. अब उसे अपने गहरे अंतर्मन में दबे कमीनेपन को सतह पर आकर अपना शैतानी रूप दिखाने की, वक़्त ने कुछ लम्हों की आज़ादी प्रदान कर ही दी थी सो वो अपने लंड को कुछ देर मुठियाया और नज़रे मेरे मम्मो पर टिका दी.......तदुपरांत, एक बार मेरी ओर नज़र डाल.......वो मेरे स्तन-अंकुरों पर झुका और झकाझक उन्हें पीने लगा. चूसते वक़्त हाथों से वो दोनों स्तनों की विस्तृत गोलाइंयों को निचोड़ रहा था. शायद पर्वत-शिखर पर उसके अति-व्यस्त मुखारबिंद को 'दो बूँद ज़िन्दगी की' तलाश थी. मेरी घाटी के दोनों ओर गगन की बुलंदियों को स्पर्श करती अट्टालिकाओं पर बारी बारी से आगमित-प्रस्थित होकर उन्हें अपने लबों से बुरी तरह से खंगाल रहा था. पांच पांच मिनट तो दोनों पर्वतों पर गुज़ारे होंगे उसने. उसकी इस अदम्य कारगुजारी के फलस्वरूप दूर नीचे की ओर अवस्थित मेरे दुसरे दर्रे से फिर से एक बार पहाड़ी नाले में घनघना के उफान आया और अविरल तराई की और बह चला.

बहुत देर के बाद वो पहाड़ से उतरा. लेकिन ये क्या ......इस बार तो उसका जानवर मुझे कुछ खतरनाक नज़र आया. उसने अपने लंड को हाथ में पकड़ा और थोडा सा उमेठ कर मेरे होंठो पर फिराया. फिर बड़ी तेज़ी से उसका सुपाडा मेरे लबों पर स्कीइंग करने लगा, चिकनाई स्वयं सुपाडा-प्रदत्त थी इसलिए अठखेलियाँ नजाकत से चल रही थी. अब तो फिर उसने अगला पैंतरा चला और थोडा होंठ खोल कर अपने स्निग्ध शिश्नाग्र को मेरे मुलायम और मखमली अंदरूनी होंठो पर रगड़ने लगा. क्या बताऊँ.........उसके बाद तो मुख-मैथुन की समस्त तकनीकें आजमाने लगा. अचानक उसे समय-बध्धता का कुछ ख्याल आया और फिर वो कुछ अति-विशिष्ठ क्रिया के संपादन के लिए पहाड़ी नाले की और चला गया.

उठ कर वो मेरी चौड़ी टांगो के बीच लेट गया और जांघो को पकड़ कर उन्नत कर दिया. जैसे ही उसने चौड़ाई को बढाया उसे ताज़े निर्मल जल से लबालब भरे, अभी अभी फूट पड़े चश्मे की झलक दिखाई दी. रह रह कर उस चिकनी, गर्म और गीली दरार के एकदम नीचे स्थित छिद्र से कंचन यौवन जल छलके ही जा रहा था.....छलके ही जा रहा था. और नीचे तराई पर नज़र डाली तो दंग रह गया. नीचे पूरा बिस्तर गीला था. उसने नीचे छुआ, फिर मेरे कंपकपाते भगोष्ठों को स्पर्श किया और वहां की नमी को अपनी उंगली से लपेटा. अब उसने उंगली पर लगे गीलेपन को सुंघा. और सूंघते ही शाक्ड हो गया. बेचारा सु सु समझ रहा था परन्तु वो तो मेरा जूस था. वो एकदम कन्फ्यूज़ हो गया था. उसने मुझे झिंझोड़ कर उठाया. शायद उसे कुछ शक हो गया था.

लेकिन जब मैं नहीं उठी तो वो बोला माँ का भौसडा, जो होगा देखा जायेगा. कामदेव के बाणों से आहत उसका दिमाग वो सब कुछ नहीं सोचना चाहता था जो तथ्य अब आईने की तरह बिलकुल साफ़ था. कोई बेहोशी में उत्तेजित होकर गंगा जमना कैसे बहा सकती है.........शायद मेरा प्रतिक्रिया-विहीन शरीर उसे कुछ और ही संकेत दे रहा था...... तो वो फूल्टू कन्फ्यूज़ था. अब वो घुटनों के बल बैठ गया और अपने लंड को हिलाने लगा. बेचारा बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया था, थोड़ी देर हिलाता रहा फिर एकदम से मेरी चूत पर अपना लंड टिकाया और अन्दर घुसेड़ने लगा. मैं दम साधे पड़ी रही और फिर वो मेरे ऊपर आ गया. उसने अपना पूरा वजन अपने हाथो पर दे रखा था ताकि मैं उठ ना जाऊं .

अभी उसका आधा लंड अन्दर घुसा था अब वो धीरे धीरे घस्से मार मार कर पूरा लंड अन्दर घुसाने लगा. मेरी चूत में आग लग चुकी थी. अब योजना के अनुसार, ऐन इसी वक़्त, मेरे दोनों सह-कलाकारों को मंच पर एंट्री मारना थी, जो कब से बाहर छुपे बैठे रहे होंगे और अन्दर चल रही एकल प्रस्तुति का लुत्फ़ उठाते हुए अपनी रास लीला भी सवस्त्र रचा रहे होंगे. अचानक दोनों ने अन्दर प्रवेश किया और मंच के मतवाले खिलाडी की खोपड़ी को एकदम झन्नाटे से अंतरिक्ष की सैर करा दी. जहाँ एक और अमित उन्हें वहां अचानक देख कर हतप्रभ रह गया वहीँ वे दोनों भी अनहोनी घटना को देखे जाने पर, चेहरे पर आने वाले भावों को, जीवन्तता से उभार कर अपने किरदार का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रहे थे.......

पिंकी दोनों हाथों से अपना सर पकड़े अविश्वास की मुद्रा में मंच के समीप आई. रवि ने उसके पीछे आकर कंधे पर अपना हाथ रख दिया. दोनों थानेदारों द्वारा रंगे हाथों पकड़ लिए जाने पर वो एकदम जड़ हो गया. अभी भी उसका आधा लंड मेरी मस्ती में पिनपिनाती संकरी गली में बेशर्मी से आवारागर्दी करने में तल्लीन था.
क्रमशः........................
........
-
Reply
07-19-2017, 09:53 AM,
#10
RE: मज़ेदार अदला-बदली
मज़ेदार अदला-बदली--10
गतांक से आगे..........................
वहां चुदाई का दृश्य देखकर दोनों शाक्ड थे. पिंकी मेरी ओर लपकी और चेक किया तो मुझे बेहोश पाया. बड़ी मुश्किल से उसके हलक से कंपकपाती लेकिन गुस्से से भरी आवाज़ में ये बोल फूटे-

पिंकी: अमित.........................
ये क्या कर रहे थो तुम...........

वहां का दृश्यावलोकन करके रवि ने भी अपना सर पकड़ लिया....हे भगवान् ये क्या देख रहा हूँ मैं.............

अब जैसे अमित को होश आया और उसने अपना लंड खींचा और पिंकी से याचना भरे स्वर में बोला....मुझे माफ़ करदो, पता नहीं मैं बहक गया था, मुझे खुद पता नहीं ये मुझसे क्या हो रहा था.

पिंकी ने अब प्रचंड रूप धारण कर लिया था........ ऐय्याशी कर रहे थे और क्या........, हे भगवान...... तुम्हारा असली रूप सामने आ गया मेरे.

अमित: पिंकी आधा तो तुम्ही लोगों ने करवाया मुझसे और अब मुझ ही पर इलज़ाम लगा रहे हो. क्यों इलाज करवाया इस तरह से, इसके बोबे चूसो, लंड निकाल कर खड़ा करो, नाभि को चूसो, लंड से मसाज़ करो, उसपर, ये इस तरह मेरे सामने पड़ी थी, मेरे हाथ से बात निकल चुकी थी........मुझे इतना आगे तुम्ही लोगों ने बढ़वाया और अब मुझे कोस रहे हो.

रवि: अमित, ये इसी तरह से हर बार ठीक होती है तो मैंने यही तरीका पिंकी के माध्यम से तुमको बताया, पर तुम तो..............हे भगवान्.

पिंकी: अमित, मैं तुम्हे माफ़ नहीं कर सकती, तुमने वो किया है जिसका कोई प्रायश्चित ही नहीं है...........और वो रोने लगी.

उन दोनों की शानदार अदाकारी देख कर जोर से आती हंसी को भी रोका मैंने.

पिंकी: देखो देखो अभी भी नियत ठीक नहीं, अपने लंड को देखो अभी भी खड़ा है.

वो तुरंत संभला और अपना लोअर पहन लिया और सर पकड़ कर खड़ा हो गया, उसकी निगाहें मुझ पर पड़ रही थी.

पिंकी फिर बोली....अभी जरा सी भी शर्म बची हो ऐसे घूरना बंद करो और दीदी के ऊपर चादर डाल दो. ऐसा लग रहा है कुछ करने नहीं मिला तो अपनी आँखों से ही................और फिर वो रोने लगी.

तभी रवि उसकी और बड़ा और उसके सर पर हाथ रख कर उसे दिलासा दिलाने लगा......जो होना था वो तो हो गया, हम तो लुट ही चुके हैं, अब क्या हो सकता है.

ये लोग अमित का अपराध बोध बड़ा रहे थे.

पिंकी: इसकी पत्नी के साथ ऐसा कुछ हुआ होता तब पता चलता इसे.

अमित: अरे माफ़ी मांग तो ली मैंने अब और क्या करूं.............. चल अगर इसे ही तू सजा मानती है तो मैं ये सजा भुगतने के लिए तैयार हूँ.

और वो आगे बढ कर पिंकी के कपडे निकालने लगा. पिंकी बच कर भागी पर कहाँ बच सकती थी.........रवि ने रोकने की कोशिश की तो उसे ऐसा धक्का पड़ा कि बेचारा बिस्तर पर मेरे पास आ गिरा. उसके कान मेरे मुंह के पास थे.........मैंने धीरे से कहा बहुत बढ़िया रवि........बस थोड़ी सी एक्टिंग और .........

उधर देखते ही देखते पिंकी को नंगा कर दिया उसने. पिंकी ने अपने हाथ से अपने यौवन को छुपा रखा था.

अमित अब रवि के पास आया. रवि देखो यही मेरी सजा है........ कुछ गलत कर रहा हूँ तो माफ़ करना परन्तु बीवी के बदले बीवी. तुम पिंकी के साथ वही सब करो जो मैंने दीदी के साथ किया है.
और यहीं मेरे सामने ही करो, मुझे अपनी बीवी को उस हाल में देखना ही पड़ेगा, जैसा बदकिस्मती से तुमको देखना पड़ा है. प्लीज़ यार, अपने कपडे उतारो और यहीं पर शुरू हो जाओ.

ये सब सुन कर रवि ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की परन्तु उस पर जैसे पिंकी को चुदवाने का जूनून सवार हो चूका था सो उसने रवि के पैर पकड़ लिए. रवि तब भी तस से मास ना हुआ तो अमित ने एकदम से अपना पैंतरा बदला और जोर से चिल्लाया............रवि....अब एक नहीं सुनूंगा किसी की भी, मैं अपराध बोध के साथ जी नहीं सकता, इसलिए तुम्हे ये हिसाब यहीं पर बराबर करना ही पड़ेगा और अभी के अभी.......और फिर उसने रवि को धक्का देखर पिंकी के पास पहुंचा दिया. रवि अभी भी चुपचाप खड़ा रहा.

अमित अब एक कोने में सिमटी सी खड़ी पिंकी के पास गया और उसे एक झटके में उठा कर पलंग पर मेरे बाजू में पटक दिया. फिर पलट कर जैसे ही एक चीख मारी ....रवि............... और अबकी बार रवि ने डरने का अभिनय करते हुए स्वीकृति में अपना सर हिलाया और अपने कपडे निकालने लगा......पिंकी भी बहुत डरने की एक्टिंग कर रही थी......रवि पूरा नंगा हो कर धीरे से पिंकी के पास जाकर खड़ा हो गया. अब अमित बोला - प्लीज़ पिंकी, उसका हथियार चूस चूस कर तैयार कर और ले ले अपनी दीदी पर हुए इस ज़ुल्म का बदला ....

पिंकी ने आदेश का पालन किया और रवि का खड़ा कर दिया.....रवि को अमित ने अब पिंकी के ऊपर आकर आकर चुदाई करने का इशारा किया .....रवि ने पिंकी के ऊपर आते हुए अपने फुंफकारते नाग को पिंकी की संकरी सी पिटारी में डाल दिया. नाग महाराज तो जैसे अन्दर घुसने को आतुर ही थे, एक ही प्रयास में पुरे के पुरे पिटारी में. अब रवि ने अपना जोर हाथों पर ले लिया परन्तु अब क्या करे वो इस सोच में पड़ गया. अमित ने तो बस यहीं तक ही किया था, क्या घस्से मरे या नहीं.

तभी अमित ने रवि की पीठ पर हाथ फेरा और बोला क्या बात है रुक क्यों गए. अब किसका इंतज़ार है, शुरू हो जाओ भाई.

उसका इशारा होते ही रवि ने हौले हौले पिंकी के टार्गेट पर निशने लगाना चालू कर दिया. हर निशाना सही जगह पर लग रहा था.

अपनी बीवी को चुदते हुए देखते देखते अमित का लंड यकायक करंट से भर उठा. वो बिस्तर पर खड़ा हुआ और फिर अपना लोवेर नीचे खिसका दिया. मूसल महाराज ने पुन: शक्ति अर्जित कर ली थी और अबकी बार उसे रोकने वाला कोई भी नहीं था. वो जोश में आने लगा और उसका हाथ उसके शाही लंड की ओर बढ़ा, यक़ीनन उसे दिलासा दिलाने के लिए कि, अब तेरी बारी भी आने वाली है और वो उसे मसलने लगा.

पिंकी ने जब अमित को बेशर्मी से अपना लौड़ा मसलते देखा तो उसने इशारे से रवि को बताया की देखो अमित को. रवि ने चुदाई रोक कर अमित की ओर देखा. अमित बड़ी ही बेशर्मी से अपनी खींसे निपोरकर बोला- लगे रहो मुन्ना भाई अपने काम पे, और मुझे भी अब अपना काम करने दो, यह कहकर वो नीचे झुका और मेरी चूत पर अपना लंड टिकाते हुवे उसे मेरे अन्दर डाल दिया और वो धीरे धीरे मुझे चोदने लगा. उसकी इसी हरकत का बेसब्री से इंतज़ार था मुझे........... मेरी तो अब जान में जान आई.

रवि और पिंकी ने ये देखा तो वो चौंक गए. पिंकी ने अमित से तीखा सवाल किया - अब ये फिर क्या करने लगे तुम.

अमित: जब सजा भुगत ही रहा हूँ तो कम से कम अपराध तो पूरा कर लूं, डाल तो दिया ही था मैंने, अब क्या फर्क पड़ता है, पूरी चुदाई की सजा भी वही बनती है जो इस वक़्त मैं भुगत रहा हूँ. इसलिए बातें का कम और काम ज्यादा. चलो रवि चलो, ठोको मेरी बीवी को फिर से.

पिंकी: पर अमित मुझे क्यों सजा मिल रही है, अपराध तो तुमने किया है.

अमित: क्यों री, पांच मिनट से अमित तुझे चोद रहा है और तुझे अभी भी ये सजा ही लग रही है, तू गरम नहीं हुई अभी तक और मज़ा नहीं आ रहा तुझे.

पिंकी: अमित तुमको तो पता ही है मेरा, बिना फॉरप्ले के मैं गरम कहाँ होती हूँ, अभी ये चुदाई तो एक सजा ही है.........................

अरे उसने तो ये बात बोलकर एकदम से मामला ही उल्टा दिया. अब अमित ने क्या बोलना है.........वही बोलना है जो हम उससे बुलवाना चाहते हैं.

अमित: रवि, क्या करते हो, भाई, उसकी सुक्खी-सुक्खी क्यों मार रहे हो. तुम उसको गरम भी करो, देखो तुमको अपनी पत्नी देकर कोम्पेंसेट कर रहा हूँ, तुम कम से कम पिंकी का तो थोडा ख्याल रखो ना.

रवि ने कहा- अब ये भी करना पड़ेगा............. ठीक है........और फिर वो पिंकी पर छा गया. उसके बोबे और होंठो पर टूट पड़ा.

इधर अमित ने भी धक्के लगाने चालू कर दिए और मैं अमित के लंड के दमदार घस्से अपनी चूत में खाकर धन्य हो रही थी......मैं मज़े से चुद रही थी भोंदू महाराज से और अपनी योजना के पूर्ण सफल हो जाने पर मन ही मन इतरा भी रही थी.

पांच मिनट में ही रवि और पिंकी ढेर हो गए और एक दुसरे की बाँहों में समां गए.

इधर अमित भी फुल पॉवर में मुझे चोद रहा था......मुझे अमित के झड़ने तक अपना झड़ना रोके रखना था....

कुछ देर की तगड़ी मारामारी के बाद अमित तनिक सा अकड़ा और ये संकेत था मेरे लिए और मैंने भी अपनी पतंग को एकदम से ढील दे दी. दोनों की पतंगे सुदूर आसमान में एक दुसरे से गुथ्थम गुथ्था होकर बड़ी तेज़ी के साथ अपनी मंजिल की ओर बही चली जा रही थी. दोनों के दोनों गुरुत्वाकर्षण के किसी भी आभास से परे बस उड़े चले जा रहे थे.............

अब उसने जोर से चीख मारी और अपनी पिचकारी चला दी.........

उसकी एकदम गरम और तेज़ पिचकारी जैसे ही मेरे गर्भाशय के मुंह पर महसूस हुई मेरी भी छूट होने लगी और मैं भी चिल्ला चिल्ला कर झड़ने लगी और अमित को कस कर अपने गले से चिपका लिया.

पिंकी और अमित हमें देख रहे थे.........मैं तो मानो स्वर्ग में थी.........अमित को कस के भींच रखा था.......

अब मुझे अपनी बेहोशी से बाहर आने का अभिनय करना था, सो आँखे बंद किये किये ही में बुदबुदाने लगी- ओह रवि,....... क्या चोदा है तुमने आज मुझे,............ ऐसा मज़ा तो कभी नहीं आया,.................. तुमने ये आज क्या किया.

अमित को मेरे मुंह से रवि का नाम सुन कर एक झटका लगा....... अरे ये तो मुझे रवि समझ रही थी.........और अभी तो इसकी अदालत बाकि है .....अब वो फिर डरा कि जैसे ही मुझे ये सब पता चलेगा फिर उसे टार्चर होना पड़ेगा.

अब जैसे ही मैंने आँख खोली अपने ऊपर अमित को हटते पाया. उधर रवि और पिंकी भी एक दुसरे में समाये हुए थे.......रवि ने भी अपने लंड को पिंकी खोह में से खींच कर निकला जो दोनों के काम-रस से सराबोर था.

मैं चीखी, ये क्या हो रहा था और ये अमित मेरे साथ क्या कर रहा था.......छि छि छि छि .......और रवि और पिंकी तुम दोनों भी ये ............हाय राम ...........और मैंने एक चादर अपने ऊपर खींच ली और आँख बंद करके रोने लगी.

रवि मेरे पास आया कि मैं तुम्हे सब बताता हूँ.............मैंने थोड़ी देर तक बहुत सीन क्रियेट किया और फिर जब तीनो ने हाथ जोड़ कर सिर्फ सुन भर लेने की याचना की तब कहीं बमुश्किल उनकी बात सुन ने के लिए राज़ी हुई.

उन तीनो ने मिलकर सारी घटना बताई.............और पूछा कि अच्छा बताओ अब किसका दोष है इसमें......मैंने सर पकड़ लिया........अमित ने माफ़ी मांगी और कहा दीदी जो होना था सो तो हो गया और फिर हम सब तो घर के ही लोग हैं.........एक दुसरे के हमराज़....बाहर किसी को कुछ पता नहीं चलेगा......बोलो रवि..... पिंकी...... ठीक कहा ना मैंने, दोनों ने हाँ में सर हिलाए, अरे उनको तो हिलाना ही थे...........पिंकी ने धीरे से ओ शेप में हाथ बनाते हुवे इशारा किया कि मान गए दीदी तुम्हे...........

मैंने धीरे धीरे नार्मल दिखने की कोशिश की.........कुछ देर की चुप्पी के बाद मैंने कहा..........चलो जो हुआ सो हुआ ....परन्तु मेरा एक बहुत बड़ा नुक्सान हो गया इन सब में.............

अमित: दीदी,....... नहीं,.......... आप बोलो मेरी गलती थी ना,................. आप आदेश करो,........ मैं कुछ भी कर सकता हूँ,........... आपका क्या नुक्सान हुआ है............

अब मैं शर्माने लगी.....नहीं नहीं जो हुआ सो हुआ, अब क्या किया जा सकता है...............

पिंकी: बोलो दीदी, अमित बोल तो रहा है बेचारा, देखो अभी भी तुम्हारे लिए इसके दिल में कितना रेस्पेक्ट है........तुम बताओ तो उसे............

मैं: पर वो सुन कर रवि को बुरा लग सकता है.............

रवि: देखो रोमा, मैं अमित के न्याय करने के तरीके पर फ़िदा हो गया. अपनी गलती के लिए इसने अपनी पत्नी मुझे सौंप दी, तुम मेरी चिंता छोडो और बताओ.

अब मेरी बाज़ी का अंतिम पत्ता निकालना था मुझे और मैंने वो निकाल कर फेंका..........

मैं: आप सब ने सुना होगा ना.....मैं जब झड रही थी तो क्या बडबडा रही थी.........कि मुझे आज तक इतना मज़ा नहीं आया, मुझे होश आते ही मैं झड़ने के करीब थी और मैं बंद आँखों से अमित को रवि समझ रही थी..............पर वो बात सच थी कि मुझे आज से पहले इतना मज़ा कभी नहीं आया.......अब इतना मज़ा चख लिया है......रवि प्लीज़ तुम बुरा मत मानना.....पर अब शायद ही मुझे इतना मज़ा कभी आएगा......मुझे ये स्वाद चखा कर अमित ने तो मुझे कहीं का नहीं छोड़ा, अब कैसे मिलेगा मुझे ये परमानन्द . क्यों अमित क्यों.......मुझे क्यों ये स्वाद चखाया, मैं रवि से सम्पूर्ण संतुष्ट थी, मुझमे एक नयी प्यास जगा कर जिंदगी भर के लिए प्यासा छोड़ दिया है..............ये नुक्सान हुआ है.............

मेरी बात सुनकर तीनो सकते में आ गए............पिंकी अपने शानदार अभिनय को जारी रखते हुए अविश्वास से मुझसे बोली- तो क्या दीदी तुमने अमित को माफ़ कर दिया, हे भगवन तेरा बहुत बहुत शुक्रिया, वरना मैं ये अपराध बोध लेकर केसे जीती.

अमित को तो जैसे अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हुआ- बस इतनी सी बात, और फिर रवि से बोला- अब तुम बोलो क्या बोलते हो, क्या अपनी पत्नी की ख़ुशी के लिए मुझे उसे सुख देने की इज़ाज़त दे सकते हो.......देखो बदले में मैं तुम्हे भी कुछ दे रहा हूँ............पिंकी, तुम अपने जीजू के साथ खुशियाँ बाँट सकती हो क्या..............

पिंकी ने अपनी नज़रे शर्म से झुका ली.............अमित फिर बोला देखो रवि, तुम्हारी प्यारी साली तुम्हारी पूरी घरवाली बन ने को तैयार है............दोस्त क्या कहते हो.....हाँ कह दो ना..........वैसे मेरी पिंकी भी रोमा दीदी से कुछ कम नहीं है.....घाटे में नहीं रहोगे...............

ये सुन कर रवि ने मेरी ओर प्रश्नवाचक निगाह डाली.................मैंने अब हंस के रवि को स्वीकृति दे दी........

"जाओ रवि, मैं अपनी प्यारी सी छोटी बहन तुम्हारे हवाले करती हूँ.............तुम्हे उसका साथ पसंद तो आएगा ना........"

अब शर्म से नज़रे झुकाने की बारी रवि की थी.............बिलकुल लड़कियों की तरह शर्मा कर बोला........हाँ पिंकी मुझे बहुत पसंद है.........

अमित: बस तो हो गया आपका मसला हल दीदी. अब तुम्हारा नुक्सान पूरा करने की जिम्मेदारी पूरी की पूरी मेरी.............

मैं: पर अभी भी एक गड़बड़ कर रहे तो अमित तुम.........

सब हैरान कि अब क्या रह गया है..............

मैं: अब मैं तुम्हारी दीदी नहीं.........अब तुम्हारी रोमा डार्लिंग हूँ............बुलाओ मुझे ऐसे..........

और सब जोर से हंस पड़े...........................................

और फिर हम चारों ने अगले दो दिन, बिना रुके, इस "मज़ेदार अदला-बदली" का भरपूर आनंद उठाया..........

samaapt
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